मां पर हत्या की साजिश का आरोप...फिर भी बेटे की अनुकंपा नौकरी नहीं रुकेगी, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर किसी मृत सरकारी कर्मचारी के परिवार के किसी सदस्य के खिलाफ आपराधिक मामला चल रहा है, तो सिर्फ इसी आधार पर उसके बेटे या आश्रित की अनुकंपा नियुक्ति नहीं रोकी जा सकती। कोर्ट ने साफ किया कि हरियाणा सरकार का संबंधित नियम केवल आर्थिक सहायता पर लागू होता है, अनुकंपा नौकरी पर नहीं।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला हरियाणा के रहने वाले अतुल चौहान से जुड़ा है। उनके पिता गजेंद्र सिंह चौहान सरकारी स्कूल में जूनियर बेसिक टीचर (JBT) थे। सितंबर 2021 में उनकी मौत सड़क हादसे में हो गई थी। बाद में अतुल की मां पुष्पा देवी पर गजेंद्र सिंह की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया गया। हालांकि अक्टूबर 2024 में निचली अदालत ने उन्हें संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था, लेकिन इस फैसले के खिलाफ अपील अभी भी लंबित है।
नौकरी के आवेदन पर क्यों लगी रोक?
अतुल चौहान ने पिता की मौत के बाद अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी मांगी थी। लेकिन हरियाणा सरकार के अधिकारियों ने नियम 23(1) का हवाला देते हुए उनके आवेदन पर कार्रवाई करने से इनकार कर दिया। अधिकारियों का कहना था कि परिवार के एक सदस्य पर मृत कर्मचारी की हत्या की साजिश का आरोप होने के कारण लाभ नहीं दिया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने अतुल चौहान की अपील स्वीकार करते हुए कहा कि अधिकारियों के सामने उनकी नियुक्ति पर विचार करने में कोई कानूनी बाधा नहीं है। कोर्ट ने कहा कि 2019 के नियमों के तहत अतुल की पात्रता और अन्य शर्तों को देखकर उनके मामले का फैसला किया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट का फैसला भी रद्द
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के उस फैसले को भी रद्द कर दिया, जिसमें नियम 23(1) को अनुकंपा नियुक्ति पर लागू माना गया था। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह तीन महीने के भीतर अतुल चौहान के दावे पर गुण-दोष के आधार पर फैसला करे।
नियम 23(1) की कोर्ट ने कैसे व्याख्या की?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नियम 23(1) की भाषा बिल्कुल स्पष्ट है। इसमें केवल अनुकंपा के आधार पर वित्तीय सहायता का उल्लेख किया गया है। कोर्ट के अनुसार इस नियम को नौकरी देने के मामलों तक नहीं बढ़ाया जा सकता। इसलिए अनुकंपा नियुक्ति रोकने के लिए इस नियम का इस्तेमाल गलत था।
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नियम की संवैधानिक वैधता बरकरार
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने नियम 23(1) को असंवैधानिक नहीं माना। अदालत ने कहा कि यह प्रावधान इसलिए बनाया गया है ताकि जिस व्यक्ति पर कर्मचारी की मौत के लिए जिम्मेदार होने का आरोप हो, उसे तुरंत आर्थिक लाभ न मिल सके।
सरकार को नियम बदलने की सलाह
सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार को सुझाव दिया कि यदि जरूरत हो तो नियमों में संशोधन कर कानून की इस कमी को दूर किया जा सकता है। साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति कोई कानूनी अधिकार नहीं है, लेकिन किसी भी आवेदन पर फैसला करते समय पात्रता और नियमों के अनुसार निष्पक्ष विचार करना जरूरी है।











