महाराष्ट्र के नासिक से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को झकझोर दिया है। TCS IT कंपनी में काम करने वाली महिलाओं ने यौन उत्पीड़न, धोखाधड़ी और जबरन धर्म परिवर्तन जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, हर दिन नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं।
इस पूरे मामले में रिश्तों का जाल, भरोसे का टूटना और डर का माहौल साफ नजर आता है। इस पूरे केस को आसान और साफ भाषा में समझते हैं।
पीड़िता ने बताया कि उसकी मुलाकात जनवरी 2022 में एक दानिश शेख नाम के युवक से हुई थी। दोनों एक ही कॉलेज में पढ़ चुके थे, इसलिए जल्दी दोस्ती हो गई। धीरे-धीरे बातचीत बढ़ी और दोनों करीब आने लगे। लेकिन जुलाई 2022 में कहानी ने अचानक मोड़ लिया।
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पीड़िता के मुताबिक, एक दिन मिलने के दौरान दानिश ने अचानक शारीरिक संबंध बनाने की मांग की। उसने जबरदस्ती उसे पकड़कर किस किया। जब लड़की ने विरोध किया, तो दानिश ने तुरंत शादी का प्रस्ताव रख दिया। उसने कहा मैं तुमसे शादी करना चाहता हूं। यहीं से भ्रम और दबाव की शुरुआत हुई।
पढ़ाई खत्म होने के बाद दानिश ने पीड़िता को एक बड़ी कंपनी में नौकरी के लिए इंटरव्यू देने को कहा। पीड़िता का सिलेक्शन हो गया और हैरानी की बात ये कि दानिश भी उसी कंपनी में काम करता था।
कंपनी में दानिश के दोस्त तौसीफ अख्तर और निदा खान भी इस ग्रुप में शामिल हो गए। ये लोग अक्सर साथ बैठते, बातें करते और धीरे-धीरे बातचीत का विषय धर्म पर आ गया।
पीड़िता का आरोप है कि दानिश और उसके दोस्त हिंदू और मुस्लिम धर्म के बीच तुलना करते थे। वे अपने धर्म को बेहतर बताते और हिंदू रीति-रिवाजों पर सवाल उठाते। धीरे-धीरे ये बातचीत दबाव में बदल गई। उसे बार-बार धर्म बदलने के लिए समझाया जाने लगा।
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अगस्त 2024 में दानिश ने पीड़िता को बाइक पर घुमाने के बहाने एक होटल ले गया। वहां उसने जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाए। पीड़िता का कहना है कि दानिश के दोस्त तौसीफ को इस रिश्ते की जानकारी मिल गई। इसके बाद उसने इसका फायदा उठाया। निजी तस्वीरों से ब्लैकमेल किया। खुद संबंध बनाने का दबाव डाला और ऑफिस में उसकी कमर और शरीर के निचले हिस्से को पकड़ने जैसी अश्लील हरकतें करने लगा। तौसीफ पर आरोप है कि वह ऑफिस में भी उसे गलत तरीके से छूता था, जिससे पीड़िता बेहद असहज महसूस करती थी।
फरवरी 2026 में इस केस ने बड़ा मोड़ लिया। पीड़िता को एक महिला का मैसेज आया। बातचीत में पता चला कि वह दानिश की पत्नी है और उसके दो बच्चे भी हैं। यह सुनकर पीड़िता पूरी तरह टूट गई, क्योंकि दानिश खुद को अविवाहित बता रहा था।
पीड़िता का आरोप है कि उसे दोस्ती, प्यार, नौकरी और शादी के नाम से जाल में फंसाया गया। पुलिस जांच में भी इसी तरह का एक पैटर्न सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, आरोपियों द्वारा नए कर्मचारियों की पूरी जानकारी जुटाई जाती थी। पहले उनके साथ दोस्ती बढ़ाई जाती, फिर भावनात्मक रूप से करीब लाकर उन पर मानसिक दबाव बनाया जाता था। धीरे-धीरे यह दबाव इतना बढ़ जाता कि पीड़ित खुद को असहाय महसूस करने लगते और इसी का फायदा उठाकर उनका शोषण किया जाता था।
इस पूरे मामले में कंपनी के HR विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि पीड़िताओं की शिकायतों को गंभीरता से लेने के बजाय उन्हें नजरअंदाज किया गया और कुछ मामलों में उल्टा नौकरी से निकालने की धमकी तक दी गई। इतना ही नहीं, यह भी कहा जा रहा है कि कुछ लोगों को इस पूरे सिस्टम को चलाने के लिए पैसे दिए जाते थे। एक गवाह ने दावा किया है कि HR विभाग की एक महिला अधिकारी को भी कथित तौर पर चंदा दिया जाता था।
एक कर्मचारी के अनुसार, आरोपियों द्वारा कहा जाता था कि हिंदू लड़कियों को प्रेमिका बनाओ और उनसे शादी करो धर्म बदल लो। अब तक 8 महिला कर्मचारियों ने शिकायत दर्ज कराई है, जिनमें आरोप है कि उन्हें शादी का झूठा वादा कर रिश्ते में फंसाया गया, बार-बार शारीरिक संबंध बनाने का दबाव बनाया गया, गलत तरीके से छुआ गया और उनके निजी जीवन को लेकर अपमानजनक टिप्पणियां की गईं।
पुलिस के मुताबिक, यह मामला सिर्फ महिला कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहा। एक पुरुष कर्मचारी ने भी आरोप लगाया है कि उसे नमाज पढ़ने के लिए मजबूर किया गया और उसके धर्म का मजाक उड़ाया गया।
जांच में एक और चौंकाने वाला एंगल सामने आया है, जिसमें मलेशिया से जुड़े कनेक्शन की बात कही जा रही है। पुलिस को विदेशी फंडिंग का शक है और व्हाट्सऐप चैट में ‘इमरान’ नाम के एक शख्स का जिक्र भी सामने आया है। पीड़ितों का दावा है कि एक युवक वीडियो कॉल के जरिए उनसे बातचीत करता था और कथित तौर पर उनके धर्म के खिलाफ भड़काने की कोशिश करता था।
इस मामले में अब तक पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 9 लोगों पर FIR दर्ज और 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें 6 पुरुष और 1 महिला शामिल हैं, जबकि एक अन्य महिला आरोपी अभी फरार बताई जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच को तेज करने के लिए पुलिस ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है।
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SIT अब पूरे मामले की गहराई से जांच में जुटी हुई है। टीम सभी पीड़ितों की शिकायतों को विस्तार से खंगाल रही है, साथ ही डिजिटल सबूत जैसे मोबाइल डेटा, चैट्स और अन्य तकनीकी जानकारी की भी जांच की जा रही है।
मामले के सामने आने के बाद कंपनी ने भी कदम उठाते हुए आरोपित कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया है और आंतरिक जांच शुरू कर दी है। इतना ही नहीं अपनी नासिक यूनिट के सभी 150 कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम करने के आदेश दे दिए हैं। हालांकि, यह पूरा प्रकरण कॉर्पोरेट सिस्टम पर कई बड़े सवाल खड़े करता है।
क्या कॉर्पोरेट दफ्तरों में सुरक्षा सिर्फ कागजों तक सीमित है? क्या भरोसे का इस्तेमाल जाल बिछाने के लिए किया जा रहा है? क्या धर्म और रिश्तों के नाम पर लोग शिकार बनाए जा रहे हैं?