महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के एक बयान के बाद राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। उनके बयान में छत्रपति शिवाजी महाराज और टीपू सुल्तान को एक ही स्तर पर रखने की बात कही गई, जिसे लेकर कई संगठनों और राजनीतिक दलों ने आपत्ति जताई है।सपकाल का कहना था कि टीपू सुल्तान को केवल एक ऐतिहासिक शासक नहीं, बल्कि एक बहादुर योद्धा और देश की धरती से जुड़ा व्यक्तित्व माना जाना चाहिए। उनके अनुसार, टीपू सुल्तान की सोच कट्टरता से दूर थी और उन्होंने राष्ट्र के हित में संघर्ष किया।
उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा किए गए संदेश में लिखा कि छत्रपति शिवाजी महाराज की वीरता की मिसाल इतिहास में अद्वितीय है। वहीं टीपू सुल्तान को उन्होंने साहसी योद्धा और स्वराज्य के प्रति समर्पित बताया। पोस्ट में यह भी कहा गया कि शिवाजी महाराज के आदर्शों से प्रेरणा लेकर ही टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया।
सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कांग्रेस अध्यक्ष के बयान की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि हम इय बयान की निंदा करते हैं, छात्रपति शिवाजी महाराज वो शख्स थे जिन्होंने मुगलों के साथ लड़ाई कर स्वराज्य की स्थापना की थी। लेकिन टीपू सुल्तान ने हजारों हिंदुओं की हत्या की थी। वोटों के लालच में कांग्रेस जितने भी जूते चाटे महाराष्ट्र और देश इसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगा
यह बयान 14 फरवरी को बुलढाणा में हुए एक स्थानीय विवाद की पृष्ठभूमि में आई थी। दरअसल, मालेगांव नगर निगम के डिप्टी मेयर निहाल अहमद के कार्यालय से टीपू सुल्तान की तस्वीर हटाए जाने पर विवाद पैदा हुआ था। उसी मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए सपकाल ने यह बयान दिया, लेकिन इसके बाद मामला स्थानीय स्तर से निकलकर प्रदेशव्यापी राजनीतिक बहस में बदल गया।
बयान सामने आते ही विपक्षी दलों ने कांग्रेस पर निशाना साधा, जबकि शिवाजी महाराज से जुड़ी भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाते हुए कई सामाजिक संगठनों ने भी विरोध दर्ज कराया है।