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ऐसा नहीं है कि सरकार सवालों का जवाब नहीं देना चाहती, विधायक ही स्टडी के साथ नहीं आते : मप्र विधानसभा अध्यक्ष

पीपुल्स समाचार के गेस्ट इन द न्यूज रूम कार्यक्रम में स्पीकर गिरीश गौतम ने की शिरकत : देखें Video
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ऐसा नहीं है कि सरकार सवालों का जवाब नहीं देना चाहती, विधायक ही स्टडी के साथ नहीं आते : मप्र विधानसभा अध्यक्ष
भोपाल। मध्यप्रदेश के विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम ने कहा कि विधायकों की अध्ययन की प्रवृत्ति लगातार कम हो रही है। ऐसा नहीं है कि सरकार सवालों के जवाब नहीं देना चाहती है, लेकिन विधायक ही सदन में स्टडी के साथ नहीं आते है। इनकी अध्ययन की प्रवृत्ति कम हो रही है। इसमें मीडिया का बड़ा रोल है। मीडिया उन्हीं विधायकों को ज्यादा जगह देता है, जो हल्ला ज्यादा मचाते हैं। विधानसभा अध्यक्ष पीपुल्स समाचार के 'गेस्ट इन द न्यूज रूम' कार्यक्रम में विपक्ष के विधायकों के सवालों के मुद्दे पर बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जनता की बात को सरकार तक पहुंचाने के लिए विधानसभा की प्रक्रिया साल में 70 दिन तक चलनी चाहिए। उन्होंने विधानसभा की व्यवस्था और सदन की कार्यवाही के अलावा भी कई मुद्दों पर बात की। पेश हैं मुख्य अंश...  https://www.youtube.com/watch?v=MITnw7SK96c सवाल : विधानसभा सदन की कार्रवाई कितने दिन तक चलनी चाहिए? जवाब : मैंने दो प्रस्ताव दिए हैं। इसके तहत विधानसभाओं को ऑटोनॉमस अधिकार मिले। दूसरा अभी विधानसभा कानूनी तौर पर छह महीने में एक बार होती है। यह तीन महीने में हो। सामान्य तौर पर बड़ी विधानसभा 70 से 75 दिन और छोटी विधानसभा की कार्यवाही 40 दिन चलनी चाहिए। सवाल : कुछ समय से सदन में हंगामा ज्यादा होता है, इसकी वजह? जवाब : विधायकों का जो स्तर गिरता जा रहा है उसकी वजह यह है कि उनकी अध्ययन की प्रवृत्ति में कहीं न कहीं गिरावट आई है। इसमें बड़ा रोल हमारे मीडिया का भी है। मीडिया उसी विधायक को ज्यादा जगह देता है, जो हो-हल्ला ज्यादा मचाते हैं। इन विधायकों को लगता है कि बुद्धिमत्ता पूर्वक पूछे गए सवाल के एवज में यदि अपशब्द कहने में ज्यादा छपने को मिलेगा तो वह अपशब्द को ज्यादा प्रिफर करेंगे। सवाल : विपक्ष के विधायक आरोप लगाते हैं कि सरकार उनके प्रश्नों का जवाब नहीं देती। कई बार जवाब में कहा जाता है कि जानकारी एकत्रित की जा रही है? जवाब : ऐसा नहीं है कि सरकार सवालों का जवाब नहीं देती है। विधायकों को प्रक्रिया के तहत सभी सवालों उत्तर मिल सकते हैं, मगर उनका अध्ययन ही नहीं है। कई विधायकों को प्रक्रिया की जानकारी ही नहीं है। यदि विधायक को लगता है कि सवाल की जानकारी भ्रम पैदा कर रही है तो वे भ्रामक स्थिति में जा सकते हैं। इसके लिए वे प्रश्न-संदर्भ समिति में जा सकते हैं। वहां से नोटिस होगी और अधिकारी को बाध्य होकर उसका जवाब देना पड़ेगा। विधायक बैक कमेटी में नहीं जाना चाहते हैं, वो मंच पर अधिक रहना चाहते हैं। सवाल : विधायकों ने विधानसभा कार्रवाई के कई शब्दों को विलोपित करने को लेकर सवाल उठाए हैं? जवाब  : मैंने 1954 से लेकर अभी तक के विलोपित किए गए शब्दों की सूची तैयार की है। इन्हें प्रकाशित किया है। लेकिन ऐसा नहीं कहा कि विधायक इन शब्दों का प्रयोग नहीं कर सकते हैं। इन शब्दों के प्रयोग के संबंध में विधायकों पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है। चूंकि विधायक अध्ययन ही नहीं कर रहे, इसलिए उन्हें नहीं मालूम कि इन शब्दों पर कोई रोक नहीं लगाई गई है। शब्द कार्यवाही से विलोपित किए गए हैं। अब विधायक की मर्जी कि वह इन शब्दों का सदन में उपयोग करे या न करे। सवाल : विधानसभा और विधायकों को डिजिटलाइज करने के लिए क्या प्रयास किए गए? जवाब : विधानसभा की कार्रवाई को पूरी तरह से डिजिटाइज किया जा रहा है। इस बार पेपर लेस बजट रखा जाएगा। विधायकों टैबलेट पर बजट दिया जा रहा है। उन्हें इसकी ट्रेनिंग दी जाएगी। विधानसभा को लोकसभा और सभी प्रदेश के विधानसभा से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, इसमें बजट की कमी आड़े आ रही है। इसमें 135 करोड़ रुपए चाहिए। हमने तत्काल 35 करोड़ रुपए मांगें हैं, ताकि हम हार्डवेयर लगाकर उसे चालू कर दें।  रहे हैं, जबकि सरकार से 75 करोड़ मिले हैं। सवाल : पहले आप लेफ्ट के साथ थे, आखिर क्यों वामपंथी पार्टी का बेस खत्म हो रहा है ? जवाब : भारत के परिप्रेक्ष्य में वमपंथी थ्योरी कमजोर है। लोगों को सिर्फ रोटी, कपड़ा, मकान नहीं चाहिए। यह तो जेल में भी मिल जाता है, लेकिन जेल कोई नहीं जाना चाहता। उन्हें और भी बहुत कुछ चाहिए। वो क्लासलेस सोसायटी नहीं, क्लास डिवीजन की बात करते हैं। धर्म एक अफीम है... उनकी यह विचारधारा भी गलत है। धर्म के साथ इसके मर्म को भी समझना जरूरी है। कैसे प्रयागराज के महाकुंभ में पांच करोड़ लोग पहुंच जाते हैं। क्या उन्हें कोई न्योता देता है? मैं जब लेफ्ट में था तब भी इस तरह के कई सुझाव दिए थे। मेरे सुझाव पर अब  उनकी सेंट्रल कमेटी क्लास लेस सोसायटी पर विचार कर रही है। सवाल : सिंगरौली में आम आदमी पार्टी की महापौर जीतीं। क्या आगामी विधानसभा चुनाव में क्या प्रभाव पड़ेगा? जवाब : सिंगरौल में 'आप' का जीतना एक्सिडेंटल है।

कांग्रेस के जयवर्धन और फुंदेलाल मार्को की तारीफ

विपक्ष के दो सबसे शालीन और अनुशासित विधायक किसे मानते हैं, इस सवाल पर विधानसभा अध्यक्ष गौतम ने कहा- दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धन सिंह और फुंदेलाल मार्को सबसे बेहतर हैं। वे सदन की मर्यादाओं का ध्यान रखते हुए बोलते हैं और सदन की कार्रवाई में हिस्सा लेते हैं। इनके सवाल भी नपे-तुले और पूरी स्टडी के साथ होते हैं। उन्होंने भाजपा के यशपाल सिंह सिसोदिया और दिव्यराज सिंह को भी इसी श्रेणी में रखा।

फेसबुक नहीं, फेस टु फेस पर भरोसा

जहां आज पूरी दुनिया सोशल मीडिया के पीछे भाग रही है। वहीं विधानसभा अध्यक्ष गौतम इससे दूर हैं। क्या वह फेसबुक रील्स, इंस्टाग्राम वीडियोज देखते हैं... इस सवाल के जवाब में विधानसभा अध्यक्ष ने कहा- मोबाइल फोन इंटिमेशन दे सकता है, इंटीमेसी नहीं। यानी इससे भावनात्मक जुड़ाव नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि फेसबुक नहीं हम फेस टू फेस पर विश्वास रखते हैं।

नेता पुत्रों को नजरंदाज नहीं कर सकते

विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम का कहना है कि पार्टी को टिकट वितरण में कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देना चाहिए। नेतापुत्रों को टिकट के सवाल पर कहा कि सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में काम करने वाले नेतापुत्रों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पार्टी में कोई एक जैसी थ्योरी नहीं हो सकती है। यह भी पढ़ें : भूकंप लोगों को नहीं मारता, हमारी मूर्खता के चलते होती है तबाही: वरिष्ठ भू वैज्ञानिक रामकुमार चतुर्वेदी  
Vikas Shukla
By Vikas Shukla
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