डामर-तेल महंगे: MP के ₹17 हजार करोड़ के हाईवे प्रोजेक्ट्स की रफ्तार धीमी, NHAI करेगा भरपाई

पुष्पेन्द्र सिंह, भोपाल। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और निर्माण सामग्री की कीमतों में तेज बढ़ोतरी का असर अब मध्यप्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर साफ दिखने लगा है। प्रदेश में करीब ₹17 हजार करोड़ की लागत से चल रहे हाईवे प्रोजेक्ट्स की रफ्तार मार्च 2026 से धीमी पड़ गई है। बड़ी निर्माण कंपनियां बढ़े हुए रेट्स के एडजस्टमेंट का इंतजार कर रही हैं जबकि केंद्र सरकार ने भरोसा दिया है कि बढ़ी लागत की भरपाई की जाएगी।
33 परियोजनाएं प्रभावित, 25% तक काम की गति घटी
जानकारी के मुताबिक प्रदेश में कुल 33 हाईवे परियोजनाएं प्रगति पर हैं जिनकी कुल लंबाई 1,085 किमी और लागत ₹17,762 करोड़ है। इनमें जबलपुर आउटर रिंग रोड और इंदौर-हरदा (पैकेज-1) जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। कच्चे तेल और बिटुमन (डामर) की कीमतों में उछाल के चलते इन प्रोजेक्ट्स की गति पर करीब 25% तक असर पड़ा है। कंपनियों को न तो पेट्रोल पंप से बल्क में ईधन मिल पा रहा है और न ही समय पर डामर की आपूर्ति हो रही है जिससे निर्माण कार्य बाधित हो रहा है।
डामर के दाम 2 महीने में 68% तक बढ़े
- निर्माण कार्य पर सबसे बड़ा असर डामर की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी से पड़ा है। अनुमान के अनुसार
- फरवरी 2026 में VG-40 बिटुमन का रेट ₹48,892 प्रति मीट्रिक टन था
- अप्रैल 2026 में यही रेट बढ़कर ₹82,122 प्रति मीट्रिक टन हुआ
- जिससे ₹33,122 प्रति मीट्रिक टन का अंतर आया।
यानी सिर्फ दो महीनों में डामर की कीमतों में करीब 68% तक उछाल आया है। इसके अलावा विस्फोटक सामग्री (ब्लास्टिंग के लिए) की कीमत भी ₹1,500 प्रति पेटी से बढ़कर ₹2,700 प्रति पेटी हो गई है।
क्यों प्रभावित हो रहे प्रोजेक्ट्स
हाईवे निर्माण में सुस्ती के पीछे कई कारण सामने आए हैं:
- कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पाद महंगे होना
- बिटुमन (डामर) की कीमतों में तेज उछाल
- अन्य निर्माण सामग्री की लागत बढ़ना
- ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स खर्च बढ़ना
इन सभी वजहों ने मिलकर निर्माण लागत को काफी बढ़ा दिया है जिससे कंपनियां फिलहाल काम की गति धीमी रख रही हैं।
ये बड़े प्रोजेक्ट्स हो रहे प्रभावित
प्रदेश में जिन प्रमुख हाईवे प्रोजेक्ट्स की रफ्तार प्रभावित हुई है उनमें शामिल हैं:
- इंदौर वेस्टर्न बाईपास
- NH-753L पर बोरगांव बुजुर्ग से शाहपुर फोर लेन
- इंदौर-एदलाबाद पैकेज-2 (तेजाजीनगर से बलवाड़ा)
- NH-34 और 35 पर MP/UP बॉर्डर से कबरई सेक्शन
- भोपाल आयोध्या बाईपास सिक्स लेनिंग
- विदिशा से हिनोतिया और विदिशा से मोरीकोरी फोर लेन
- NH-146B पर संदलपुर से नसरुल्लागंज
- ग्वालियर वेस्टर्न बाईपास
- NH-146 पर ग्यारसपुर से राहतगढ़
- जबलपुर आउटर रिंग रोड
- इंदौर-हरदा पैकेज-1 (इंदौर से राघौगढ़)
- विदिशा से ग्यारसपुर सेक्शन फोर लेन
- सागर-मोहारी-सटई घाट से MP/UP बॉर्डर कबरई सेक्शन
केंद्र सरकार देगी राहत, रेट होंगे रिवाइज
बड़ी कंपनियों ने काम इसलिए भी धीमा किया है क्योंकि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने अप्रैल 2026 में एक पत्र जारी कर आश्वासन दिया था कि वैश्विक परिस्थितियों के कारण बढ़ी लागत की क्षतिपूर्ति की जाएगी। यह राहत 1 अप्रैल से 30 जून तक की अवधि के लिए या फिर ग्लोबल आर्थिक स्थिति के आधार पर लागू की जा सकती है।
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NHAI का बयान
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के क्षेत्रीय अधिकारी एसके सिंह ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल, बिटुमन और अन्य निर्माण सामग्री के रेट बढ़ने से प्रोजेक्ट्स की गति प्रभावित हुई है। कंपनियों को काम तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। केंद्र सरकार बढ़े हुए दामों का समायोजन करेगी और इसके लिए आवश्यक निर्देश भी जारी हो चुके हैं।”












