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MP High Court : सालाना 14 लाख कमा रही पत्नी भरण पोषण की हकदार नहीं’, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

मप्र हाईकोर्ट ने कहा है कि सालाना 14 लाख रुपए कमा रही पत्नी भरण पोषण की हकदार नहीं है। एक महिला की याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि-‘यह सिर्फ पति से मांस का टुकड़ा नोंचने का प्रयास है।’
सालाना 14 लाख कमा रही पत्नी भरण पोषण की हकदार नहीं’, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अंतरिम भरण-पोषण पाने के संबंध में एक महिला द्वारा दायर मामले को खारिज कर दिया है। जस्टिस विवेक जैन की अदालत ने भोपाल की फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि सालाना 14 लाख रुपए कमाने वाली पत्नी भरण पोषण पाने की हकदार नहीं है। बेंच ने कहा कि यह याचिका कुछ और नहीं, बल्कि पति से मांस का टुकड़ा नोंचने का एक प्रयास मात्र है, जिसकी अनुमति नहीं दी जा सकती।

देवास की महिला ने लगाई थी याचिका

मामला हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 के तहत अंतरिम भरण-पोषण और मुकदमे के खर्च से जुड़ा है, जो देवास में रहने वाली नेहा ने भोपाल में रह रहे पति राहुल के खिलाफ  दाखिल किया था। दोनों की शादी 4 नवंबर 2022 को हुई थी और वे जून 2023 से अलग रह रहे हैं। भोपाल की फैमिली कोर्ट से 18 फरवरी 2026 को भरण पोषण की राहत न मिलने पर यह मामला हाईकोर्ट में दाखिल किया गया था। इस मामले में पत्नी ने खुद स्वीकार किया था कि उसकी वार्षिक आय 20 लाख है। वहीं, उसने पति की आय 30 लाख होने का दावा किया था, जिसे पति ने नकार दिया। बाद में पत्नी अपनी बात से मुकर गई और दावा किया कि उसकी सैलरी घटकर 14.81 लाख सालाना हो गई है। इस पर कोर्ट ने कहा कि अगर इसे मान भी लिया जाए, तो भी उसकी मासिक आय 1.25 लाख होती है।

नहीं मानी गई पत्नी की दलील 

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पत्नी की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट के एक फैसले का हवाला दिया, जहां 1.25 लाख प्रति माह कमाने वाली पत्नी को भी 1.50 लाख का अंतरिम भरण-पोषण मंजूर किया गया था। हाई कोर्ट ने इस दलील को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट वाले मामले में पति और पत्नी की आर्थिक स्थिति में भारी अंतर था। वहां पति की सालाना कमाई 1.35 करोड़ थी और पत्नी के ऊपर बच्चे के भरण-पोषण की भी जिम्मेदारी थी। जबकि वर्तमान मामले में कोई बच्चा नहीं है और दोनों की आय एक-दूसरे के बराबर है।

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ओबीसी आरक्षण : 15 जुलाई से हर रोज होगी सुनवाई 

प्रदेश में ओबीसी के आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट में दाखिल हुईं 91 याचिकाओं पर अब 15 जुलाई से हर रोज ढाई बजे से सुनवाई होगी। बुधवार को जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की डिवीजन बेंच ने सुनवाई की यह नई टाइमलाइन दाखिल की है। अशिता दुबे व अन्य की ओर से दायर कई मामलों में प्रदेश की कमलनाथ सरकार द्वारा ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षण बढ़ाकर 27 प्रतिशत किए जाने को चुनौती दी गई थी। वहीं कई याचिकाओं में आरक्षण का प्रतिशत 14 से बढ़ाकर 27 फीसदी किए जाने का समर्थन किया गया है। 

पक्ष विपक्ष में 91 मामले

हाईकोर्ट में ओबीसी आरक्षण का प्रतिशत बढ़ाने के पक्ष और विपक्ष में ये 91 मामले दाखिल हुए हैं। ध्यान रहे कि तत्कालीन सरकार ने 8 जुलाई 2019 को आरक्षण का प्रतिशत बढ़ाने के संबंध में विधानसभा से बिल पारित किया और फिर उसका गजट नोटिफिकेशन 17 जुलाई 2019 को प्रकाशित किया था। आरक्षण का प्रतिशत बढ़ाए जाने को कई मामलों में असंवैधानिक और सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए दिशानिदेर्शों के खिलाफ बताया गया है। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान 27 प्रतिशत आरक्षण का विरोध कर रही याचिकाकर्ता आशिता दुबे व अन्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी, बढ़े आरक्षण का समर्थन कर रहे यूथ फॉर एक्वालिटी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर पी सिंह और राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता हरप्रीत सिंह रूपराह हाजिर हुए।

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Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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