MP Police Promotion:15 हजार पुलिसकर्मियों पर डिमोशन का खतरा, कार्यवाहक प्रभार वापस लेकर मूल पद पर भेजे जाएंगे

मध्यप्रदेश पुलिस विभाग में पिछले कई वर्षों से कार्यवाहक पदोन्नति के आधार पर उच्च पदों पर कार्यरत करीब 15 हजार पुलिस अधिकारी और कर्मचारियों पर अब डिमोशन का खतरा मंडरा रहा है। राज्य सरकार द्वारा मध्यप्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 लागू किए जाने के बाद पुलिस मुख्यालय ने नियमित विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत पात्रता पूरी नहीं करने वाले कर्मचारियों से कार्यवाहक प्रभार वापस लेकर उन्हें उनके मूल पद पर भेजा जाएगा।
2021 से कार्यवाहक पदोन्नति पर चल रही थी व्यवस्था
प्रदेश में वर्ष 2016 से नियमित पदोन्नतियां लंबे समय तक रुकी रहीं। इसके चलते वर्ष 2021 से बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को कार्यवाहक पदोन्नति देकर उच्च पदों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इन कर्मचारियों ने वर्षों तक उच्च पदों पर काम किया लेकिन अब नए पदोन्नति नियम लागू होने के बाद उनके मामलों की दोबारा समीक्षा की जा रही है। इसी वजह से पुलिस विभाग में चिंता और असमंजस का माहौल बना हुआ है।
पांढुर्णा में शुरू हुई पहली बड़ी कार्रवाई
कार्यवाहक पदोन्नति वापस लेने की पहली बड़ी कार्रवाई पांढुर्णा जिले में सामने आई है। यहां पुलिस अधीक्षक ने कार्यवाहक प्रधान आरक्षक (हेड कांस्टेबल) के रूप में कार्य कर रहे 32 पुलिसकर्मियों का कार्यवाहक प्रभार समाप्त कर उन्हें दोबारा आरक्षक के पद पर पदस्थ करने के आदेश जारी किए हैं। अब ये सभी कर्मचारी अपने मूल पद पर ही सेवाएं देंगे। विभाग के अनुसार यह कार्रवाई मध्यप्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 और पुलिस मुख्यालय के निर्देशों के तहत की गई है।
5 साल का सेवा रिकॉर्ड होगा प्रमोशन का आधार
सूत्रों के मुताबिक नियमित DPC से पहले सभी अधिकारी और कर्मचारियों के पिछले पांच वर्षों के सेवा रिकॉर्ड की विस्तृत जांच की जा रही है। इस दौरान निम्न बिंदुओं का मूल्यांकन किया जाएगा-
- वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन (ACR/SIR)
- विभागीय दंड
- निलंबन की स्थिति
- अनुशासनात्मक कार्रवाई
- न्यायालयों में लंबित मामले
- सेवा रिकॉर्ड का समग्र मूल्यांकन
इन मानकों के आधार पर ही नियमित पदोन्नति का फैसला लिया जाएगा।
पात्र नहीं होने पर खत्म होगा कार्यवाहक प्रभार
PHQ का स्पष्ट कहना है कि जिन अधिकारी-कर्मचारियों का रिकॉर्ड निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरेगा, उन्हें नियमित पदोन्नति नहीं दी जाएगी। साथ ही उनका कार्यवाहक प्रभार भी वापस ले लिया जाएगा और उन्हें उनके मूल पद पर भेज दिया जाएगा।
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15 हजार तक पहुंच सकती है संख्या
पुलिस मुख्यालय के सूत्रों के अनुसार शुरुआती समीक्षा में करीब 1,000 अधिकारी और कर्मचारी ऐसे मिले हैं जिन पर इस प्रक्रिया का सीधा असर पड़ सकता है। आने वाले चार से पांच दिनों में प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसी तरह की कार्रवाई शुरू होने की संभावना है। विभागीय आकलन के अनुसार यह संख्या आगे चलकर करीब 15 हजार तक पहुंच सकती है।
पुलिसकर्मियों में बढ़ी चिंता
वर्षों से कार्यवाहक पदोन्नति के आधार पर उच्च पदों पर कार्यरत कई पुलिसकर्मियों का कहना है कि यदि उन्हें मूल पद पर लौटाया गया तो इससे उनके मनोबल और कार्यक्षमता पर असर पड़ेगा। हालांकि विभाग का कहना है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और नियमों के अनुसार होगी। केवल वही अधिकारी और कर्मचारी नियमित पदोन्नति के पात्र होंगे जो निर्धारित सेवा मानकों और पात्रता शर्तों को पूरा करेंगे।
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नए नियमों से पुलिस महकमे में बड़ा बदलाव
मध्यप्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 लागू होने के बाद पुलिस विभाग में लंबे समय से लंबित नियमित पदोन्नतियों का रास्ता साफ हुआ है। हालांकि इसके साथ ही कार्यवाहक पदोन्नति पर वर्षों से काम कर रहे हजारों पुलिसकर्मियों के सामने पदावनति का संकट भी खड़ा हो गया है। आने वाले दिनों में DPC की प्रक्रिया पूरी होने के बाद विभाग में बड़े प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।












