PU Special :राज्य पुलिस सेवा के 1,269 अधिकारी प्रमोशन के इंतजार में, 48 आईपीएस के पद खाली

विजय एस. गौर, भोपाल। मध्यप्रदेश में राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों की पदोन्नति का मामला लंबे समय से अटका हुआ है। 1998 बैच के बाद से पदोन्नति की प्रक्रिया प्रभावित होने के चलते करीब 1,269 डीएसपी, एसडीओपी, सीएसपी और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पदोन्नति की प्रतीक्षा में हैं। इनमें करीब 50 अधिकारी 25 साल की सेवा पूरी कर चुके हैं, लेकिन उन्हें अब तक आईपीएस अवॉर्ड नहीं मिल सका है। प्रदेश में आईपीएस के 319 स्वीकृत पदों में 48 रिक्त होने के बावजूद राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों को इन पदों का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
पदोन्नति और रिक्त पदों की स्थिति
राज्य पुलिस सेवा के पदोन्नति की प्रतीक्षा में 1,269 अधिकारी हैं। मप्र में आईपीएस के 319 स्वीकृत पद हैं, जिनमें 271 कार्यरत और 48 पद रिक्त हैं। करीब 50 डीएसपी 25 साल की सेवा पूरी कर चुके हैं, लेकिन उन्हें अब तक आईपीएस अवॉर्ड नहीं मिल सका है। वहीं 2026 में 27 हजार पुलिस कर्मचारियों की पदोन्नति हुई है।
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2027 के कैडर रिव्यू पर निगाह
अगले साल होने वाला कैडर रिव्यू अहम माना जा रहा है। संगठन की मांग है कि राज्य पुलिस सेवा का कोटा बढ़ाया जाए, ताकि पदोन्नति के अवसर बढ़ सकें। संगठन अध्यक्ष जितेंद्र सिंह डंगस के अनुसार इस संबंध में मुख्यमंत्री के समक्ष पक्ष रखा गया है। संगठन का कहना है कि कैडर रिव्यू से राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों के लिए पदोन्नति के अवसर बढ़ सकते हैं।
नॉन-कैडर पदों पर पदस्थापना का विकल्प
राज्य पुलिस सेवा संगठन अब इन रिक्त पदों पर वन टाइम प्रमोशन या नॉन-कैडर पदों पर पदस्थापना का विकल्प मांग रहा है। 25 साल या अधिक सेवा वाले अफसरों को नॉन-कैडर पदों पर पदस्थ किया जाए। लंबी सेवा वाले अधिकारियों को चिन्हित जिलों या बटालियनों में पदस्थापना का अवसर दिया जाए। 20 साल की सेवा पूरी कर चुके अफसरों के लिए वर्दी पर पद संबंधी सम्मानजनक प्रावधान पर विचार करने की मांग भी की गई है।
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कैडर रिव्यू से बढ़ सकते हैं पदोन्नति अवसर
केंद्र से अनुरोध कर निर्धारित समय से पहले भी कैडर रिव्यू कराया जा सकता है। इससे राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों के लिए पदोन्नति के अवसर बढ़ेंगे। पूर्व डीजी, लोकायुक्त प्रमोद शर्मा के अनुसार राज्य पुलिस सेवा के अफसरों के पदोन्नति अवसर बढ़ाने के लिए कैडर रिव्यू कराया जा सकता है। संगठन का कहना है कि ईओडब्ल्यू, लोकायुक्त, पुलिस प्रशिक्षण संस्थानों और अन्य राज्य सरकार के संस्थानों में नॉन-कैडर पदों पर राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों को एसपी स्तर की जिम्मेदारी दी जा सकती है।





















