Naresh Bhagoria
18 Jan 2026
मणिकर्णिका घाट पर चल रहे सौंदर्यीकरण और पुनर्विकास के काम को लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें वायरल हुईं। इन तस्वीरों में घाट पर मंदिरों की प्रतिमाएं खुले में बिखरी हुई दिखाई दीं। यह तस्वीरें लोगों के लिए चिंता का विषय बनीं क्योंकि इन मंदिरों का निर्माण अहिल्याबाई होलकर ने कराया था और इन्हें धार्मिक व ऐतिहासिक महत्व माना जाता है।
वायरल तस्वीरों को लेकर प्रशासन ने AI जनरेटेड और भ्रामक सूचना फैलाने के आरोप में 8 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की। थाना चौक में दर्ज FIR में BNS की धारा 196, 298, 299 और 353 के तहत कार्रवाई की गई। इनमें उन लोगों के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया जो पोस्ट को रीट्वीट या आपत्तिजनक टिप्पणी कर रहे थे।
विवाद बढ़ने पर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने यूपी सरकार पर हमला बोला और कहा कि विकास के नाम पर काशी की प्राचीन धार्मिक धरोहर को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
वहीं, सरकार और प्रशासन का कहना है कि यह एक विकास विरोधी अफवाह है और कुछ लोग जानबूझकर सोशल मीडिया पर भ्रामक तस्वीरें फैलाकर काशी की छवि को खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने मणिकर्णिका घाट पर बुलडोजर चलाए जाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि सदियों पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को नुकसान पहुंचाना गलत है। उन्होंने यह भी कहा कि मणिकर्णिका घाट से अहिल्याबाई होल्कर की स्मृतियां जुड़ी हैं और यह घाट बहुत महत्वपूर्ण है।
विवाद बढ़ते देख मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को खुद वाराणसी पहुंचे और कहा कि यह मामला भ्रामक तस्वीरों और अफवाहों का है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग काशी की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विकास कार्य पर झूठी खबरें फैलाई जा रही हैं।
सरकार ने मणिकर्णिका घाट को नए सिरे से बनाने का फैसला किया है। इसके तहत घाट के प्लेटफार्म को काफी बड़ा किया जाएगा ताकि एक साथ कई अंतिम संस्कारों को विश्व स्तरीय सुविधाओं के साथ अंजाम दिया जा सके। प्रोजेक्ट की तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि कायाकल्प के बाद यह घाट किस तरह से दिखाई देगा अब यह सिर्फ एक घाट नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित और आधुनिक ढांचे वाला धार्मिक स्थल बनेगा।

इस परियोजना के लिए सरकार ने 35 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की है। यह राशि घाट के ढांचे, सुविधाओं और सौंदर्यीकरण पर खर्च की जाएगी ताकि यह स्थल और अधिक सुव्यवस्थित और साफ-सुथरा बन सके।
फिलहाल मणिकर्णिका घाट तक पहुंचने के लिए लोगों को तंग गलियों से होकर गुजरना पड़ता है।
घाट पर दाह संस्कार की मूलभूत सुविधाएं भी बहुत जर्जर और गंदगी से भरी हुई थीं। लेकिन अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काशी कॉरिडोर के साथ जुड़े मणिकर्णिका घाट के कायाकल्प को अपने विजन काशी के हिस्से के रूप में शामिल किया था।
मणिकर्णिका घाट की खास बात यह है कि यहां 24 घंटे, 365 दिन चिता की आग कभी नहीं बुझती। यहां जलने वाली चिताओं की भस्म काशी कॉरिडोर तक पहुंचती है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं। अब जब कॉरिडोर सीधे मणिकर्णिका घाट से सटा हुआ है, तो यह जगह और भी अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे में घाट के कायाकल्प की जरूरत पहले से भी ज्यादा महसूस की जा रही थी।
मणिकर्णिका घाट विवाद अब पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है। कई राजनीतिक दल इसे मंदिर तोड़ने का मुद्दा बता रहे हैं, जबकि सरकार इसे फेक न्यूज और अफवाह फैलाने वाला मामला बता रही है।