PU Special :कैलारस शकर कारखाने के संचालन पर सरकार और किसान संघ में नहीं बनी सहमति, सहकारी समिति से संचालन की मांग पर अड़े किसान

विजय एस. गौर, भोपाल। करीब 13 साल से बंद कैलारस शकर कारखाने को दोबारा शुरू करने की मांग लंबे समय से उठ रही है। भारतीय किसान संघ कारखाने का संचालन ठेके के बजाय सहकारिता के माध्यम से कराने की मांग कर रहा है। 21 अगस्त 2026 को कारखाने के संचालन के लिए ईओआई जारी किया गया है, जिसमें 30 साल की लीज का प्रावधान है। संघ के अनुसार, कारखाने की निजी भूमि का मूल्यांकन करीब 438.40 करोड़ रुपए है और सहकारी मॉडल के तहत संचालन की मांग की जा रही है। भारतीय किसान संघ ने सरकार से एमएसएमई को किया गया आवंटन और टेंडर निरस्त कर कारखाना सहकारी क्षेत्र को सौंपने की मांग की है।
13 साल से बंद है कैलारस शकर कारखाना
करीब 13 साल से बंद कैलारस शकर कारखाने को दोबारा शुरू करने की मांग लंबे समय से उठ रही है। इसी क्रम में 17 जुलाई 2026 को भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष के. साई रेड्डी के नेतृत्व में किसानों ने सरकार के समक्ष कारखाने का संचालन सहकारी समिति के माध्यम से कराने की मांग रखी थी। लेकिन कारखाना एमएसएमई को सौंपे जाने और करीब 61 करोड़ रुपए के संचालन संबंधी टेंडर जारी होने पर भारतीय किसान संघ ने इसका विरोध शुरू कर दिया। संघ का कहना है कि कारखाने का संचालन ठेके के बजाय सहकारिता के माध्यम से ही होना चाहिए।
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30 साल की लीज का ईओआई जारी
कैलारस शकर कारखाने के संचालन के लिए 21 अगस्त 2026 को एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) जारी किया गया है। आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 15 सितंबर है। ईओआई के अनुसार कारखाने की 12 हेक्टेयर जमीन, प्लांट, मशीनरी आदि को 30 साल की लीज पर दिए जाने का प्रावधान है। इसी प्रावधान को लेकर भारतीय किसान संघ की ओर से कारखाने के निजी संचालन और ठेके के मॉडल का विरोध किया जा रहा है।
5 हजार करोड़ की सहायता का प्रस्ताव
भारतीय किसान संघ का कहना है कि कारखाने की निजी भूमि का मूल्यांकन करीब 438.40 करोड़ रुपए है। संघ के अनुसार, नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्री की ओर से एनसीडीसी से 5 हजार करोड़ रुपए की सहायता लेकर ग्वालियर-चंबल संभाग में 20 से अधिक शकर कारखाने स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा गया था। किसान संघ इसी सहकारी मॉडल के आधार पर कैलारस कारखाने को चलाने की मांग कर रहा है। संघ का कहना है कि कारखाने का संचालन सहकारी समिति के माध्यम से होने से किसानों को इसका लाभ मिल सकेगा।
डबरा शकर कारखाने का दिया उदाहरण
किसानों ने कैलारस शकर कारखाने के निजी संचालन के विरोध में डबरा शकर कारखाने का उदाहरण दिया है। 1940 में दि ग्वालियर शुगर कंपनी की स्थापना हुई थी फैक्ट्री और गन्ने की खेती के लिए 7,575 एकड़ भूमि आवंटित की गई थी। यहां प्रतिदिन 1,200 टन शकर उत्पादन होता था और करीब 1.50 लाख किसानों और श्रमिकों को लाभ मिलने का दावा किया गया था। 1999 से उत्पादन में कमी और देनदारियां बढ़ीं और 2011-12 में उत्पादन बंद कर तालाबंदी हुई। किसानों का दावा है कि 75 एकड़ फैक्ट्री भूमि छोड़कर बाकी भूमि पर कब्जे की स्थिति बन गई।
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सरकार से आवंटन और टेंडर निरस्त करने की मांग
भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष के. साई रेड्डी ने कहा कि कैलारस शकर कारखाने के टेंडर का विरोध इसलिए किया जा रहा है क्योंकि मुख्यमंत्री ने भरोसा दिया था कि शकर कारखाने का संचालन किसानों की सहकारी समिति करेगी। इसके बावजूद कारखाना एमएसएमई को सौंप दिया गया। उन्होंने कहा कि सरकार तत्काल एमएसएमई को किया गया आवंटन और टेंडर निरस्त कर कारखाना सहकारी क्षेत्र को सौंपे। अब किसानों की मांग इसी सहकारी मॉडल के आधार पर कारखाने का संचालन कराने की है।




















