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नई स्कोरिंग का डर...कहीं बैडमिंटन अपना मूल स्वभाव ही न खो दे:कोच रश्मि

बैडमिंटन में नया 3×15 स्कोरिंग सिस्टम लागू होने से पहले ही बहस तेज हो गई है। भोपाल की कोच रश्मि मालवीय ने कहा कि कहीं इस बदलाव में खेल अपनी असली पहचान ही न खो दे। वहीं Badminton World Federation इसे खेल को तेज और ज्यादा रोमांचक बनाने वाला कदम बता रहा है-अब सवाल है, फायदा ज्यादा होगा या नुकसान?
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कोच रश्मि

बैडमिंटन में बड़ा बदलाव होने वाला है, लेकिन लागू होने से पहले ही इस पर बहस शुरू हो गई है। Badminton World Federation (बीडब्ल्यूएफ) ने 3×15 स्कोरिंग सिस्टम को मंजूरी दे दी है, जिसे 4 जनवरी 2027 से लागू करने की तैयारी है। इस ऐलान के बाद कई खिलाड़ी और कोच इस फैसले पर सवाल उठा रहे हैं। भोपाल के टीटी नगर स्टेडियम में बैडमिंटन अकादमी की मुख्य कोच रश्मि मालवीय ने इस बदलाव को लेकर कहा कि बदलाव जरूरी है, लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए जिससे खेल की असली पहचान ही बदल जाए।

'बैडमिंटन की असली ताकत उसकी सादगी में है'

रश्मि मालवीय का मानना है कि बैडमिंटन की सबसे बड़ी खूबी उसकी सादगी और वास्तविकता है। उनके अनुसार, यह खेल तेजी से लोकप्रिय इसलिए हो रहा है क्योंकि इसमें दिखावा नहीं, बल्कि असली खेल नजर आता है। इसमें खिलाड़ी की फिटनेस, कौशल, लचीलापन और मानसिक मजबूती साफ दिखाई देती है। वह कहती हैं कि मौजूदा 3×21 स्कोरिंग सिस्टम खेल के हर पहलू को संतुलित तरीके से सामने लाता है। उन्होंने कहा कि बैडमिंटन खेल हर दृष्टि से परिपूर्ण खेल है क्योंकि इसमें सरलता, सहजता, सर्तकता, समझ और रणनीति जैसे वह सभी गुण मौजूद है जो कि किसी खेल को परिपूर्ण किया करते है।

नई स्कोरिंग से बदल सकता है खेल का स्वभाव

कोच रश्मि मालवीय का मानना है कि 3×15 का नया फॉर्मेट खेल को पूरी तरह बदल सकता है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव मैच को छोटा और तेज जरूर करेगा, लेकिन इससे खेल का मूल स्वरूप प्रभावित हो सकता है। कहीं ऐसा न हो कि बैडमिंटन भी सिर्फ नाटकीयता तक सीमित होकर रह जाए। उन्होंने आगे कहा कि बदलाव को स्वीकार करना चाहिए, लेकिन ऐसा बदलाव जो खेल के अस्तित्व को ही प्रभावित कर दे। डर है कि यह नई स्कोरिंग प्रणाली बैडमिंटन का स्वभाव ही न बदल दे।

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खिलाड़ियों पर बढ़ेगा दबाव और चोट का खतरा

नई स्कोरिंग प्रणाली को लेकर एक बड़ी चिंता खिलाड़ियों की फिटनेस और चोट से भी जुड़ी है। रश्मि मालवीय के अनुसार, छोटे फॉर्मेट में शुरुआत से ही दबाव ज्यादा रहेगा। उन्होंने कहा कि इस फॉर्मेट का मकसद मैचों में शुरू में ही ज्यादा दबाव वाले पल लाकर, स्कोर को और ज्यादा करीबी और मैच के अंत को और ज्यादा नाटकीय बनाना है, जिससे प्रशंसक पहली रैली से लेकर आखिरी रैली तक खेल से जुड़े रहें। यह खिलाड़ियों के लिए थकाऊ साबित हो और खिलाड़ी ज्यादा इंजर्ड होंगे। हांलाकि नई स्कोरिंग अभी एक ट्रायल 2027 से लागू होगी। इस पर बीडब्ल्यूएफ द्वारा अभी और काम होगा बदलाव भी किए जाएंगे। जो कि बहुत जरुरी भी हैं।

बदलाव के पीछे व्यावसायिक सोच?

नई स्कोरिंग प्रणाली को लेकर यह भी चर्चा है कि इसके पीछे व्यावसायिक कारण हैं। खेल को छोटा और तेज बनाकर ज्यादा दर्शकों को जोड़ने की कोशिश की जा रही है। क्रिकेट में टी-20 फॉर्मेट और लीग मॉडल की सफलता के बाद दूसरे खेल भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। रश्मि मालवीय ने इस पर कहा कि खेलों में व्यवसाय बढ़ना अच्छी बात है, लेकिन अगर इससे खेल की मूल भावना प्रभावित होती है तो यह चिंता का विषय है। यह किसी के लिए अवसर हो सकता है, तो किसी के लिए नुकसान भी।

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शटलकॉक की लागत भी बनी वजह

बैडमिंटन में इस्तेमाल होने वाली शटलकॉक एक खास तरह की होती है, जो हंस के 16 पंखों से बनाई जाती है। इसकी कीमत पिछले साल के मुकाबले करीब 200% तक बढ़ गई है और पंख भी अब कम मिल रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ी इसी शटलकॉक का इस्तेमाल करते हैं, जबकि स्कूल और क्लब में आमतौर पर नायलॉन या प्लास्टिक की शटलकॉक इस्तेमाल होती है।

पुराना सिस्टम 20 साल से था लागू

मौजूदा 3×21 स्कोरिंग सिस्टम 2006 में लागू किया गया था और पिछले करीब 20 साल से यही फॉर्मेट चल रहा है। इसमें मैच तीन गेम के आधार पर खेले जाते हैं और हर गेम 21 अंकों का होता है। जीत के लिए दो अंकों की बढ़त जरूरी होती है। नई 3×15 प्रणाली में भी मैच तीन गेम के आधार पर ही होंगे, लेकिन हर गेम सिर्फ 15 अंकों का होगा। यानी मैच का समय कम होगा और शुरुआत से ही मुकाबला ज्यादा तेज हो जाएगा।

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ट्रायल के बाद ही तय होगा भविष्य

फिलहाल BWF इस नई स्कोरिंग प्रणाली को 2027 से ट्रायल के तौर पर लागू करेगा। इसके बाद इस पर और काम किया जाएगा और जरूरत के मुताबिक बदलाव भी किए जा सकते हैं।

Sona Rajput
By Sona Rajput

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...Read More

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