स्वतंत्रता दिवस पर भोपाल जेल से 15 बंदियों की रिहाई, एक महिला भी शामिल

भोपाल। देशभर में 80वें स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाया गया। इस खास दिन भोपाल सेंट्रल जेल में भी एक अलग तस्वीर देखने को मिली। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जेल से 15 बंदियों को रिहा किया गया। इनमें एक महिला बंदी भी शामिल है। इन सभी बंदियों को जेल रिहाई नीति 2025 के तहत सजा में माफी का लाभ मिला, जिसके बाद उन्हें जेल से रिहा किया गया।
15 बंदियों के लिए बना आजादी का दिन
भोपाल सेंट्रल जेल में सजा काट रहे इन बंदियों के लिए 15 अगस्त का दिन बेहद खास रहा। जहां पूरा देश स्वतंत्रता दिवस मना रहा था, वहीं इन 15 बंदियों के लिए भी यह दिन एक नई शुरुआत लेकर आया। जेल से बाहर निकलने के बाद बंदियों ने अपने परिवार और समाज के बीच बेहतर जीवन जीने की इच्छा जताई। रिहा किए गए बंदियों में ऐसे बंदी भी शामिल हैं, जो आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे। सजा में माफी मिलने के बाद उन्हें जेल से बाहर आने का मौका मिला।
जेल अधीक्षक ने दी बेहतर जीवन की सीख
रिहाई के दौरान भोपाल सेंट्रल जेल के अधीक्षक महेंद्र सिंह परमार ने सभी रिहा हुए बंदियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जुड़कर बेहतर जीवन जीने के लिए प्रेरित किया। जेल अधीक्षक ने कहा कि जेल से बाहर आने के बाद सभी बंदियों को अपने जीवन की नई शुरुआत करनी चाहिए और समाज के लिए अच्छा काम करना चाहिए। उन्होंने उन्हें दोबारा किसी भी तरह के अपराध से दूर रहने और जिम्मेदार नागरिक के रूप में जीवन जीने के लिए प्रेरित किया।
अब नई जिंदगी शुरू करेंगे
रिहा बंदियों ने कहा- अब नई जिंदगी शुरू करेंगे जेल से रिहा हुए बंदियों ने भी अपनी खुशी जाहिर की। कमलेश बंसी ने कहा कि जेल में रहते हुए उन्होंने अच्छा व्यवहार किया और अब वह बाहर आकर नई जिंदगी शुरू करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि आगे वह समाज में बेहतर तरीके से जीवन जीने की कोशिश करेंगे। वहीं रामू ने बताया कि वह एक युवक की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे। अब रिहाई के बाद वह समाज में बेहतर जीवन जीना चाहते हैं। उन्होंने लोगों से भी अपराध से दूर रहने की अपील की।
सजा माफी के बाद मिली रिहाई
भोपाल सेंट्रल जेल से रिहा किए गए इन 15 बंदियों को राज्य शासन की ओर से सजा माफी का लाभ मिला है। जेल प्रशासन के मुताबिक, इनकी रिहाई जेल रिहाई नीति 2025 के तहत की गई है। स्वतंत्रता दिवस पर हुई यह रिहाई इन बंदियों के लिए सिर्फ जेल से बाहर आने का मौका नहीं, बल्कि अपने जीवन को नए तरीके से शुरू करने की उम्मीद भी है। अब इनसे उम्मीद है कि वे समाज की मुख्यधारा से जुड़कर जिम्मेदारी के साथ अपना जीवन आगे बढ़ाएंगे।












