नागपुर। महाराष्ट्र के नागपुर से सामने आया एक मामला न सिर्फ चौंकाने वाला है, बल्कि समाज में काम कर रही संस्थाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। आरोप है कि समाज सेवा के नाम पर चल रहे एक NGO की आड़ में महिलाओं पर धर्म बदलने का दबाव बनाया जा रहा था और उनके साथ छेड़छाड़ जैसी घटनाएं हो रही थीं। इस खुलासे के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब महाराष्ट्र ATS भी इसकी जांच कर रही है।
नागपुर के मानकापुर इलाके में चल रहे ‘फिकर फाउंडेशन’ और ‘पढ़े हम, पढ़ाए हम’ नाम के NGO के संचालक रियाज फजल काजी को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोप है कि, यह संस्था स्वास्थ्य, खेल और गरीब बच्चों की मदद जैसे सामाजिक कार्यों के नाम पर चल रही थी, लेकिन अंदर कुछ और ही गतिविधियां संचालित हो रही थीं।
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब NGO में काम करने वाली एक महिला कर्मचारी ने हिम्मत दिखाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के मुताबिक, उस पर जबरन धार्मिक नियमों का पालन करने का दबाव डाला जाता था। साथ ही छेड़छाड़ और मानसिक उत्पीड़न के भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने शिकायत मिलते ही कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में लिया और अदालत में पेश किया, जहां से उसे 23 अप्रैल तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया है।
यह भी पढ़ें: नासिक TCS केस: आरोपी ने ‘प्रेग्नेंसी’ के आधार पर मांगी जमानत, कंपनी बोली- HR मैनेजर नहीं थी निदा खान
पीड़ित महिलाओं ने जो आरोप लगाए हैं, वे बेहद गंभीर और चिंताजनक हैं। उनका कहना है कि, NGO संचालक उन पर इस्लामिक रीति-रिवाज अपनाने का दबाव बनाता था। इस्लामिक कपड़े पहनने के लिए मजबूर किया जाता था, नमाज पढ़ने और रोजे रखने का दबाव डाला जाता था। ‘नमस्ते’ की जगह ‘खुदा हाफिज’ बोलने को कहा जाता था और धार्मिक परंपराएं बदलने के लिए मानसिक दबाव बनाया जाता था। अगर कोई महिला इन बातों का विरोध करती, तो उसके साथ छेड़छाड़ की जाती और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था।
एक 23 वर्षीय युवती ने आरोप लगाया कि, आरोपी उसे केबिन में बुलाकर अश्लील हरकतें करता था। यहां तक कि CCTV कैमरे बंद करके दुर्व्यवहार करने की भी बात सामने आई है।
मामले में एक और चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि आरोपी महिलाओं की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करता था। फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स बनाए गए थे और डिजिटल वॉच के जरिए निगरानी की जाती थी। कर्मचारियों की निजी जिंदगी पर नजर रखी जाती थी। यह पहलू जांच एजेंसियों के लिए और भी गंभीर बन गया है, क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि मामला सिर्फ व्यक्तिगत उत्पीड़न तक सीमित नहीं हो सकता।
[tag id="69972" type="TCS Case" slug="tcs-case"]
मामले की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र एंटी टेररिज्म स्क्वाड (ATS) को भी जांच में शामिल किया गया है। अब जांच का फोकस केवल आरोपों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे संभावित नेटवर्क और फंडिंग पर भी है।
पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि, NGO को फंडिंग कहां से मिल रही थी, क्या इसके पीछे कोई विदेशी या बड़ा नेटवर्क है। कितने लोगों को अब तक प्रभावित किया गया। CCTV फुटेज, बैंक ट्रांजेक्शन और जुड़े लोगों के बयान खंगाले जा रहे हैं, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने लाई जा सके।
नागपुर का यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब महाराष्ट्र के नासिक में TCS यूनिट से जुड़ा एक विवाद पहले से चर्चा में है। उस केस में भी एक महिला ने आरोप लगाया था कि, शादी का झांसा देकर उसके साथ दुष्कर्म किया गया और फिर धर्म बदलने का दबाव बनाया गया।
दोनों मामलों में समानताएं देखने को मिल रही हैं-
हालांकि, अभी तक इन दोनों मामलों के बीच किसी आधिकारिक कनेक्शन की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जांच एजेंसियां इस एंगल पर भी नजर बनाए हुए हैं।
[breaking type="Breaking"]
मानकापुर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ छेड़छाड़ और अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस अब हर एंगल से जांच कर रही है।
जांच में शामिल प्रमुख बिंदु-
पुलिस का कहना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, और भी खुलासे हो सकते हैं।