सावन की पहली सवारी :मनमहेश स्वरूप के दर्शन देंगे बाबा महाकाल, पांच ड्रोन और 1200 पुलिसकर्मियों के साए में निकलेगी पालकी

उज्जैन। श्रावण मास के पहले सोमवार पर धर्मनगरी उज्जैन सोमवार शाम शिवमय हो जाएगी। भगवान महाकाल अपनी पहली पारंपरिक सवारी में रजत पालकी पर विराजमान होकर मनमहेश स्वरूप में नगर भ्रमण करेंगे। शाम 4 बजे श्री महाकालेश्वर मंदिर से शुरू होने वाली इस सवारी में लाखों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। पूरे सवारी मार्ग पर 1200 पुलिसकर्मियों, 5 ड्रोन, 500 से ज्यादा वॉलेंटियर्स और सीसीटीवी कैमरों के जरिए निगरानी रखी जाएगी।
राजवैभव के साथ नगर भ्रमण पर निकलेंगे बाबा महाकाल
परंपरा के अनुसार भगवान महाकाल विधि-विधान से पूजन-अर्चन के बाद रजत पालकी में सवार होकर अपनी प्रजा का हाल जानने नगर भ्रमण पर निकलेंगे। रामघाट पहुंचकर शिप्रा जल से भगवान का अभिषेक किया जाएगा। इसके बाद पालकी निर्धारित मार्ग से होते हुए शाम करीब 7 बजे महाकाल मंदिर लौटेगी। श्रावण मास की पहली सवारी में देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। प्रशासन ने भीड़ को देखते हुए यातायात और सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए हैं।
1200 पुलिसकर्मी, 5 ड्रोन और CCTV से होगी निगरानी
सवारी को लेकर पुलिस और प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। पूरे मार्ग पर करीब 1200 पुलिस अधिकारी और जवान तैनात रहेंगे। श्रद्धालुओं की सुविधा और भीड़ नियंत्रण के लिए 500 से ज्यादा वॉलेंटियर्स भी सहयोग करेंगे। सवारी की निगरानी 5 ड्रोन कैमरों, सीसीटीवी कैमरों और मार्ग पर स्थित ऊंची इमारतों से की जाएगी। कई स्थानों पर पुलिसकर्मी दूरबीन के जरिए भीड़ की गतिविधियों पर नजर रखेंगे।
सवारी मार्ग को धार्मिक रंग में सजाया गया
नगर निगम ने सवारी मार्ग के सौंदर्यीकरण का काम पूरा कर लिया है। निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा के निर्देश पर हरसिद्धि पाल से रामघाट और सत्यनारायण मंदिर से छत्री चौक तक मार्ग का चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण किया गया है। रामानुजकोट से रामघाट तक प्रभावित भवनों पर ग्रीन नेट लगाई गई है। वहीं रिटेनिंग वॉल और दीवारों पर सिंहस्थ महापर्व, साधु-संतों और धार्मिक स्थलों पर आधारित आकर्षक वॉल पेंटिंग बनाई गई हैं, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगी।
इस मार्ग से निकलेगी पहली सवारी
भगवान महाकाल की पालकी श्री महाकालेश्वर मंदिर के सभा मंडप से निकलकर महाकाल चौराहा, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाड़ी होते हुए रामघाट पहुंचेगी। यहां शिप्रा तट पर पूजन-अर्चन के बाद सवारी रामानुजकोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, खाती समाज मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौक, छत्री चौक, गोपाल मंदिर और पटनी बाजार से होकर पुनः महाकाल मंदिर पहुंचेगी।
हर सवारी की होगी अलग थीम
इस वर्ष श्रावण मास की प्रत्येक सवारी को अलग विषय पर आधारित रखा गया है। पहली सवारी वैदिक उद्बोधन पर केंद्रित होगी। दूसरी सवारी में लोक नृत्य दल प्रस्तुति देंगे। तीसरी सवारी में पुलिस, सेना, होमगार्ड और विभिन्न बैंड शामिल होंगे। चौथी सवारी का विषय पर्यावरण संरक्षण रहेगा, जबकि पांचवीं सवारी में 84 महादेव की झांकियां निकाली जाएंगी। अंतिम राजसी सवारी में सिंहस्थ-2028 की झांकी और ड्रोन से पुष्प वर्षा विशेष आकर्षण होगी।
ओंकारेश्वर मंदिर में भी बदली दर्शन व्यवस्था
श्रावण मास में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में भी लगभग 100 वर्ष बाद दर्शन व्यवस्था में बदलाव किया गया है। अब श्रद्धालु गर्भगृह के सामने लगभग 10 फीट की दूरी से स्पष्ट दर्शन कर सकेंगे। वीआईपी श्रद्धालुओं का प्रवेश नंदी गेट से और निकास लकड़ी द्वार से होगा। सामान्य श्रद्धालुओं का प्रवेश कोटितीर्थ घाट से रहेगा। मंदिर प्रशासन का दावा है कि नई व्यवस्था के बाद श्रद्धालु लगभग सवा घंटे में दर्शन कर सकेंगे।
क्या बोले कलेक्टर और एसपी ?
उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने कहा कि बाबा महाकाल की सावन मास की पहली सवारी निकाली जाएगी, जिसमें सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। बाहर से आने वाले श्रद्धालु सवारी मार्ग पर आसानी से पालकी के दर्शन कर सकें, इसका विशेष ध्यान रखा गया है। वहीं, उज्जैन एसपी प्रदीप शर्मा ने कहा कि सवारी मार्ग पर 1200 पुलिस अधिकारी और जवान तैनात रहेंगे। ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी से लगातार निगरानी की जाएगी। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए सभी आवश्यक इंतजाम किए गए हैं।












