MP Weather Update :24 जून तक टल सकता है मानसून, 3 दिन हीटवेव का अलर्ट; 37% कम बारिश से किसानों की बढ़ी चिंता

भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून का इंतजार अभी और लंबा हो सकता है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार अब प्रदेश में मानसून 22 से 24 जून के बीच प्रवेश कर सकता है। सामान्य तौर पर मानसून 15 जून तक मध्य प्रदेश पहुंच जाता है, लेकिन इस बार इसकी रफ्तार धीमी पड़ गई है। मानसून फिलहाल पश्चिमी तट पर ही अटका हुआ है और अभी मुंबई तक भी नहीं पहुंच सका है। इसके बाद यह महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ होते हुए मध्य प्रदेश में प्रवेश करेगा।
मानसून में देरी के कारण प्रदेश में गर्मी का असर बना हुआ है। मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों तक कई जिलों में हीटवेव और कई स्थानों पर आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया है।
जून में अब तक 37% कम बारिश
बारिश के आंकड़े भी इस बार चिंता बढ़ाने वाले हैं। मौसम विभाग के अनुसार 1 जून से 17 जून के बीच प्रदेश में औसतन 41.6 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन अब तक केवल करीब 26 मिमी यानी लगभग एक इंच वर्षा ही दर्ज की गई है। इस तरह प्रदेश में सामान्य से करीब 37 प्रतिशत कम बारिश हुई है। सबसे खराब स्थिति अलीराजपुर जिले की है, जहां अब तक एक भी बारिश रिकॉर्ड नहीं की गई है। कई अन्य जिलों में भी आधा इंच से कम बारिश हुई है।
किसानों की बढ़ी मुश्किलें
मानसून की देरी का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ रहा है। प्रदेश के अधिकांश किसान सोयाबीन, उड़द, मूंग और तुअर जैसी खरीफ फसलों की बुवाई का इंतजार कर रहे हैं। पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण खेतों में नमी नहीं बन पा रही है, जिससे बुवाई का काम प्रभावित हो रहा है। जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो खरीफ सीजन पर इसका असर पड़ सकता है। जानकारी के अनुसार, बुवाई के लिए खेत में पर्याप्त नमी जरूरी है। इसके लिए कम से कम 4 इंच बारिश होना आवश्यक है। इससे पहले बोवाई करने पर बीज खराब होने का खतरा बढ़ जाता है।
कई किसानों पर दोबारा बुवाई का संकट
मानसून समय पर आने की उम्मीद में प्रदेश के कई किसानों ने पहले ही सोयाबीन की बुवाई कर दी थी। लेकिन अब पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण खेतों में नमी कम है और बीज खराब होने की आशंका बढ़ गई है। अगर जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो किसानों को दोबारा बुवाई करनी पड़ सकती है। हालांकि जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है, उन्हें कुछ राहत मिल सकती है।
किन जिलों में सबसे कम बारिश हुई?
इन जिलों में 12.5 मिमी (आधा इंच) से भी कम बारिश दर्ज की गई है-
- अलीराजपुर (0 मिमी)
- बालाघाट
- दमोह
- कटनी
- मैहर
- रीवा
- शहडोल
- टीकमगढ़
- बड़वानी
- भिंड
- दतिया
- धार
- खरगोन
भोपाल में हुई सबसे ज्यादा बारिश
प्रदेश में केवल भोपाल ऐसा जिला है जहां अब तक औसत 91.9 मिमी यानी साढ़े तीन इंच से अधिक बारिश दर्ज की गई है। इसके अलावा आगर-मालवा, बुरहानपुर, देवास, गुना, हरदा, इंदौर, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, विदिशा, डिंडौरी, सतना और सीधी में एक से ढाई इंच तक बारिश हुई है। हालांकि कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह बारिश भी बुवाई के लिए पर्याप्त नहीं मानी जा सकती।
बुधवार को कई जिलों में हुई बारिश
बुधवार को भोपाल, राजगढ़, बैतूल, गुना, इंदौर और छिंदवाड़ा समेत कई जिलों में आंधी और बारिश दर्ज की गई। बारिश के बाद मौसम में ठंडक घुली और कई शहरों के अधिकतम तापमान में गिरावट देखने को मिली। सबसे ज्यादा गिरावट बैतूल में दर्ज हुई, जहां तापमान एक ही दिन में 10 डिग्री सेल्सियस गिरकर 26.5 डिग्री पर पहुंच गया।
बैतूल में एक दिन में 10 डिग्री गिरा तापमान
बारिश और बादलों की वजह से कई शहरों में दिन का तापमान कम हुआ। सबसे बड़ी गिरावट बैतूल में दर्ज की गई, जहां तापमान एक ही दिन में 10 डिग्री घटकर 26.5°C रह गया।
प्रमुख शहरों का अधिकतम तापमान
|
शहर |
अधिकतम तापमान (°C) |
|
बैतूल |
26.5 |
|
भोपाल |
34.8 |
|
छिंदवाड़ा |
35.9 |
|
रायसेन |
36.6 |
|
सागर |
37.0 |
|
इंदौर |
37.2 |
|
नर्मदापुरम |
37.2 |
|
धार |
37.4 |
|
श्योपुर |
37.4 |
|
मंडला |
37.8 |
|
खरगोन |
38.0 |
|
राजगढ़ |
38.0 |
|
रतलाम |
38.2 |
|
नरसिंहपुर |
38.2 |
|
खंडवा |
38.5 |
|
गुना |
38.6 |
|
उज्जैन |
39.0 |
|
दमोह |
39.0 |
|
सतना |
39.0 |
|
जबलपुर |
39.3 |
|
टीकमगढ़ |
39.5 |
|
उमरिया |
39.6 |
|
ग्वालियर |
39.8 |
|
नौगांव |
41.0 |
|
दतिया |
41.2 |
|
खजुराहो |
41.4 |
अगले तीन दिन हीटवेव और बारिश साथ-साथ
मौसम विभाग ने 18 से 21 जून तक प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों के लिए हीटवेव, तेज गर्मी और आंधी-बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है। 18 जून को रतलाम, छिंदवाड़ा और बालाघाट में हीटवेव का अलर्ट है, जबकि 28 जिलों में आंधी और बारिश की संभावना जताई गई है। अगले तीन दिनों में भी कुछ जिलों में लू चलने के साथ कई इलाकों में गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ बारिश होने की संभावना बनी रहेगी।
पिछले वर्षों की तुलना में देर से पहुंचेगा मानसून
मौसम विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार मध्य प्रदेश में मानसून की सामान्य एंट्री 15 जून मानी जाती है। पिछले 10 वर्षों में सबसे जल्दी मानसून वर्ष 2021 में 9 जून को आया था, जबकि सबसे देर से वर्ष 2018 में 25 जून को प्रवेश किया था। पिछले वर्ष 2025 में मानसून 16 जून को प्रदेश पहुंचा था। इस बार 22 से 24 जून के बीच मानसून आने की संभावना जताई जा रही है, जिससे यह सामान्य से करीब एक सप्ताह देर से पहुंचेगा।
पिछले वर्षों में कब आया था मानसून?
|
वर्ष |
मानसून की एंट्री |
|
2021 |
9 जून (सबसे जल्दी) |
|
2025 |
16 जून |
|
2026 |
संभावित 22-24 जून |
|
2018 |
25 जून (सबसे देर से) |
मौसम विभाग की सलाह
किसान पर्याप्त बारिश (कम से कम 4 इंच) होने के बाद ही खरीफ फसलों की बुवाई करें। हीटवेव वाले जिलों में दोपहर के समय धूप से बचें। तेज आंधी और बिजली गिरने की संभावना वाले क्षेत्रों में सुरक्षित स्थान पर रहें।











