रोज रात 12 बजते ही बंद होगा Instagram-Facebook! Meta ने 6 घंटे के लिए लगाया डिजिटल लॉक, सुबह 6 बजे खुलेगा ऐप

अमेरिका में बच्चों और किशोरों की सोशल मीडिया सुरक्षा को लेकर Meta की मुश्किलें बढ़ गई हैं। Facebook और Instagram चलाने वाले बच्चों को लेकर कंपनी पर लगे गंभीर आरोपों के बाद अब Meta ने एक बड़े मुकदमे को खत्म करने के लिए अरबों डॉलर के समझौते पर सहमति जताई है। इस समझौते के तहत कंपनी बच्चों और किशोरों के लिए अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म में कई बड़े बदलाव करेगी। सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि 18 साल से कम उम्र के यूजर्स के लिए Facebook और Instagram पर रोजाना इस्तेमाल की डिफॉल्ट लिमिट दो घंटे होगी। इसके अलावा रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक इन ऐप्स के इस्तेमाल पर रोक लगाने की व्यवस्था भी की जाएगी। हालांकि, Meta ने समझौते में किसी भी गलती या कानूनी जिम्मेदारी को स्वीकार नहीं किया है।
आखिर Meta पर क्या आरोप लगे थे?
यह पूरा मामला अमेरिका में बच्चों और किशोरों की ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़ा है। अमेरिका के कई राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने 2023 में Meta के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। आरोप लगाया गया कि Facebook और Instagram में कुछ ऐसे फीचर और डिजाइन तैयार किए गए, जिनकी वजह से बच्चे और किशोर इन प्लेटफॉर्म पर ज्यादा समय बिताने के लिए आकर्षित होते हैं। राज्यों का कहना था कि सोशल मीडिया का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल बच्चों की मानसिक और शारीरिक सेहत पर असर डाल सकता है। Meta पर यह आरोप भी लगाया गया कि उसने बच्चों और उनके माता-पिता को सोशल मीडिया के संभावित खतरों के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं दी। इस मामले की सुनवाई अगस्त 2026 में कैलिफोर्निया की संघीय अदालत में शुरू हुई थी। अब समझौते के बाद यह मामला सामान्य ट्रायल के रूप में आगे नहीं बढ़ेगा। हालांकि, समझौते को अंतिम रूप देने के लिए अदालत की मंजूरी अभी जरूरी है।
Meta देगा अरबों डॉलर
इस समझौते की रकम को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल के मुताबिक राज्यों को 17 अरब डॉलर तक मिल सकते हैं। वहीं Meta ने अपने बयान में कुल भुगतान करीब 18 अरब डॉलर बताया है। कुछ रिपोर्टों में समझौते की अधिकतम रकम करीब 16.68 अरब डॉलर बताई गई है। रकम का एक बड़ा हिस्सा तय है, जबकि कुछ अतिरिक्त राशि कई शर्तों पर निर्भर करेगी। Meta के मुताबिक कंपनी 2026 की तीसरी तिमाही में इस मामले से जुड़े करीब 10 अरब डॉलर के कानूनी खर्च को दर्ज करेगी।
Facebook और Instagram में अब क्या बदलेगा?
सबसे ज्यादा असर 18 साल से कम उम्र के यूजर्स पर पड़ेगा। समझौते के तहत कई नए सुरक्षा उपाय लागू किए जाएंगे।
रोजाना सिर्फ 2 घंटे की डिफॉल्ट लिमिट- Facebook और Instagram को मिलाकर किशोरों के लिए रोजाना दो घंटे की डिफॉल्ट इस्तेमाल सीमा होगी। अगर कोई यूजर इस लिमिट को हटाना चाहता है तो उसके लिए माता-पिता की अनुमति जरूरी होगी। खास बात यह है कि दोनों ऐप्स पर बिताया गया समय इसी कुल दो घंटे की सीमा में शामिल होगा।
रात में Facebook-Instagram बंद- रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक 18 साल से कम उम्र के यूजर्स के लिए दोनों ऐप्स के इस्तेमाल पर रोक लगाने की व्यवस्था होगी। यानी देर रात तक सोशल मीडिया स्क्रॉल करने की आदत पर सीधे लगाम लगाने की कोशिश की जाएगी।
स्कूल टाइम में नोटिफिकेशन होंगे म्यूट- सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक नोटिफिकेशन डिफॉल्ट रूप से म्यूट रहेंगे। हालांकि जरूरी सुरक्षा अलर्ट और सीधे मैसेज जैसे महत्वपूर्ण नोटिफिकेशन इससे अलग रह सकते हैं।
लगातार इस्तेमाल पर मिलेगा ब्रेक रिमाइंडर- अगर कोई किशोर लगातार लंबे समय तक ऐप इस्तेमाल करता है तो उसे बीच-बीच में ब्रेक लेने का रिमाइंडर दिखाया जाएगा। इसके साथ ही माता-पिता के लिए पैरेंटल कंट्रोल को आसान बनाने की भी तैयारी है।
उम्र की जांच होगी और सख्त
बच्चों की सुरक्षा के लिए Meta उम्र की पहचान करने वाली तकनीक को भी ज्यादा मजबूत करेगी। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने वाला व्यक्ति वास्तव में किस उम्र का है। इसके साथ बच्चों को नुकसान पहुंचाने वाले कंटेंट से बचाने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय भी लागू किए जाएंगे। कुछ ऐसे फीचर्स को भी सीमित करने की बात है जिनको लेकर बच्चों की मानसिक सेहत पर पहले से सवाल उठते रहे हैं। इनमें सार्वजनिक लाइक काउंट और कुछ ब्यूटी फिल्टर जैसे फीचर शामिल हैं।
YouTube और TikTok पर भी लागू हो सकती है बड़ी शर्त
इस पूरे समझौते की सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसकी कुछ रकम दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से भी जुड़ी हुई है। Meta का तर्क है कि अगर सिर्फ Facebook और Instagram पर पाबंदी लगाई गई तो बच्चे दूसरे प्लेटफॉर्म जैसे YouTube और TikTok पर ज्यादा समय बिताने लग सकते हैं। इसी वजह से समझौते की अतिरिक्त रकम का एक हिस्सा इस बात से जोड़ा गया है कि दूसरे बड़े प्लेटफॉर्म भी बच्चों के लिए सुरक्षा के ऐसे ही कदम उठाएं। इनमें रोजाना इस्तेमाल की सीमा, रात में इस्तेमाल पर रोक और उम्र की जांच जैसे उपाय शामिल हैं।
Meta ने नहीं मानी अपनी गलती
इतने बड़े समझौते के बावजूद Meta ने यह स्वीकार नहीं किया है कि उसने कोई गलती की या कानून तोड़ा। कंपनी का कहना है कि किशोरों के लिए सुरक्षित ऑनलाइन अनुभव उसकी प्राथमिकता है। Meta का यह भी कहना है कि बच्चों की सुरक्षा सिर्फ एक कंपनी की जिम्मेदारी नहीं हो सकती। अगर दूसरे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भी समान सुरक्षा उपाय लागू करते हैं, तभी इन बदलावों का वास्तविक असर दिखाई देगा।
भारत के लिए क्यों अहम है यह मामला?
अमेरिका में हुआ यह समझौता भारत में सीधे तौर पर लागू नहीं होगा। लेकिन इसका असर वैश्विक स्तर पर टेक कंपनियों की नीतियों पर पड़ सकता है। भारत में भी बच्चों के डेटा और ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर नियम मौजूद हैं। ऐसे में आगे उम्र की पहचान, पैरेंटल कंट्रोल और बच्चों के स्क्रीन टाइम को लेकर टेक कंपनियों पर ज्यादा जिम्मेदारी तय करने की मांग बढ़ सकती है।



















