इंदौर से चला मासूमों का काला सौदा! 40 हजार में तय होती थी जिंदगी, तस्करी रैकेट का सनसनीखेज पर्दाफाश

श्योपुर से इंदौर तक फैले मासूमों की तस्करी के इस खौफनाक खेल ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। हाईवे पर लावारिस हालत में मिली एक मासूम बच्ची के पीछे जो साजिश उजागर हुई है, वह किसी संगठित अपराध से कम नहीं। इस सनसनीखेज मामले में गिरफ्तार आरोपी दंपती नीता जैन और वैभव जैन से पूछताछ के बाद पुलिस ने इंदौर से एक और बच्ची को उनके गिरोह के चंगुल से छुड़ाया है। बताया जा रहा है कि इस मासूम को महज 40 हजार रुपये में खरीदा गया था और इसे आगे बेचने की साजिश रची जा रही थी।
और पढ़ें: इंदौर में किडनैपिंग का मास्टर प्लान: अमीर परिवार के बच्चे थे टारगेट, मासूम बने शिकार
महालक्ष्मी नगर में पुलिस की दबिश
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह नवजात और छोटी बच्चियों को खरीद-फरोख्त के जरिए ठिकाने लगाने का संगठित नेटवर्क चला रहा था। इंदौर के महालक्ष्मी नगर में पुलिस की दबिश के दौरान जब इस काले कारोबार का एक और ठिकाना बेनकाब हुआ, तो वहां से एक बच्ची को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। यह खुलासा अपने आप में चौंकाने वाला है कि मासूमों की जिंदगी को बाजार की वस्तु बनाकर खुलेआम सौदेबाजी की जा रही थी।
और पढ़ें: सीपी की फटकार के बाद देर रात कार्रवाई- टीआई पर गंभीर आरोप,“नशा माफिया को संरक्षण” का आरोप
पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ
इस पूरे कांड में शामिल आरोपियों के खिलाफ शिकंजा कसते हुए पुलिस ने खरीददारों को भी नहीं बख्शा। राजगढ़ निवासी आकाश मूंदड़ा और उसकी पत्नी कृतिका को कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए जेल भेज दिया है। दोनों को 11 मई तक न्यायिक हिरासत में रखा जाएगा। वहीं मुख्य साजिशकर्ता नीता जैन, उसका पति वैभव जैन और उनकी सहयोगी हेमलता व मनीषा को पुलिस रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ की जा रही है, ताकि इस नेटवर्क की जड़ तक पहुंचा जा सके।
बच्ची को 40 हजार रुपये में खरीदा
पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया है कि उन्होंने एक और बच्ची को 40 हजार रुपये में खरीदा था। यह खुलासा इस बात का संकेत है कि यह कोई एकल घटना नहीं, बल्कि एक बड़े रैकेट का हिस्सा है, जिसमें कई जिलों तक फैला गिरोह सक्रिय है। पुलिस अब इंदौर, धार और खरगोन में लगातार छापेमारी और जांच कर रही है।
मासूम बच्चियां कहां से लाई
हालांकि पुलिस ने इस मामले में अब तक छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल अभी भी बरकरार है। आखिर ये मासूम बच्चियां कहां से लाई जा रही थीं? इनके असली माता-पिता कौन हैं? इस रहस्य से पर्दा उठाने के लिए पुलिस ने डीएनए जांच का सहारा लिया है। आरोपी आकाश और उसकी पत्नी कृतिका के ब्लड सैंपल लिए गए हैं, जबकि बच्ची का डीएनए परीक्षण मुरैना के शिशु गृह में कराया जा रहा है।












