PU Special :मध्यप्रदेश में 13,982 बाल शौचालय मंजूर, फिर भी 75% का काम शुरू नहीं; महिला एवं बाल विकास आयुक्त ने 50 अफसरों को दिया नोटिस

पुष्पेन्द्र सिंह, भोपाल। मध्यप्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए बाल-सुलभ शौचालय उपलब्ध कराने की योजना की रफ्तार बेहद धीमी है। महिला एवं बाल विकास विभाग ने वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में 13,982 नए बाल शौचालयों के निर्माण को मंजूरी दी थी। इसके लिए 29.54 करोड़ रुपए की राशि भी उपलब्ध कराई गई। इसके बावजूद अब तक सिर्फ 1,442 शौचालय ही पूरे हो पाए हैं। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक 2,061 शौचालय निर्माणाधीन हैं जबकि 10,479 शौचालयों का निर्माण अभी तक शुरू ही नहीं हुआ है। यानी मंजूर किए गए शौचालयों में करीब 75 फीसदी का काम अब तक शुरू नहीं हो सका है। निर्माण में धीमी प्रगति को गंभीरता से लेते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग की आयुक्त निधि निवेदिता ने 50 जिलों के जिला कार्यक्रम अधिकारियों को नोटिस जारी किए हैं।
जर्जर आंगनबाड़ी केंद्र गिराए, नए भवन का इंतजार
सागर जिले के राहतगढ़ ब्लॉक की मरदानपुर ग्राम पंचायत के सरपंच चरण सिंह यादव के मुताबिक मोहासा और मरदानपुर के जर्जर आंगनबाड़ी केंद्रों को गिरा दिया गया है। नए भवन बनाने के लिए वह तीन बार पत्र लिख चुके हैं लेकिन अभी तक निर्माण शुरू नहीं हुआ। उनका कहना है कि इन केंद्रों में बच्चों के लिए शौचालय की सुविधा भी नहीं है। यह स्थिति सिर्फ एक पंचायत तक सीमित नहीं है। प्रदेश के कई जिलों में आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों के लिए शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा अब भी उपलब्ध नहीं है।
प्रदेश में 97,882 आंगनबाड़ी केंद्र
महिला एवं बाल विकास विभाग की जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश में कुल 97,882 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इनमें से 84,703 केंद्रों में बाल शौचालय की सुविधा उपलब्ध है, जबकि 13,179 केंद्रों में शौचालय की जरूरत बताई गई है। यानी प्रदेश के हजारों आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए शौचालय की सुविधा उपलब्ध कराने की जरूरत अभी बनी हुई है।
12 जिलों में एक भी शौचालय पूरा नहीं
आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के भोपाल, भिंड, नरसिंहपुर, सिवनी, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़-निवाड़ी, उमरिया, आगर-मालवा, मंदसौर, नीमच और रतलाम जिलों में स्वीकृत नए बाल शौचालयों में एक भी शौचालय पूरा नहीं हुआ है।
सतना, धार और डिंडोरी में भी काम बेहद धीमा
जिलेवार आंकड़ों में सबसे धीमी प्रगति वाले जिलों में सतना सबसे ऊपर है। यहां 595 शौचालय मंजूर किए गए थे, लेकिन सिर्फ 2 पूरे हुए हैं और 569 का काम शुरू नहीं हुआ है।
धार में 983 शौचालय मंजूर हुए, जिनमें केवल 25 पूरे हो पाए हैं और 878 का निर्माण शुरू नहीं हुआ है। डिंडोरी में 961 मंजूर शौचालयों में 65 पूरे हुए हैं, जबकि 811 अभी अप्रारंभ हैं।
इसी तरह झाबुआ में 620 मंजूर शौचालयों में 16 पूरे हुए और 515 का काम शुरू नहीं हुआ। शहडोल में 510 मंजूर शौचालयों में 19 पूरे हुए, जबकि 480 का निर्माण अभी शुरू नहीं हुआ है।
विभाग ने 50 अफसरों को दिया नोटिस
महिला एवं बाल विकास विभाग के आयुक्त कार्यालय ने 12 अगस्त 2026 को 50 जिलों के जिला कार्यक्रम अधिकारियों को नोटिस जारी किए। इसमें शौचालय निर्माण में शिथिलता और लापरवाही बरतने पर जवाब मांगा गया है। नोटिस में विभाग ने कहा है कि आंगनबाड़ी केंद्रों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना बच्चों को गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक बाल-देखभाल और शिक्षा उपलब्ध कराने के विभागीय लक्ष्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है। विभाग के अनुसार पर्याप्त समय और वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जाने के बावजूद शौचालय निर्माण में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई। इसे गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा गया है।
अधिकारी-कर्मचारी संघ ने उठाए सवाल
नोटिस जारी होने के बाद महिला एवं बाल विकास अधिकारी-कर्मचारी संघ ने विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। संघ के अध्यक्ष सुरेश सिंह तोमर का कहना है कि आयुक्त के खिलाफ संघ की प्रदेशव्यापी एक दिवसीय हड़ताल के अगले ही दिन लंबित शौचालय निर्माण के मामले में नोटिस जारी किए गए। उनका दावा है कि नोटिस 20 अगस्त को व्हाट्सऐप ग्रुप पर भेजे गए जबकि उन पर 12 अगस्त की तारीख दर्ज है। संघ का तर्क है कि आंगनबाड़ी केंद्रों में शौचालय निर्माण का काम ग्राम पंचायत स्तर की निर्माण एजेंसी के माध्यम से कराया जाता है। ऐसे में जिला कार्यक्रम अधिकारियों को सीधे निर्माण के लिए जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।
आगर-मालवा में शौचालय में भरा मिला भूसा
आंगनबाड़ी केंद्रों की जमीनी स्थिति भी सवाल खड़े करती है। आगर-मालवा जिले की मई 2026 की जानकारी के अनुसार पायरी गांव का आंगनबाड़ी केंद्र स्कूल के जर्जर कमरे में संचालित हो रहा था। वहां न बिजली की व्यवस्था थी और न पानी की। केंद्र के शौचालय में भूसा भरा मिला था, यानी शौचालय होने के बावजूद उसका इस्तेमाल बच्चों के लिए नहीं हो पा रहा था।
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छतरपुर में भी बिना बाल शौचालय चल रहा केंद्र
छतरपुर जिले के ग्राम कैड़ी का आंगनबाड़ी केंद्र भी बाल शौचालय के बिना संचालित हो रहा है। इससे साफ है कि सिर्फ निर्माण की मंजूरी और राशि जारी करना पर्याप्त नहीं है बल्कि जमीनी स्तर पर काम पूरा कराकर बच्चों के इस्तेमाल के लिए सुविधा उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
29.54 करोड़ रुपए उपलब्ध, फिर भी 10,479 काम अप्रारंभ
पूरे आंकड़ों को देखें तो महिला एवं बाल विकास विभाग ने 13,982 बाल-सुलभ शौचालयों को मंजूरी दी और इनके निर्माण के लिए 29.54 करोड़ रुपए उपलब्ध कराए। लेकिन इनमें से अभी तक केवल 1,442 शौचालय पूरे हुए हैं। 2,061 शौचालयों का निर्माण चल रहा है जबकि सबसे बड़ी संख्या यानी 10,479 शौचालयों का काम शुरू ही नहीं हुआ है। इस तरह करीब 75 फीसदी स्वीकृत शौचालयों का निर्माण अप्रारंभ है।
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मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना विभाग की जिम्मेदारी
विभाग की आयुक्त निधि निवेदिता ने कहा है कि आंगनबाड़ी केंद्रों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना विभाग की जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बाल-सुलभ शौचालयों के लिए स्वीकृति और राशि उपलब्ध कराए जाने के बावजूद कई जिलों में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई इसलिए संबंधित जिला कार्यक्रम अधिकारियों को नोटिस जारी किए गए हैं।





















