PU Special :MPRDC अपनाएगा महाराष्ट्र का SPV मॉडल, बड़े सड़क प्रोजेक्टों को मिलेगी नई वित्तीय ताकत

मप्र में बड़े एक्सप्रेस-वे और हाईवे प्रोजेक्टों को गति देने के लिए MPRDC महाराष्ट्र के SPV मॉडल को अपनाने की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित मॉडल में अलग परियोजना इकाई के जरिए 80 हजार करोड़ रुपए से अधिक के सात इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए कर्ज जुटाने, टोल से ऋण चुकाने और परियोजनाओं का वित्तीय प्रबंधन करने की योजना है।
MPRDC अपनाएगा महाराष्ट्र का SPV मॉडल, बड़े सड़क प्रोजेक्टों को मिलेगी नई वित्तीय ताकत
फाइल फोटो

अशोक गौतम, भोपाल। मध्यप्रदेश में बड़े एक्सप्रेस-वे और हाईवे प्रोजेक्टों को तेजी से पूरा करने के लिए मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPRDC) अब महाराष्ट्र के सफल MSRDC प्रोजेक्ट एसपीवी मॉडल को अपनाने की तैयारी में है। इस मॉडल के तहत प्रत्येक बड़े प्रोजेक्ट के लिए अलग स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) बनाया जा सकेगा। इससे परियोजना की वित्तीय, कानूनी और कांट्रेक्चुअल जिम्मेदारियां अलग रखने में मदद मिलेगी। इसके माध्यम से एमपीआरडीसी 80 हजार करोड़ रुपए से अधिक के सात इकोनामिक कॉरिडार बनाए जा सकेंगे। इसके साथ ही एमपीआरडीसी की एसपीवी एनएचएआई सहित अन्य एजेंसियों का काम ले सकेंगी। इन कार्यों के लिए कंपनियों को बैंक सीधे लोन दे सकेंगे, एमपीआरडीसी को अभी बैंक सीधे लोन के बजाय सरकार के जरिए देते हैं।

लंबे समय के लिए जुटाया जा सकेगा कर्ज

एसपीवी के जरिए परियोजना के भविष्य के टोल राजस्व और कैश फ्लो के आधार पर लंबे समय के लिए कर्ज जुटाया जा सकेगा। इससे सड़क परियोजनाओं के लिए सीधे बजट पर निर्भरता कम होगी। साथ ही वित्तीय क्लोजर, ईपीसी कॉन्ट्रैक्ट और ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस की प्रक्रिया भी अलग परियोजना इकाई के माध्यम से तेजी से आगे बढ़ाई जा सकेगी। 4600 करोड़ रुपए के स्वीकृत ऋण को भी इस एसपीवी आधारित ढांचे के माध्यम से बड़े सड़क प्रोजेक्टों में लगाया जा सकता है। इससे एक परियोजना तक सीमित रहने के बजाय भविष्य में कई परियोजनाओं के लिए वित्त जुटाने का प्लेटफॉर्म तैयार होगा।इधर, मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग ने भी महाराष्ट्र की तर्ज पर क्लस्टर आधारित एसपीवी मॉडल करने की तैयारी कर रहा है। इसका इस्तेमाल एमडीआर सड़कों के विकास और उन्नयन के लिए किया जा रहा है।

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ऐसे काम करता है यह मॉडल  

अलग कानूनी इकाई- एमएसआरसी एक नई सहायक कंपनी रजिस्टर करती है। उदाहरण के लिए, 'हिंदू हृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे महाराष्ट्र समृद्धि महामार्ग लिमिटेड' समृद्धि एक्सप्रेसवे के लिए बनाई गई एक एसपीवी है। इसी तरह पुणे रिंग रोड के लिए भी अलग एसपीवीएस बनाई गई हैं।

फंड जुटाना - इस मॉडल का मुख्य उद्देश्य बाजार, वित्तीय संस्थानों (जैसे हुडको, एसबीआई कैप्स) या अंतरराष्ट्रीय बैंकों से लोन लेना है। बैंकों को भरोसा होता है कि उनके द्वारा दिया गया पैसा सिर्फ इसी खास प्रोजेक्ट में लगेगा।

जोखिम का बंटवारा- इस मॉडल में प्रोजेक्ट का वित्तीय जोखिम मुख्य कंपनी से अलग रहता है। अगर प्रोजेक्ट में कोई बड़ी रुकावट आती है, तो उसका सीधा असर एमएसआरडीसी की अपनी बैलेंस शीट या सरकारी खजाने पर नहीं पड़ता।

टोल से लोन की अदायगी-एक्सप्रेसवे बनने के बाद जो भी टोल टैक्स वसूला जाता है, वह सीधे उस SPV के खाते में जाता है। इसी टोल रेवेन्यू से बैंक का कर्ज चुकाया जाता है और सड़क का रखरखाव किया जाता है

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सरकार की विजिबिल्टी सर्वे

सरकार ने एमपीआरडीसी के जरिए फिजिबिल्टी सर्वे करा लिया है। इन सड़कों के निर्माण में करीब 80 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा राशि खर्च होगी। इसके निर्माण के लिए सरकार को अपने बजट की भारी भरकम राशि देना पड़ेगा, इससे सरकार का अन्य कार्य प्रभावित हो जाएगा। इसके चलते सरकार एसपीवी के जरिए सड़के बनाने पर विचार कर रहा है। यह सभी सड़के ग्रीन फील्ड के माध्यम से बनाई जाएंगी। इनका उपयोग सरकार इकोनामिक और प्रोग्रेस वे के रूप में करेगी। सड़कों के किनारे स्मार्ट सिटी, मॉल, बाजार, टाउनशिप तैयार करेंगी, इसके जरिए स्थानीय लोगों को रोजगार से जोड़ा जाएगा। वहीं सड़क की लागत और रख-रखाव की राशि टोल वसूली के माध्यम से किया जाएगा।

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By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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