मध्यप्रदेश में मौसम ने अचानक ऐसा रुख बदल लिया है, जिसने आम जनजीवन से लेकर किसानों तक की चिंता बढ़ा दी है। तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि के साथ मौसम का ट्रिपल अटैक पूरे प्रदेश में असर दिखा रहा है। आसमान में घने बादल, तेज हवाओं की रफ्तार और कई इलाकों में गिरते ओले इस बात का संकेत हैं कि मौसम फिलहाल शांत होने वाला नहीं है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रदेश के 42 जिलों में अलर्ट जारी किया गया है, जहां 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर रबी फसलों पर पड़ने की आशंका है, क्योंकि इस समय गेहूं और अन्य फसलें कटाई के दौर में हैं। IMD से जुड़े मौसम केंद्रों ने साफ किया है कि यह स्थिति 6 अप्रैल तक बनी रह सकती है, जिसके चलते लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का असर तेजी से फैल रहा है। अलीराजपुर, धार, बड़वानी, खरगोन, खंडवा और बुरहानपुर जैसे जिलों में मौसम ज्यादा खराब रहने की चेतावनी दी गई है। इसके अलावा नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा और सिवनी जैसे इलाकों में भी तेज आंधी और ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है। इन जिलों में अचानक मौसम बिगड़ने से जनजीवन प्रभावित हो सकता है। राजधानी भोपाल समेत इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, सागर और ग्वालियर संभाग के कई जिलों में भी तेज हवाओं के साथ बारिश होने के आसार हैं।
मौसम का असर सिर्फ ग्रामीण इलाकों तक सीमित नहीं है बल्कि बड़े शहरों में भी इसका प्रभाव साफ देखा जा रहा है। भोपाल में गुरुवार शाम तेज आंधी के बाद बारिश शुरू हो गई, जिससे कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। कोलार, रायसेन रोड, होशंगाबाद रोड और पुराने शहर के कई हिस्सों में बिजली गुल हो गई, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। रातभर रुक-रुक कर बारिश का सिलसिला जारी रहा, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई।
मौसम विभाग का अनुमान है कि प्रदेश में यह खराब मौसम 6 अप्रैल तक बना रहेगा। इस दौरान आंधी, बारिश और ओलों का असर अलग-अलग जिलों में देखने को मिलेगा। इसके पीछे साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ लाइन जैसे मौसमीय सिस्टम सक्रिय हैं, जो लगातार वातावरण में बदलाव ला रहे हैं। इतना ही नहीं, 7 अप्रैल से एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है, जिससे 10 अप्रैल तक मौसम में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
इस मौसम बदलाव का सबसे बड़ा असर किसानों पर पड़ सकता है। इस समय रबी की फसलें जैसे गेहूं, चना और सरसों कटाई के लिए तैयार हैं। ऐसे में अगर ओलावृष्टि और तेज हवाएं जारी रहती हैं, तो फसलों को भारी नुकसान हो सकता है। खेतों में खड़ी फसलें गिर सकती हैं और कटाई के बाद रखी उपज भी खराब हो सकती है। किसानों के लिए यह स्थिति काफी चिंताजनक है, क्योंकि एक झटके में उनकी मेहनत पर पानी फिर सकता है।
मौसम में बदलाव के बावजूद गर्मी का असर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। खजुराहो में सबसे ज्यादा 40.4 डिग्री तापमान दर्ज किया गया, जबकि रतलाम, दमोह और नौगांव जैसे इलाकों में भी तापमान 39 डिग्री के आसपास रहा। राजधानी भोपाल में भी पारा 36 डिग्री से ऊपर बना हुआ है। यानी दिन में गर्मी और शाम को बारिश—यह दोहरा असर लोगों को परेशान कर रहा है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार प्रदेश में एक साथ कई सिस्टम सक्रिय हैं। जिसके कारण यह बदलाव देखने को मिल रहा है। साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ लाइन के साथ-साथ उत्तर-पश्चिम भारत में सक्रिय सिस्टम भी इसका कारण हैं। इन सिस्टम की वजह से वातावरण में नमी बढ़ रही है और तेज हवाओं के साथ बारिश और ओलावृष्टि की स्थिति बन रही है। आने वाले दिनों में जैसे ही ये सिस्टम कमजोर होंगे, मौसम साफ होने लगेगा और तापमान में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।
मौसम विभाग का कहना है कि जैसे ही वर्तमान सिस्टम खत्म होंगे, प्रदेश में गर्मी का असर तेजी से बढ़ेगा। अप्रैल के दूसरे सप्ताह से ही लू चलने की स्थिति बन सकती है। ग्वालियर, धार, खरगोन और बड़वानी जैसे जिलों में तापमान 44 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। यानी फिलहाल बारिश और ठंडक का जो दौर चल रहा है, वह ज्यादा समय तक नहीं टिकेगा और जल्द ही तेज गर्मी दस्तक देगी।