वन अफसरों को नहीं पता कहां हैं अटैचमेंट वाले 700 कर्मचारी ?वर्षों से दूसरे विभागों में कर रहे बाबूगिरी

विजय एस. गौर, भोपाल। कई वनकर्मी तहसील और एसडीएम कार्यालयों में बाबूगिरी कर रहे हैं, जबकि उनका वेतन वन विभाग से ही जारी हो रहा है। इस पूरे मामले ने विभागीय निगरानी और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अटैचमेंट के बाद नहीं हुई मूल विभाग में वापसी
दरअसल जनगणना, मतदाता परिचयपत्र, बीएलओ आदि कार्यों के लिए वन कर्मचारियों को भेजा जाता है। काम पूरा हो जाने के बाद भी इनकी वन विभाग में वापसी नहीं होती है। इसके बजाय कई कर्मचारी वर्षों से तहसील और एसडीएम कार्यालयों में बाबूगिरी कर रहे हैं। वहीं उनका वेतन वन विभाग से ही जारी होता रहा है।
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वन रक्षक किशोर मेहरा का मामला
वन रक्षक किशोर मेहरा की ड्यूटी निर्वाचन अधिकारी के आदेश से गोविंदपुरा एसडीएम कार्यालय में लगाई गई थी। इसके बाद से उनकी मूल विभाग में वापसी नहीं हो सकी। बीते छह वर्षों से वे एमपी नगर एसडीएम कार्यालय में कार्यरत रहे है। बीपीएल कार्ड बनाने में भ्रष्टाचार के चलते निलंबित होने के बाद भी वे मूल विभाग के बजाय कलेक्ट्र्रेट में हाजिरी लगाते रहे।
संदीप बैरागी भी वर्षों से कोलार तहसील में पदस्थ
वन रक्षक संदीप बैरागी वर्ष 2012-13 से एमपी नगर एसडीएम कार्यालय में अटैचमेंट के माध्यम से जमे रहे। भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते हटाए जाने के बाद भी वे कोलार तहसील में पदस्थ हो गए। फर्जी बीपीएल कार्ड मामले में जांच के बाद उन्हें हटाया गया। इसके बावजूद एक दशक से अधिक समय तक उनका वेतन वन विभाग से जारी होता रहा।
कर्मचारी संघ ने उठाए सवाल
वन राज्य कर्मचारी संघ के संयोजक आमोद तिवारी का कहना है कि वनकर्मी वन सुरक्षा की ट्रेनिंग लेते हैं, लेकिन प्रदेश में करीब 700 कर्मचारी वर्षों से दूसरे विभागों में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि ऐसे सभी कर्मचारियों को तत्काल वन सुरक्षा के कार्य में लगाया जाए। उनका आरोप है कि अधिकारियों के स्वार्थ के कारण इनकी वापसी नहीं हो पा रही है।
'कर्मचारियों की तत्काल विभाग में करवाई जाएगी'
भोपाल एसडीएम लक्ष्मीकांत खरे ने बताया कि अटैचमेंट पर कार्यरत वनकर्मी किशोर मेहरा को भ्रष्टाचार के मामले में निलंबित कर मूल विभाग भेजा गया था। वहीं पीसीसीएफ शुभरंजन सेन ने कहा कि अटैचमेंट वाले कर्मचारियों की जानकारी जुटाई जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे कर्मचारियों की तत्काल विभाग में वापसी करवाई जाएगी और दूसरे विभागों में रहते हुए हुए उनके निलंबन और बहाली की भी जांच होगी।












