JPSC के पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते गिरफ्तार, परीक्षा विवाद के बीच CID का बड़ा एक्शन

रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी को लेकर चल रहे विवाद के बीच CID ने बड़ा एक्शन लिया है। आयोग के पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते को गिरफ्तार कर लिया गया है। उनकी गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है, जब JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। खियांग्ते पहले ही चेयरमैन पद से इस्तीफा दे चुके थे और इसके बाद CID उनसे कई दौर की पूछताछ कर चुकी थी। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, इस मामले में CID की कार्रवाई लगातार आगे बढ़ रही है।
छापेमारी के बाद खियांग्ते ने दिया था इस्तीफा
एल. खियांग्ते ने 22 जुलाई 2026 को JPSC के चेयरमैन पद से इस्तीफा दिया था। यह फैसला उस वक्त आया था, जब आयोग की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी को लेकर सवाल उठ रहे थे और CID ने जांच तेज कर दी थी। खियांग्ते ने इस्तीफा देते समय कहा था कि वह चाहते हैं कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो। इसके बाद भी जांच एजेंसी ने उनसे पूछताछ जारी रखी। JPSC की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर विवाद बढ़ने के बीच आयोग के तीन सदस्यों ने भी इस्तीफा दिया। खियांग्ते की गिरफ्तारी इन इस्तीफों के अगले दिन हुई है।
3 अगस्त को करीब 7 घंटे हुई थी पूछताछ
CID ने 3 अगस्त को खियांग्ते से करीब सात घंटे तक पूछताछ की थी। वह सुबह करीब 11 बजे CID कार्यालय पहुंचे और शाम करीब 6 बजे वहां से निकले थे। यह पूछताछ JPSC की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के सिलसिले में हुई थी। इससे पहले भी खियांग्ते से कई बार पूछताछ की जा चुकी थी। रिपोर्ट के मुताबिक, 28 जुलाई के बाद उनसे चार दौर में पूछताछ हुई थी। इसी जांच के दौरान CID ने JPSC से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी भी की थी। अब गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी किस तरह हुई और इसमें किन लोगों की भूमिका रही।
ब्लैकलिस्टेड कंपनी को परीक्षा का काम देने पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में TDPL यानी TSR Data Processing Limited का नाम भी सामने आया है। खियांग्ते पर आरोप है कि उनके कार्यकाल में JPSC की परीक्षाओं के संचालन का काम इस कंपनी को दिया गया। छात्रों और प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि TDPL को पहले झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की ओर से कथित अनियमितताओं के चलते ब्लैकलिस्ट किया गया था। इसके बावजूद JPSC में उसे परीक्षा से जुड़ा काम दिया गया। इसी को लेकर खियांग्ते की भूमिका पर सवाल उठे हैं। प्रदर्शन कर रहे छात्रों की प्रमुख मांगों में यह भी शामिल है कि TDPL के जरिए कराई गई परीक्षाओं की जांच की जाए और जरूरत पड़ने पर उन्हें रद्द किया जाए।
2 करोड़ रुपए और 20% कमीशन मांगने का भी दावा
मामले में TDPL के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी का नाम भी सामने आया है। उनके कथित बयान के मुताबिक, खियांग्ते ने TDPL को काम दिलाने के बदले 2 करोड़ रुपये और हर भुगतान पर 20 प्रतिशत कमीशन की मांग की थी। हालांकि, यह एक आरोप/दावा है। CID की ओर से इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए इसे फिलहाल आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। मामले की जांच के बाद ही इन दावों की सच्चाई स्पष्ट होगी।
14वीं JPSC परीक्षा के रिजल्ट के बाद बढ़ा विवाद
JPSC की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के रिजल्ट के बाद छात्रों की नाराजगी और बढ़ गई थी। इस परीक्षा में 103 पदों के लिए मुख्य परीक्षा के लिए 2204 उम्मीदवारों को चुना गया था। रिजल्ट जारी होने के बाद अभ्यर्थियों ने कई सवाल उठाए। उनकी प्रमुख मांग थी कि कैटेगरी के हिसाब से कटऑफ भी जारी की जाए। इसके अलावा मेरिट लिस्ट को लेकर भी सवाल उठे। कुछ अभ्यर्थियों ने दावा किया कि जारी मेरिट लिस्ट पर आयोग के संवैधानिक सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं थे। सोशल मीडिया पर कुछ कथित OMR शीट भी सामने आईं। इनको लेकर छात्रों ने दावा किया कि कुछ ऐसे उम्मीदवार भी सफल हुए, जिनके अंक कथित तौर पर कटऑफ से कम थे। हालांकि, सोशल मीडिया पर सामने आए इन दावों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। इसी वजह से CID की जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कम सवालों के जवाब देने वाले उम्मीदवार के चयन का भी दावा
बाद में बैकलॉग भर्ती परीक्षा को लेकर भी इसी तरह के सवाल उठे। छात्रों ने एक उम्मीदवार को लेकर दावा किया कि उसने बहुत कम सवालों के जवाब दिए थे, फिर भी उसका नाम सफल उम्मीदवारों की सूची में आया। छात्रों का कहना है कि इन सभी मामलों की जांच एक साथ होनी चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि परीक्षा प्रक्रिया में वास्तव में कहां गड़बड़ी हुई। JPSC की पहले की कुछ परीक्षाओं, जिनमें FRO भी शामिल है, को लेकर भी अनियमितताओं की शिकायतें सामने आने की बात कही गई है। खियांग्ते पर आरोप है कि शिकायतों के बावजूद संबंधित एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई।
राम रहीम केस में आया नया मोड़, बरी होने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला, सरकार पर भी टिप्पणी
खियांग्ते कौन हैं?
एल. खियांग्ते झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव रह चुके हैं। मुख्य सचिव के पद से रिटायर होने के बाद उन्हें फरवरी 2025 में JPSC का चेयरमैन नियुक्त किया गया था। उनके कार्यकाल में ही 14वीं सिविल सेवा परीक्षा को लेकर विवाद सामने आया। अब उनकी गिरफ्तारी के बाद JPSC परीक्षा विवाद की जांच और महत्वपूर्ण हो गई है। इस मामले में CID पहले ही कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर चुकी है। खियांग्ते की गिरफ्तारी के साथ इस मामले में CID द्वारा गिरफ्तार किए गए लोगों की संख्या 20 बताई जा रही है। छात्रों का कहना है कि उन्हें परीक्षा प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता चाहिए। वे कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। अब जांच में यह साफ होना बाकी है कि परीक्षा प्रक्रिया में वास्तव में क्या गड़बड़ी हुई और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका थी।



















