Peoples Update Special :नापतौल विभाग का अजब-गजब सिस्टम!निरीक्षक ही बना रहे केस, फिर 500 किमी दूर बैठकर खुद ही कर रहे फैसला

लेखक: विजय एस. गौर, भोपाल। मध्यप्रदेश के नापतौल विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विभाग में कई जिला निरीक्षकों को उनके कार्यस्थल से 500 किलोमीटर तक दूर स्थित संभागों के सहायक नियंत्रक और उप नियंत्रक (डिप्टी कंट्रोलर) का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया है। इससे ऐसी स्थिति बन गई है कि निरीक्षक पहले दुकानों, पेट्रोल पंपों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई कर केस दर्ज करते हैं और बाद में वही अधिकारी उप नियंत्रक के रूप में उन्हीं मामलों का निपटारा भी करते हैं। इस व्यवस्था को लेकर विभाग की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं।
रिश्वत कांड के बाद फिर चर्चा में आया मामला
हाल ही में लोकायुक्त पुलिस ने छिंदवाड़ा के जिला निरीक्षक नसीमउद्दीन को भोपाल में रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। उनके पास छिंदवाड़ा जिले के निरीक्षक के साथ-साथ भोपाल जिले के निरीक्षक और भोपाल संभाग के उप नियंत्रक (डिप्टी कंट्रोलर) का अतिरिक्त प्रभार भी था। रिश्वत मामले के सामने आने के बाद विभाग ने बुधवार को नसीमउद्दीन से भोपाल संभाग के उप नियंत्रक और भोपाल जिला निरीक्षक का अतिरिक्त प्रभार वापस ले लिया है। हालांकि वे अभी भी छिंदवाड़ा जिले के निरीक्षक बने हुए हैं।
निरीक्षक ही दर्ज करते हैं केस
नापतौल विभाग के नियमों के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक मशीनों, पेट्रोल पंपों, टैंकरों और अन्य माप-तौल उपकरणों की साल में एक बार जांच की जाती है, जबकि कांटे और बांट का सत्यापन दो वर्ष में एक बार होता है। जांच के दौरान यदि किसी प्रतिष्ठान में गड़बड़ी मिलती है तो नापतौल निरीक्षक प्रकरण दर्ज करते हैं। लेकिन विभाग में उप नियंत्रक और सहायक नियंत्रक के अधिकांश पद खाली होने के कारण इन्हीं निरीक्षकों को अतिरिक्त प्रभार दे दिया गया है। परिणामस्वरूप वही अधिकारी जिन्होंने कार्रवाई की होती है बाद में उप नियंत्रक की भूमिका में उन्हीं मामलों की सुनवाई और निर्णय भी करते हैं।
चार उप नियंत्रक और दस सहायक नियंत्रकों के पद खाली
विभागीय जानकारी के अनुसार नापतौल विभाग में 4 उप नियंत्रक और 10 सहायक नियंत्रक के पद स्वीकृत हैं। फिलहाल इन सभी पदों का अतिरिक्त प्रभार निरीक्षकों के पास है। स्थायी पदस्थापना नहीं होने से पूरी व्यवस्था अतिरिक्त प्रभार के भरोसे चल रही है।
ये भी पढ़ें: शताब्दी एक्सप्रेस में यात्रियों को दी एक्सपायरी ब्रेड... IRCTC ने वेंडर पर लगाया 1 लाख का जुर्माना
लोकायुक्त ने विभाग से मांगा जवाब
लोकायुक्त ने नसीमउद्दीन के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति और अन्य मामलों की जांच भी शुरू कर दी है। साथ ही नापतौल विभाग के नियंत्रक से यह भी पूछा है कि छिंदवाड़ा में पदस्थ निरीक्षक को करीब 500 किलोमीटर दूर भोपाल जिला और संभाग का प्रभार आखिर किस आधार पर सौंपा गया था। इस सवाल के बाद विभाग की कार्यप्रणाली और अतिरिक्त प्रभार देने की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में आ गई है।
जिला निरीक्षकों को इस तरह दिए गए संभागीय प्रभार
| निरीक्षक | पदस्थी स्थल | उप नियंत्रक प्रभार |
| नसीमउद्दी | छिंदवाड़ा | भोपाल |
| राजेश पिल्लई | भोपाल | ग्वालियर |
| संजय पाटनकर | उज्जैन-इंदौर | उज्जैन |
| राजकुमार कछवाहा | बालाघाट | सागर |
| लक्ष्मीचंद खांडवी | गुना | मुरैना |
| शिवकुमार उइके | शहडोल | जबलपुर |
ये भी पढ़ें: MP High Court : ‘बालिग विकलांग बेटी भी पिता से भरण-पोषण पाने की हकदार’
विभाग ने बताई मजबूरी
नापतौल विभाग के प्रभारी नियंत्रक बृजेश सक्सेना ने बताया कि विभाग में लंबे समय से पदोन्नति नहीं होने के कारण उप नियंत्रक और सहायक नियंत्रक के पद रिक्त हैं। इसी वजह से निरीक्षकों को अतिरिक्त प्रभार सौंपना पड़ा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में विभाग में केवल 59 निरीक्षक कार्यरत हैं। संसाधनों की कमी के कारण भोपाल जैसे बड़े जिले में दो निरीक्षक तैनात हैं जबकि कई छोटे जिलों का काम एक ही निरीक्षक संभाल रहा है। ऐसे में अतिरिक्त प्रभार देना विभाग की मजबूरी बन गया है।












