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जन्मदिन स्पेशल:उज्जैन से उठकर मध्यप्रदेश की सत्ता तक पहुंचे डॉ. मोहन यादव, जानिए पूरी कहानी

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav के जन्मदिन पर जानिए उनका पूरा राजनीतिक सफर उज्जैन के एक साधारण परिवार से निकलकर छात्र राजनीति, संगठन, विधायक, मंत्री और फिर मुख्यमंत्री बनने तक की पूरी टाइमलाइन।
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उज्जैन से उठकर मध्यप्रदेश की सत्ता तक पहुंचे डॉ. मोहन यादव, जानिए पूरी कहानी
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AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    कभी कॉलेज कैंपस में छात्रसंघ की आवाज उठाने वाला एक युवा आज मध्यप्रदेश की सत्ता का चेहरा है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का राजनीतिक सफर उन कहानियों में शामिल है, जो धीरे-धीरे बनती हैं लेकिन लंबा असर छोड़ती हैं। उज्जैन के एक साधारण परिवार से निकलकर प्रदेश की सत्ता तक पहुंचने का उनका सफर कई मायनों में खास रहा है।

    छात्र राजनीति से शुरू हुई यह यात्रा संगठन, विधानसभा और फिर मुख्यमंत्री पद तक पहुंची। उज्जैन, जो धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध शहर है, ने उनके व्यक्तित्व को गहराई दी। यही कारण है कि उनके राजनीतिक दृष्टिकोण में आज भी सांस्कृतिक जुड़ाव साफ नजर आता है।

    मोहन यादव का राजनीतिक सफर

    1965: जन्म- उज्जैन से शुरुआत

    25 मार्च 1965 को Ujjain में जन्मे मोहन यादव एक साधारण परिवार में पले-बढ़े। उनके पिता पूनमचंद यादव और माता लीलाबाई यादव ने उन्हें पारंपरिक मूल्यों, अनुशासन और मेहनत की सीख दी।

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    1980 का दशक: शिक्षा-लीडरशिप की तैयारी

    विक्रम विश्वविद्यालय से उन्होंने BSC, LLB, MA, MBA और PHD जैसी उच्च शिक्षा प्राप्त की। शिक्षा के इस मजबूत बैकग्राउंड ने उन्हें एक समझदार और विश्लेषणात्मक नेता के रूप में पहचान दिलाई।

    1982-84: छात्र राजनीति में एंट्री

    माधव साइंस कॉलेज से छात्रसंघ की राजनीति में कदम रखा। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और पार्टी संगठन में सक्रिय भूमिका निभाई। इस दौरान उन्होंने जमीनी स्तर पर काम करते हुए मजबूत राजनीतिक नेटवर्क तैयार किया।
    1982: सह-सचिव
    1984: अध्यक्ष
    यहीं से उनकी राजनीतिक समझ और नेतृत्व क्षमता विकसित हुई।

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    1990-2010: संगठन में लंबा अनुभव

    छात्र राजनीति के बाद उन्होंने संगठन में लंबा समय बिताया। ABVP और भारतीय जनता पार्टी के विभिन्न संगठनात्मक ढांचों में काम करते हुए उन्होंने जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत की।

    वर्ष 1993-95 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, उज्जैन नगर के सह खण्डकार्यवाह, सायं भाग नगरकार्यवाह, वर्ष 1996 में खण्डकार्यवाह और नगरकार्यवाह, वर्ष 1997 में भारतीय जनता युवा मोर्चा की प्रदेश कार्य समिति के सदस्य बने।

    इस दौरान उन्होंने शिक्षा, सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई। यह वह दौर था, जब वे सुर्खियों में कम, लेकिन संगठन के भीतर मजबूत होते गए। 

    डॉ. यादव वर्ष 2006 में भारत स्काउट एवं गाइड के जिलाध्यक्ष, मध्यप्रदेश ओलंपिक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष, वर्ष 2007 में अखिल भारतीय कुश्ती महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष, वर्ष 1992, 2004 एवं 2016 सिंहस्थ उज्जैन केन्द्रीय समिति के सदस्य रहे।

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    2013: पहली बार बने विधायक

    विधायक बनने से पूर्व उन्होंने मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया था। उज्जैन दक्षिण सीट से चुनाव जीतकर पहली बार विधानसभा पहुंचे। यह उनके राजनीतिक करियर का बड़ा टर्निंग पॉइंट था।

    2018: दूसरी बार जीत

    लगातार दूसरी बार विधायक चुने गए, जिससे उनके जनाधार की मजबूती साफ नजर आई।  वे उज्जैन दक्षिण सीट से तीन बार (2013, 2018, 2023) विधायक रहे हैं।

    2020-2023: उच्च शिक्षा मंत्री बने

    मध्यप्रदेश सरकार में डॉ. मोहन यादव ने शिवराज सिंह चौहान की सरकार में उन्होंने उच्च शिक्षा मंत्री के रूप में कार्य किया और मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) को लागू करने में अहम भूमिका निभाई।

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    2023: बने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री

    विधानसभा चुनाव के बाद 13 दिसंबर 2023 को डॉ. मोहन यादव ने राज्य के 19वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। 13 दिसंबर को उन्होंने मध्यप्रदेश के 19वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। यह उनके लंबे राजनीतिक सफर का सबसे बड़ा मुकाम था।चुनाव के बाद जब मुख्यमंत्री के नाम को लेकर चर्चाएं चल रही थीं, उनका नाम इस पद के लिए एक सरप्राइज चॉइस के तौर पर सामने आया।

    इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित कई दिग्गज नेता मौजूद थे।

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    मुख्यमंत्री के रूप में प्रमुख फोकस

    • महिलाओं का सशक्तिकरण
    • युवाओं के लिए रोजगार
    • शिक्षा में सुधार
    • निवेश और औद्योगिक विकास

    सरकार की नीतियों में पारंपरिक मूल्यों और आधुनिक विकास का संतुलन देखने को मिलता है।

    निजी जीवन और पृष्ठभूमि

    मोहन यादव एक पारिवारिक व्यक्ति हैं। उनकी पत्नी सीमा यादव और तीन बच्चे हैं। वकालत, व्यापार और कृषि से जुड़े रहने के कारण उनका जमीनी संपर्क बना हुआ है।

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    हर राजनीतिक करियर की तरह उनके सफर में भी कुछ विवाद सामने आए चाहे बयान हों या सांस्कृतिक मुद्दे। हालांकि, इन विवादों का उनके राजनीतिक प्रभाव पर खास असर नहीं पड़ा और उनकी स्थिति मजबूत बनी रही।

    Garima Vishwakarma
    By Garima Vishwakarma

    गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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