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टूरिस्ट बसों पर नए नियम का असर:एमपी में 15 हजार बसों के थमे पहिए, रोजगार और यात्रा दोनों पर संकट

केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के नए नियमों ने मध्य प्रदेश में टूरिस्ट बस कारोबार को झटका दे दिया है। टू वाय टू स्लीपर बसों के डिजायन को बदलकर टू वाय वन करने के फैसले से हजारों बसें खड़ी हो गई हैं। इससे न सिर्फ बस ऑपरेटरों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है, बल्कि यात्रियों और रोजगार पर भी सीधा असर पड़ा है।
एमपी में 15 हजार बसों के थमे पहिए, रोजगार और यात्रा दोनों पर संकट
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    राजीव सोनी, भोपाल

    नई डिजायन अनिवार्यता, बीएस-6 नियम और होम स्टेट फेरी की बाध्यता ने बस संचालकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लागत बढ़ने, सीटें घटने और टैक्स अंतर के चलते कारोबार प्रभावित हुआ है। तीर्थ यात्राएं महंगी हो गई हैं और हजारों लोगों के रोजगार पर संकट गहराया है।

    नए डिजायन नियम से बसों पर पड़ा असर 

    केंद्रीय मंत्रालय द्वारा लागू किए गए टू वाय वन डिजायन नियम ने मध्य प्रदेश में टूरिस्ट बस ऑपरेटरों को गहरी परेशानी में डाल दिया है। करीब 15 हजार बसों के पहिए थम गए हैं और लगभग 45 हजार लोगों के रोजगार पर संकट खड़ा हो गया है। नई डिजायन के तहत हर बस में बदलाव के लिए करीब 8 लाख रुपए का अतिरिक्त खर्च आएगा, वहीं सीटों की संख्या 48 से घटकर 30 रह जाएगी जिससे आमदनी पर सीधा असर पड़ेगा। मंत्रालय ने यह नियम 1 सितंबर 2025 से लागू किया है और अब बीएस-6 नियम को सख्ती से लागू किया जा रहा है, जिससे पुरानी बसों का संचालन और मुश्किल हो गया है।

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    होम स्टेट फेरी नियम और टैक्स अंतर ने बढ़ाई मुश्किलें

    1 अप्रैल 2026 से लागू नए नियम के अनुसार हर टूरिस्ट बस को 60 दिन में अपने होम स्टेट में फेरी लगाना अनिवार्य कर दिया गया है, अन्यथा ऑल इंडिया परमिट नहीं मिलेगा। इससे पहले बस संचालक टैक्स बचाने के लिए अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों से परमिट लेते थे जहां टैक्स कम है, जबकि मध्य प्रदेश में यह करीब 4 लाख रुपए वार्षिक है और अरुणाचल में लगभग 3 लाख रुपए। इस अंतर के कारण बड़ी संख्या में बसें दूसरे राज्यों से रजिस्टर्ड थीं, लेकिन नए नियम ने इस व्यवस्था को झटका दिया है और ऑपरेटरों की लागत और बढ़ गई है।

    तीर्थ यात्राएं महंगी, यात्रियों पर बढ़ा आर्थिक बोझ

    नए नियमों का असर सीधे यात्रियों पर भी पड़ रहा है, खासकर तीर्थ यात्राओं पर जाने वाले लोगों के लिए यह झटका साबित हुआ है। बद्रीनाथ, केदारनाथ, वैष्णोदेवी, तिरुपति और रामेश्वरम जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों की यात्रा अब करीब 70 प्रतिशत तक महंगी हो सकती है। सीटों की संख्या घटने और संचालन लागत बढ़ने से किराया बढ़ाना मजबूरी बन गया है। बसें गैरेज में खड़ी रहने से ईएमआई का दबाव भी बढ़ रहा है और कई ऑपरेटर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।

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    बस ऑपरेटर और सरकार आमने-सामने

    टूरिस्ट बस ऑनर्स एसोसिएशन के सचिव अनिल भावसार का कहना है कि नए नियमों से कारोबार पूरी तरह चौपट हो गया है और देशभर में करीब सवा लाख बसें प्रभावित हुई हैं, जिससे रोजगार और यात्रा दोनों पर असर पड़ा है। वहीं डिप्टी कमिश्नर परिवहन विभाग किरण शर्मा ने कहा कि यह बदलाव यात्रियों की सुरक्षा के लिए किया गया है और नई डिजायन आगजनी या दुर्घटना की स्थिति में नुकसान को कम करेगी, साथ ही बस बॉडी अब तयशुदा बिल्डर्स ही बनाएंगे जिससे गुणवत्ता सुनिश्चित होगी और सुरक्षा मानकों का पालन हो सकेगा।

    Rohit Sharma
    By Rohit Sharma

    पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...

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