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High Court News : मप्र हाईकोर्ट ने पूछा....20-30 साल तक पढ़ाने के बाद भी गेस्ट ही क्यों बने हैं प्रोफेसर?

सरकारी कॉलेजों में अतिथि विद्वान (गेस्ट फैकल्टी) के रूप में सेवाएं देने वालों के दर्द को हाईकोर्ट ने समझा है। 486 गेस्ट फैकल्टी की अपील पर हाईकोर्ट ने उच्च शिक्षा विभाग के पीएस और MPPSC के चेयरमैन को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं।
मप्र हाईकोर्ट ने पूछा....20-30 साल तक पढ़ाने के बाद भी गेस्ट ही क्यों बने हैं प्रोफेसर?
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    जबलपुर। प्रदेश के 486 गेस्ट फैकल्टी ने हाईकोर्ट में दो अपीलें दाखिल करके नियमितीकरण न किए जाने को चुनौती दी है। उनका दावा है कि 20 से 30 साल से वे सरकारी कॉलेजों में पढ़ा रहे, बावजूद इसके अभी भी उन्हें गेस्ट फैकल्टी का ही दर्जा प्राप्त है। दोनों अपीलों को संजीदगी से लेते हुए चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव और एमपीपीएससी के चेयरमैन को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। मामलों पर अगली सुनवाई अप्रैल माह के अंतिम सप्ताह में होगी। 

    याचिका में कहा-स्थाई दर्जा नहीं मिल रहा

    ये दोनों अपीलें पन्ना के डॉ. कमल प्रताप सिंह व 286 अन्य और मुरैना के डॉ. विनायक सिंह व 198 अन्य की ओर से दायर की गई हैं। आवेदकों का कहना है कि वे प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में पिछले दो से तीन दशकों से सेवा दे रहे संविदा सहायक प्राध्यापकों, खेल अधिकारियों और लाइब्रेरियंस के रूप में वर्ष 1996 से काम कर रहे हैं। उनकी नियुक्ति हर साल शासन की नीति और नियमों के अनुसार होती रही है, और वे यूजीसी के सभी आवश्यक शैक्षणिक मापदंडों को पूरा करते हैं। इसके बावजूद उन्हें स्थाई दर्जा नहीं दिया गया, जबकि उनका कार्य और जिम्मेदारियां नियमित सहायक प्राध्यापकों के समान ही हैं।

    योगदान को किया जा रहा नरजअंदाज

    याचिका में कहा गया कि उन्हें अस्थाई या गेस्ट कहकर उनके योगदान को नजरअंदाज किया जा रहा है। इस बारे में दाखिल की गर्इं दो याचिकाएं हाईकोर्ट की सिंगल बेंच से 12 मार्च 2026 को खारिज होने पर ये अपीलें दाखिल की गर्इं। मामलों पर हुई प्रारंभिक सुनवाई के दौरान आवेदकों की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोन्जाल्विस ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से अपनी दलीलें रखीं।  प्रारंभिक सुनवाई के बाद बेंच ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिए। 

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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