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प्लेन विन्डो के ऊपर बने ब्लैक ट्राएंगल का क्या है राज ?फ्लाइट में बैठे कई यात्री नहीं जानते इसका असली काम

फ्लाइट की खिड़की के ऊपर बने छोटे काले ट्रायंगल स्टिकर का क्या मतलब होता है? यह सिर्फ निशान नहीं बल्कि इमरजेंसी में पायलट और केबिन क्रू के लिए बेहद जरूरी संकेत होता है। जानिए एयरक्राफ्ट में इसका असली इस्तेमाल और यात्रियों को इससे क्या फायदा मिलता है।
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फ्लाइट में बैठे कई यात्री नहीं जानते इसका असली काम
फ्लाइट की खिड़की के ऊपर बने छोटे काले ट्रायंगल स्टिकर

अगर आपने कभी हवाई यात्रा की है तो शायद विमान की खिड़कियों के ऊपर बने छोटे काले रंग के त्रिकोण यानी ब्लैक ट्रायंगल स्टिकर पर आपकी नजर जरूर गई होगी। ज्यादातर लोग इसे साधारण डिजाइन या सीट मार्किंग समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन असल में यह छोटा सा निशान विमान के अंदर बेहद जरूरी भूमिका निभाता है। हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म क्वोरा पर एक यात्री ने यही सवाल पूछा कि आखिर विमान में कुछ खास सीटों के ऊपर ही यह ब्लैक ट्रायंगल क्यों बना होता है। खास बात यह थी कि यह निशान हर सीट पर नहीं बल्कि सिर्फ उन सीटों के ऊपर दिखाई देता है जो विमान के पंख यानी विंग्स के पास होती हैं। इसके बाद लोगों ने जो जवाब दिए, वे इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो गए।

'विलियम शैटनर सीट' से जुड़ा है यह निशान

क्वोरा पर एक यूजर ने बताया कि इस ब्लैक ट्रायंगल को "विलियम शैटनर सीट" से भी जोड़ा जाता है। इसका मतलब उस सीट से है जहां बैठकर विमान के पंख सबसे साफ दिखाई देते हैं। दरअसल, यह निशान यात्रियों से ज्यादा फ्लाइट क्रू और पायलट्स के काम आता है। विमान के अंदर किसी भी तरह की तकनीकी दिक्कत या खराब मौसम की स्थिति में केबिन क्रू इसी निशान की मदद से सही खिड़की तक पहुंचता है और बाहर पंखों की स्थिति जांचता है।

इमरजेंसी में क्यों जरूरी होता है यह ट्रायंगल स्टिकर?

एविएशन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, विमान उड़ान के दौरान कई तरह की परिस्थितियों से गुजरता है। ऊंचाई पर तापमान बहुत कम हो जाता है, जिससे पंखों पर बर्फ जमने का खतरा रहता है। इसके अलावा फ्लैप्स और स्लैट्स जैसे हिस्सों में तकनीकी समस्या भी आ सकती है। ऐसे में फ्लाइट अटेंडेंट्स को तुरंत बाहर देखकर यह जांचना होता है कि विंग्स सामान्य स्थिति में हैं या नहीं। ब्लैक ट्रायंगल इसी काम को आसान बनाता है। यह निशान उस खिड़की के ऊपर लगाया जाता है जहां से विमान के पंख सबसे अच्छे तरीके से दिखाई देते हैं। अगर उड़ान के दौरान पायलट को किसी समस्या की आशंका होती है, तो वह केबिन क्रू को इन सीटों तक जाकर विजुअल इंस्पेक्शन करने के लिए कह सकता है।

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हर विमान में होते हैं चार ब्लैक ट्रायंगल

जानकारी के अनुसार, ज्यादातर विमानों में कुल चार ब्लैक ट्रायंगल स्टिकर लगाए जाते हैं। दो आगे की तरफ और दो पीछे की ओर। इनकी मदद से क्रू अलग-अलग एंगल से विमान के विंग्स और इंजन की स्थिति देख सकता है। आगे वाले ट्रायंगल से पंखों के फ्रंट हिस्से, स्लैट्स और इंजन को देखा जाता है, जबकि पीछे वाले ट्रायंगल से फ्लैप्स की जांच की जाती है। इससे किसी भी खराबी का जल्दी पता लगाया जा सकता है। यही वजह है कि इमरजेंसी की स्थिति में क्रू को सही खिड़की खोजने में समय बर्बाद नहीं करना पड़ता।

क्या यात्री भी उठा सकते हैं इसका फायदा?

यह ब्लैक ट्रायंगल सिर्फ एयरलाइन स्टाफ के लिए ही नहीं बल्कि यात्रियों के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। कई लोग फ्लाइट में बैठते ही चक्कर या उल्टी जैसा महसूस करते हैं। ऐसे यात्रियों को आमतौर पर विंग्स के पास वाली सीट लेने की सलाह दी जाती है। दरअसल, विमान का मध्य हिस्सा सबसे ज्यादा स्थिर माना जाता है। यहां झटके कम महसूस होते हैं क्योंकि विंग्स विमान का बैलेंस बनाए रखते हैं। यही कारण है कि ब्लैक ट्रायंगल के आसपास वाली सीटें अपेक्षाकृत आरामदायक मानी जाती हैं। जो लोग पहली बार हवाई यात्रा कर रहे होते हैं या जिन्हें एयर सिकनेस की समस्या रहती है, उनके लिए यह सीटें बेहतर विकल्प हो सकती हैं।

आसानी से हट सकता है स्टिकर, फिर भी रहता है सुरक्षित

सोशल मीडिया पर कई लोगों ने यह भी कहा कि यह ट्रायंगल स्टिकर देखने में ऐसा लगता है जैसे कोई भी इसे आसानी से निकाल सकता है। हालांकि एविएशन नियमों के तहत फ्लाइट अटेंडेंट्स की यह जिम्मेदारी होती है कि उड़ान से पहले सभी जरूरी मार्किंग सही हालत में मौजूद हों। अगर कोई स्टिकर खराब या गायब होता है तो उसे तुरंत बदला जाता है। क्योंकि यह छोटी सी मार्किंग भी फ्लाइट सुरक्षा से जुड़ी होती है।

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विमान में दिखने वाली छोटी चीजें भी होती हैं बेहद अहम

हवाई यात्रा के दौरान कई ऐसी चीजें दिखाई देती हैं जिन पर लोग ध्यान नहीं देते, लेकिन उनके पीछे बड़ा तकनीकी कारण छिपा होता है। ब्लैक ट्रायंगल स्टिकर भी उन्हीं में से एक है। यह सिर्फ एक साधारण निशान नहीं बल्कि विमान की सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा है। इससे पायलट और केबिन क्रू को आपात स्थिति में तुरंत फैसला लेने और विमान की स्थिति समझने में मदद मिलती है। अगली बार जब आप फ्लाइट में सफर करें और खिड़की के ऊपर यह छोटा काला ट्रायंगल देखें, तो समझ जाइए कि यह विमान की सुरक्षा से जुड़ा एक बेहद जरूरी संकेत है, जिसे ज्यादातर यात्री आज तक सिर्फ डिजाइन समझते आए हैं।

Sona Rajput
By Sona Rajput

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...Read More

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