Peoples Update Special :हाई इनकम के बाद भी घर खर्च में हिस्सेदारी पर हो रहे विवाद  

अच्छी खासी सैलरी वाने वाले दंपति भी घर खर्च को लेकर विवाद करते हैं। विवाद भी ऐसे नहीं कि घर में सुलझ जाएं, फैमिली कोर्ट तक पहुंच गए। इस साल छह माह में भोपाल फैमिली कोर्ट में ऐसे आठ मामले, इंदौर में भी 5 मामले आए हैं।
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हाई इनकम के बाद भी घर खर्च में हिस्सेदारी पर हो रहे विवाद   

पल्लवी वाघेला, भोपाल। आर्थिक तंगी के चलते घर खर्च को लेकर दंपति के बीच विवाद के किस्से तो कई सुनें होंगे, लेकिन यहां मामला कुछ अलग है। घर खर्च के लिए अपनी लाखों की तनख्वाह में से पैसा कौन निकाले, इस पर विवाद की स्थिति बन रही है। आलम यह है कि यह मामले अब घर की चारदीवारी से निकल कोर्ट की दहलीज तक पहुंच रहे हैं। इस साल जून माह तक भोपाल में आठ और इंदौर में 5 ऐसे मामले प्रकाश में आए हैं, जिनमें  खर्च में हिस्सेदारी को लेकर कपल में विवाद हुआ। बता दें, इन सभी मामलों में कपल्स की शादी को छह माह से लेकर ढाई साल तक का समय ही हुआ है।

शादी के एक साल बाद खर्च को लेकर सवाल-जवाब

पत्नी भोपाल और पति छिंदवाड़ा क्षेत्र का निवासी है और वर्तमान में दोनों ही बेंगलुरु में अलग-अलग क्षेत्र में लाखों रुपए की सैलरी पा रहे हैं। ऑनलाइन चैटिंग के बाद परिवार की रजामंदी से ढाई साल पहले शादी हुई। पत्नी के मुताबिक एक साल तो ठीक रहा, उसके बाद पति शॉपिंग और घर के अन्य खर्च को लेकर सवाल-जवाब करने लगा। उसका कहना था कि तुम अपने शौक अपनी सैलरी से पूरे करो। वहीं पत्नी का कहना था कि शादी के बाद यह पति की जिम्मेदारी है कि वह उसकी और घर की हर जरूरत का ख्याल रखे। पत्नी ने कहा कि वह अपनी सैलरी को सेविंग्स के तौर पर बचाकर रखना चाहती है और जब जरूरत होगी तो वह इसे जरूर देगी, लेकिन शायद पति उसपर भरोसा नहीं करता। मामले में दंपति के परिवार भी दोनों की सुलह चाहते हैं।

पत्नी करती है ज्यादा खर्च

इंदौर से जुड़े दंपति के मामले में भी दंपति हाईटेक कंपनी में कार्यरत है। पति वर्क फ्रॉम होम करता है, जबकि पत्नी कंपनी के इंदौर स्थित ऑफिस में जाती है। मामले में पति ने तलाक का केस लगाया है। उसका कहना है कि वह वर्क फ्रॉम होम करता है न उसका पेट्रोल खर्च होता है और न अन्य खर्च होते हैं। इसके विपरीत ऑफिस जाने के कारण पत्नी के खर्चे कई गुना ज्यादा है। ऐसे में उसने पत्नी से घर खर्च में अधिक हिस्सेदारी देने की बात की तो वह बिफर गई। पति ने यह आरोप भी लगाया कि उसे शक है कि पत्नी अपनी तनख्वाह का बड़ा हिस्सा मायके वालों पर खर्च करती है। मामले में पत्नी ने पति के आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि वह किसी तरह पति के दबाव में नहीं आएगी, आठ माह की शादी में मामला कोर्ट तक पहुंच गया है।

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पति के खर्चों से तकलीफ

मूल रूप से भोपाल के रोहित नगर क्षेत्र निवासी दंपति नोएडा में कार्यरत हैं। शादी के छह माह में ही पत्नी ने भरण-पोषण के रूप में अपने स्त्री धन के अलावा 50 लाख रुपए की मांग करते हुए याचिका दायर कर दी। पत्नी का कहना है कि पति बिना सोचे समझे अनाप-शनाप पैसा खर्च करता है और खुद का पैसा खर्च होने पर उससे डिमांड करता है। उसने यह भी कहा कि छह माह की शादी में पति जरूरतों के नाम पर उससे 10 लाख रुपए ले चुका है, जिसका पूरा हिसाब उसके पास है। मामले में 20 लाख रुपए भरण-पोषण पर पति ने तलाक के लिए सहमति दी है। हालांकि, पत्नी ने अभी इस रकम पर हामी नहीं भरी है।

ईगो की लड़ाई 

हाई-इनकम कपल्स में आर्थिक समस्या कम और 'ईगो', 'समानता की अलग-अलग व्याख्या' तथा  'आर्थिक स्वतंत्रता' का टकराव अधिक होता है। कई लोग अपनी कमाई को व्यक्तिगत उपलब्धि मानते हैं, जबकि विवाह में उसे साझा जिम्मेदारी के रूप में देखना जरूरी होता है। यदि दोनों की आर्थिक सोच अलग हो और संवाद कमजोर हो, तो छोटा-सा वित्तीय मतभेद भी रिश्ते में तनाव बढ़ा देता है। इसलिए अब प्री मैरिज काउंसलिंग पर जोर दिया जाता है, जिसमें इस बात पर भी चर्चा होती है कि परिवार की हर तरह की जिम्मेदारी कैसे बटेगी।

डॉ. दीप्ति सिंघल, मनोवैज्ञानिक

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Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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