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इंदौर बना ग्रीन एनर्जी का मॉडल:200 एकड़ में फैला 300 करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट

जलूद में तैयार 60 मेगावाट सोलर प्लांट से अब नर्मदा जल सप्लाई के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग होगा। इससे हर महीने करोड़ों रुपये की बचत होगी, बिजली खर्च कम होगा और इंदौर में पानी सप्लाई व्यवस्था अधिक सुचारु, किफायती और भरोसेमंद बन सकेगी।
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200 एकड़ में फैला 300 करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट

इंदौर - जलूद में करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से तैयार 60 मेगावाट क्षमता वाला सोलर प्लांट अब पूरी तरह बनकर तैयार हो चुका है। इस प्लांट का लोकार्पण 29 अप्रैल को मुख्यमंत्री द्वारा किया जाएगा। यह परियोजना इंदौर से लगभग 70 किलोमीटर दूर स्थित जलूद में बनाई गई है और इसे शहर की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है।

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नर्मदा नदी का पानी इंदौर तक पहुंचाने के लिए सौर ऊर्जा

इस सोलर प्लांट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब नर्मदा नदी का पानी इंदौर तक पहुंचाने के लिए सौर ऊर्जा (सूरज की रोशनी से बनी बिजली) का उपयोग किया जाएगा। अभी तक इस काम के लिए बड़ी मात्रा में बिजली खर्च होती थी, जिससे नगर निगम पर हर महीने भारी आर्थिक बोझ पड़ता था। लेकिन अब इस नई व्यवस्था से हर महीने करीब 5 करोड़ रुपये तक की बचत होने का अनुमान है।

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बड़ा सोलर प्रोजेक्ट तैयार

इंदौर देश का पहला ऐसा नगर निगम बन गया है जिसने ग्रीन बॉन्ड के माध्यम से 244 करोड़ रुपये जुटाकर इस तरह का बड़ा सोलर प्रोजेक्ट तैयार किया है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव के अनुसार, इस पहल से न केवल बिजली का खर्च कम होगा बल्कि शहर में पानी सप्लाई जैसी जरूरी सेवाएं भी अधिक स्थिर और भरोसेमंद बनेंगी। इस प्रोजेक्ट का असर अभी से दिखने लगा है। मार्च महीने में ही पंपिंग स्टेशन के बिजली खर्च में लगभग 3.64 करोड़ रुपये की बचत दर्ज की गई है। आने वाले समय में यह बचत और बढ़ने की संभावना है। नगर निगम का अनुमान है कि करीब 9 से 10 साल में इस प्रोजेक्ट पर लगी पूरी लागत की भरपाई हो जाएगी।

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आधुनिक सोलर पैनल

करीब 200 एकड़ क्षेत्र में फैले इस सोलर पार्क में आधुनिक सोलर पैनल लगाए गए हैं। इसे सात अलग-अलग हिस्सों में विकसित किया गया है, ताकि बिजली उत्पादन और वितरण बेहतर तरीके से हो सके। यहां से बनने वाली बिजली को ग्रिड तक पहुंचाने के लिए जरूरी ट्रांसमिशन लाइन और 132 केवी सब-स्टेशन भी तैयार किया जा चुका है। सभी तकनीकी परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं। फिलहाल नगर निगम को हर महीने लगभग 20 से 30 करोड़ रुपये तक बिजली बिल चुकाना पड़ता है, जिसमें सबसे ज्यादा खर्च पानी सप्लाई और पंपिंग सिस्टम में होता है। ऐसे में यह सोलर प्लांट आने वाले समय में शहर के लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद साबित होगा।

Hemant Nagle
By Hemant Nagle

हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...Read More

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