रात्रि चौपाल से गांवों तक पहुंचा प्रशासन:प्रदेश के 39 कलेक्टरों ने किया रात्रि विश्राम, लोगों की सुनी समस्याएं

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संभागों के प्रभारी एसीएस और एडीजी की बैठक बुलाई थी। बैठक में निर्देश दिए गए थे कि सभी अधिकारी-कर्मचारी अपने मुख्यालय के साथ फील्ड में भी पर्याप्त समय दें। रात्रि विश्राम कर जनता की समस्याएं समझते हुए निराकरण की प्रभावी कार्रवाई करें और निर्धारित शेड्यूल का पालन सुनिश्चित करें।
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प्रदेश के 39 कलेक्टरों ने किया रात्रि विश्राम, लोगों की सुनी समस्याएं

पुष्पेन्द्र सिंह, भोपाल। इन निर्देशों का असर प्रदेशभर में देखने को मिला। ढाई साल में प्रदेश के 39 जिलों के कलेक्टरों ने रात्रि चौपाल और रात्रि विश्राम करते हुए जन समस्याएं सुनीं और ज्यादातर मामलों का निराकरण किया। हालांकि अभी 16 जिलों के कलेक्टरों ने रात्रि विश्राम नहीं किया है। वहीं जिलों और संभाग के प्रभारी अपर मुख्य सचिवों ने भी रात्रि विश्राम से दूरी बना रखी है।

डिंडौरी से शुरू हुआ था रात्रि विश्राम का सिलसिला

रात्रि विश्राम और रात्रि चौपाल लगाने का सिलसिला डिंडौरी से 17 दिसंबर 2025 से शुरू हुआ। कलेक्टर अंजू सिंह भदौरिया ने ग्राम मुकद्दम टोला, कारीगढ़हरी और ग्राम चन्द्रागढ़ में रात्रि चौपाल लगाई। बैगा बहुल ग्राम पंचायत खजरी माल के ग्राम चंद्रागढ़ के लोग 70 साल से पानी की समस्या से जूझ रहे थे। कलेक्टर ने नलजल योजना के अंतर्गत मात्र 40 दिनों के भीतर घर-घर नल कनेक्शन लगाकर पेयजल उपलब्ध करा दिया। इस पहल के बाद ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति भरोसा बढ़ा और लोगों ने खुलकर अपनी समस्याएं प्रशासन के सामने रखीं।

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गांवों में सामने आईं बुनियादी समस्याएं

रात्रि चौपालों के दौरान गांवों में बिजली, पानी, सड़क, रोजगार, वृद्धावस्था पेंशन, पीएम आवास, जनमन आवास, दिव्यांग प्रमाण पत्र, खेत तालाब, मेढ़ बंधान, नाली, नहर और आम रास्तों जैसी समस्याएं सामने आईं। आयुष्मान कार्ड, आधार कार्ड और समग्र आईडी नहीं बनने के मामले भी अधिकारियों के सामने पहुंचे। ग्रामीणों ने अपनी समस्याओं को सीधे प्रशासन के सामने रखा। अधिकारियों ने मौके पर ही कई समस्याओं का निराकरण किया, जबकि बाकी मामलों के लिए संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए। इससे ग्रामीणों को त्वरित राहत मिलने लगी।

जिलों में लगातार हो रही रात्रि चौपाल

ढाई साल के इस रात्रि विश्राम के सफर में विदिशा, आगर मालवा, मंदसौर, नीमच, इंदौर, झाबुआ, आलीराजपुर, खंडवा, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, सिंगरौली, दमोह, पन्ना, रायसेन, राजगढ़, जबलपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, बालाघाट और निवाड़ी जिलों के कलेक्टरों ने एक से तीन गांव पूरे कर लिए हैं। वहीं बड़वानी की कलेक्टर जयति सिंह ने अपनी पदस्थापना के बाद से 11 रात्रि चौपाल की हैं। बैतूल के कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे ने 6 गांवों में रात्रि विश्राम कर 88 गांवों को कवर किया है। दतिया कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े ने भी दो दर्जन से अधिक गांवों के लोगों की समस्याएं सुनी हैं।

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कई जिलों में अब तक नहीं हुआ रात्रि विश्राम

जानकारी के अनुसार सीहोर, हरदा, शाजापुर, बुरहानपुर, मुरैना, श्योपुर, भिंड, सतना, मैहर, सागर, टीकमगढ़, शहडोल, अनूपपुर, कटनी, सिवनी, पांढुर्णा और उमरिया के कलेक्टरों द्वारा 28 मई तक रात्रि विश्राम के कार्यक्रम नहीं हो सके। दूसरी ओर रात्रि चौपालों के जरिए ग्रामीणों से सीधा संवाद स्थापित किया जा रहा है। ग्रामीण विकास से संबंधित योजनाओं की जानकारी देते हुए अधिकारियों ने समस्याओं को गंभीरता से सुना और त्वरित निराकरण का प्रयास किया। रात्रिकालीन समय में अधिकारियों को अपने बीच पाकर ग्रामीणों में विशेष उत्साह और विश्वास देखने को मिला। कलेक्टर अंजू सिंह भदौरिया ने कहा कि रात्रि चौपालों के माध्यम से प्रशासन और ग्रामीणों के बीच सीधा संवाद मजबूत हुआ है।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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