पेट्रोल पंपों पर भीड़, लोगों में डर…क्या फिर लगेगा देश में लॉकडाउन? तेल संकट के बीच सरकार ने तोड़ी चुप्पी

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी संघर्ष का असर अब पूरी दुनिया पर दिखने लगा है। तेल और गैस की सप्लाई पर संकट गहराने लगा है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। इसी बीच भारत में भी पेट्रोल और एलपीजी को लेकर चिंता बढ़ गई है। कई जगहों पर पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखने को मिलीं और सोशल मीडिया पर देशव्यापी लॉकडाउन की अफवाहें फैलने लगीं। वहीं अब इसको लेकर केंद्र सरकार की तरफ से भी बयान सामने आया है।
सोशल मीडिया पर फैली लॉकडाउन की अफवाह
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और तेल सप्लाई में संभावित बाधा की खबरों के बाद सोशल मीडिया पर यह अफवाह तेजी से फैलने लगी कि सरकार कोरोना काल की तरह फिर से देशव्यापी लॉकडाउन लगाने वाली है। इन अफवाहों ने लोगों में डर का माहौल पैदा कर दिया। कई शहरों में लोग पेट्रोल पंपों पर जरूरत से ज्यादा ईंधन भराने के लिए पहुंचने लगे। इसके अलावा एलपीजी सिलेंडर की कमी की भी खबरें सामने आने लगीं।
लेकिन सरकार ने इन खबरों को पूरी तरह भ्रामक बताते हुए कहा है कि, ऐसी कोई स्थिति नहीं है और ऊर्जा आपूर्ति को सामान्य बनाए रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
हरदीप सिंह पुरी बोले- लॉकडाउन की खबरें झूठी
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए साफ कहा कि लॉकडाउन को लेकर फैल रही खबरें पूरी तरह गलत हैं। उन्होंने कहा कि, सरकार लॉकडाउन लगाने पर विचार नहीं कर रही है। ऊर्जा और सप्लाई चेन की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। देश में ईंधन और जरूरी चीजों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पूरी तैयारी है।
पुरी ने लोगों से अपील की है कि, वे शांत रहें और अफवाहों पर भरोसा न करें। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे समय में घबराहट या जमाखोरी की प्रवृत्ति स्थिति को और खराब कर सकती है, इसलिए लोगों को जिम्मेदारी से व्यवहार करना चाहिए।
किरण रिजिजू भी बोले- देश में लॉकडाउन नहीं लगेगा
केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने भी संसद भवन के बाहर मीडिया से बातचीत में कहा कि देश में लॉकडाउन लगाने का कोई सवाल ही नहीं है। उन्होंने कहा कि, हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद स्थिति पर नजर रख रहे हैं। सरकार हर स्तर पर सप्लाई और कीमतों को स्थिर रखने के लिए काम कर रही है। रिजिजू ने कहा कि, लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है और अफवाह फैलाने वालों से सावधान रहना चाहिए।
कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का सबसे बड़ा असर तेल बाजार पर पड़ा है। केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी के मुताबिक पिछले एक महीने में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। पहले कीमत लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल थी, अब यह बढ़कर करीब 122 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई है। इस बढ़ोतरी का असर दुनिया के कई देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ा है।
दुनिया में कीमतों में बढ़ोतरी
- दक्षिण-पूर्व एशिया: 30% - 50%
- उत्तरी अमेरिका: लगभग 30%
- यूरोप: लगभग 20%
- अफ्रीका: लगभग 50%
सरकार ने राजस्व में की कटौती
हरदीप पुरी ने बताया कि इस स्थिति में सरकार के सामने दो विकल्प थे-
- अन्य देशों की तरह पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी कर दी जाए
- या फिर सरकार खुद वित्तीय बोझ उठाकर जनता को राहत दे
सरकार ने दूसरा विकल्प चुना और अपने राजस्व में कटौती करते हुए कीमतों का बोझ कम करने का फैसला लिया।
इसके अलावा-
- निर्यात पर टैक्स लगाया गया
- तेल कंपनियों के नुकसान को कम करने की कोशिश की गई
- सप्लाई चेन को स्थिर रखने के लिए कई कदम उठाए गए
भारत पर मिडिल ईस्ट संकट के 5 बड़े असर
1. तेल और ऊर्जा संकट
भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल आयात करता है। इसमें से लगभग 60–65% पश्चिम एशिया से आता है। होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया का करीब 20% तेल गुजरता है। इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से भारत के 22 जहाज फंसने की खबर भी सामने आई है।
2. भारतीयों की सुरक्षा
पश्चिम एशिया में करीब 80 से 90 लाख भारतीय काम करते हैं। युद्ध के कारण हजारों लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी। अब तक करीब 3.75 लाख भारतीयों को सुरक्षित भारत लाया गया है।
3. महंगाई पर असर
तेल की कीमतें बढ़ने से आम लोगों पर भी असर पड़ सकता है। एलपीजी सिलेंडर महंगा हो सकता है, पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ सकते हैं। रोजमर्रा के सामान महंगे हो सकते हैं, शेयर बाजार में भी गिरावट देखने को मिल सकती है।
4. विदेश से आने वाले पैसे पर असर
भारत को हर साल लगभग 8 लाख करोड़ रुपये का रेमिटेंस मिलता है। इसमें से करीब 50% पैसा गल्फ देशों से आता है। यदि युद्ध लंबा चलता है तो वहां काम कर रहे भारतीयों की आय प्रभावित हो सकती है।
5. व्यापार और शिपिंग पर असर
भारत का करीब 100 अरब डॉलर का व्यापार इस क्षेत्र से जुड़ा है। अगर रेड सी या सुएज रूट बाधित होता है तो शिपिंग लागत 2 से 3 गुना तक बढ़ सकती है।
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PM ने कहा था- जंग की चुनौती कोरोना जैसी
कुछ दिन पहले संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा था कि दुनिया में जो हालात बन रहे हैं, वे आने वाले समय में बड़ी परीक्षा साबित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि, देश को एकजुट होकर इस चुनौती का सामना करना होगा। केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर काम करना होगा, सरकार लगातार स्थिति की निगरानी कर रही है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि, भारत ने कोरोना महामारी जैसे कठिन समय में भी एकजुट होकर चुनौतियों का सामना किया है।
सरकार की अपील- घबराएं नहीं, जमाखोरी न करें
सरकार ने लोगों से साफ अपील की है कि, अफवाहों पर भरोसा न करें, जरूरत से ज्यादा पेट्रोल या गैस जमा न करें और सोशल मीडिया पर भ्रामक खबरें न फैलाएं। सरकार का कहना है कि, ऊर्जा सप्लाई को बनाए रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।











