Peoples Update Special :सीएजी रिपोर्ट में खुलासा...करोड़ों खर्च फिर भी निर्माण अधूरे, न सरकार का मकसद पूरा हुआ, न जनता को मिला लाभ

नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) की ऑडिट रिपोर्ट में इस बात का बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, कई कामों को स्वीकृति देने के बाद 'फोर्स क्लोज' (अचानक बंद) कर दिया गया, वहीं 6.36 करोड़ रुपए के कार्य बाद में निरस्त कर दिए गए।
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सीएजी रिपोर्ट में खुलासा...करोड़ों खर्च फिर भी निर्माण अधूरे, न सरकार का मकसद पूरा हुआ, न जनता को मिला लाभ

अशोक गौतम, भोपाल। प्रदेश में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। सामाजिक और मूलभूत संरचनाओं के विकास के लिए बस स्टैंड, स्टेडियम, पशु चिकित्सा औषधालय, आंगनबाड़ी और बाजार जैसे 171 निर्माण कार्यों के लिए करोड़ों रुपए की राशि जारी की गई थी। लेकिन मैदानी अधिकारियों और इंजीनियरों की लचर मॉनिटरिंग के कारण निर्माण एजेंसियों ने इन कामों को आधा- 
अधूरा ही छोड़ दिया।

नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) की ऑडिट रिपोर्ट में इस बात का बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, कई कामों को स्वीकृति देने के बाद 'फोर्स क्लोज' (अचानक बंद) कर दिया गया, वहीं 6.36 करोड़ रुपए के कार्य बाद में निरस्त कर दिए गए। नतीजतन, सरकारी खजाने का पैसा पानी की तरह बह गया और जनता को इसका कोई लाभ नहीं मिला।

जिलेवार बदहाली की तस्वीर

कांजीवाड़ा/कान्हीवाड़ा (सिवनी)

कौशल विकास घटक के तहत कुम्हार कार्यशाला, मृत परीक्षण प्रयोगशाला और जलपालन गृह के लिए अक्टूबर 2021 में 1.04 करोड़ रुपए स्वीकृत हुए। 2022 तक 34.16 लाख रुपए खर्च करने के बाद काम रोक दिया गया। कुल्हर नदी पर चेक डैम निर्माण के लिए 28.54 लाख स्वीकृत हुए। मैसर्स मॉ लक्ष्मी कंस्ट्रक्शन को 2020 में 90 दिनों के भीतर काम पूरा करने का आदेश मिला था और 8.56 लाख जारी किए गए, लेकिन 2021 तक काम अधूरा ही पड़ा रहा।

रातीबढ़ (भोपाल)

सीसी रोड, स्कूल उन्नयन और सार्वजनिक परिवहन के लिए 1.72 करोड़ की स्वीकृति दी गई, जिसमें से 13 ग्राम पंचायतों को 1.39 करोड़ रुपए जारी हुए। इसके बावजूद भानपुर केकड़िया, मालाखेड़ी और नरेला (नंदनी) में ग्राम पंचायत भवन आधे-अधूरे छोड़ दिए गए।

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गुनावत (धार)

उप स्वास्थ्य केंद्र के लिए 7.62 लाख स्वीकृत कर पहली किस्त 16.63 लाख जारी की गई, लेकिन निर्माण हुआ ही नहीं। माध्यमिक स्कूल बाउंड्रीवॉल के लिए 4.83 लाख में से 1.44 लाख खर्च हुए, काम अधूरा रहा लेकिन कागजों में पूरा दिखा दिया गया। पीपलखेड़ा स्कूल की बाउंड्रीवॉल पर भी 3.66 लाख खर्च कर काम आधा-अध अधूरा छोड़ दिया गया।

डेला खेड़ी (छिंदवाड़ा)

वर्ष 2020 में पांच स्थानों पर स्टॉप डैम के लिए 1.45 करोड़ रुपए स्वीकृत हुए थे। दौरिया खेड़ा के हर्राधना चेक डैम सहित चार स्टॉप डैमों पर 25.28 लाख रुपए फूंकने के बाद निर्माण कार्य पूरी तरह बंद कर दिया गया।

अफसरों के तर्क और जवाब

- जिला पंचायत, भोपाल: अपूर्ण भवनों के मामले में खर्च राशि वापस पाने के लिए संबंधित सचिवों और सरपंचों को नोटिस जारी कर दिया गया है।
- जिला पंचायत, धार: रुकी हुई बाउंड्रीवॉल का निर्माण कार्य जल्द पूरा कराया जाएगा और अन्य सभी अधूरे पड़े प्रोजेक्ट्स को भी पूरा किया जाएगा।

405 करोड़ रुपए मिलने के बाद भी नहीं कर पाए खर्च

केन्द्र सरकार द्वारा पंचायतों में विकास कार्यों (स्ट्रीट लाइट, कचरा प्रबंधन, जलापूर्ति, स्वास्थ्य, शिक्षा आदि) के लिए दिए गए 405 करोड़ रुपए समय पर खर्च नहीं हो सके। पंचायतों की इस लापरवाही के कारण राज्य सरकार को खुद इन परियोजनाओं की कमान संभालनी पड़ी।

प्रमुख पंचायतों में बजट उपयोग का हाल

रातीबढ़ (भोपाल): 30 करोड़ में से सिर्फ 48.32% खर्च।
छिमक (ग्वालियर): 12.32 करोड़ में से मात्र 41.07% खर्च।
कोन्हीबाड़ा (सिवनी): 3.39 करोड़ में से सिर्फ 22.60% खर्च।
गुनावत (धार): 5.24 करोड़ में से 34.93% खर्च।
डेलाखेड़ी (छिंदवाड़ा): 7.94 करोड़ में से 52.93% खर्च।

Aakash Waghmare
By Aakash Waghmare

आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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