Naresh Bhagoria
5 Feb 2026
उज्जैन। श्रावण मास के दूसरे सोमवार को उज्जैन में भगवान श्री महाकालेश्वर की विशेष शाही सवारी निकाली जाएगी। इस बार भगवान चंद्रमौलेश्वर रजत पालकी में विराजमान होंगे, जबकि मनमहेश स्वरूप में हाथी पर नगर भ्रमण पर निकलेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंदिर पहुंचकर भगवान का पूजन-अर्चन करेंगे और सवारी में भाग भी ले सकते हैं।
सवारी की शुरुआत आज शाम 4 बजे मंदिर के सभामंडप में पूजन से होगी। इसके बाद मंदिर के मुख्य द्वार पर सशस्त्र पुलिस बल पालकी को सलामी देगा। सवारी महाकाल चौराहा, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाड़ी होते हुए रामघाट पहुंचेगी, जहां शिप्रा नदी के पवित्र जल से भगवान महाकाल का अभिषेक किया जाएगा। वापसी में यह सवारी रामानुजकोट, मोढ़ी धर्मशाला और कार्तिक चौक होते हुए वापस मंदिर लौटेगी।
इस वर्ष महाकाल की सवारी की थीम ‘लोकनृत्य’ पर आधारित है। रामघाट पर देश के विभिन्न राज्यों के पारंपरिक नृत्यों की आकर्षक प्रस्तुतियां होंगी। इसमें मध्य प्रदेश का मटकी नृत्य, राजस्थान का गणगौर, असम का बिहू, गुजरात का भवाई और कर्नाटक का पुलियाट्टम नृत्य शामिल रहेंगे। यह प्रस्तुतियां न केवल धार्मिक माहौल को रंगीन बनाएंगी, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता की झलक भी पेश करेंगी। मंदिर प्रबंध समिति ने इन आयोजनों के लाइव प्रसारण की व्यवस्था फेसबुक और एलईडी स्क्रीनों के माध्यम से की है, जिससे दूर-दराज से आए श्रद्धालु भी दर्शन कर सकें।
श्रावण मास के पहले सोमवार को उज्जैन में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा था। लगभग 2.5 लाख श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल के दर्शन किए और प्रसिद्ध लड्डू प्रसाद प्राप्त किया। उस दिन मंदिर समिति द्वारा 54.48 क्विंटल लड्डू प्रसाद की बिक्री हुई, जिसकी अनुमानित कुल कीमत लगभग 26 लाख रुपए रही। यह प्रसाद श्रद्धालु श्रद्धा से अपने साथ देशभर और विदेश तक ले जाते हैं।
मंदिर समिति ने दूसरी सवारी के लिए तैयारियों को और अधिक बढ़ा दिया है। इस बार 80 क्विंटल लड्डू प्रसाद तैयार कराया गया है। महाकाल का लड्डू प्रसाद भक्तों में अत्यंत लोकप्रिय है और विशेष आयोजनों में इसकी मांग काफी बढ़ जाती है। समिति ने इस बार पहले से अतिरिक्त स्टॉक तैयार कराया है ताकि किसी भक्त को निराश न होना पड़े।
भगवान महाकालेश्वर की सवारियां पूरे श्रावण मास में हर सोमवार को निकलेंगी। द्वितीय सवारी 21 जुलाई, तृतीय सवारी 28 जुलाई, चतुर्थ सवारी 4 अगस्त, पंचम सवारी 11 अगस्त और अंतिम राजसी सवारी 18 अगस्त को निकाली जाएगी। हर सवारी में भगवान अलग-अलग स्वरूपों में नगर भ्रमण करेंगे, जैसे कि चंद्रमौलेश्वर, मनमहेश, शिव तांडव, उमा महेश और सप्तधान मुखारविंद के रूप में।
इन सवारियों में रजत पालकी, हाथी, गरुड़ रथ, नंदी रथ और होलकर स्टेट के रथ जैसे विशेष वाहनों का उपयोग होता है, जो इस आयोजन को और अधिक दिव्य और भव्य बना देते हैं। प्रत्येक सवारी अपने आप में एक उत्सव के समान होती है, जिसमें श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ती है।
श्रावण मास की पवित्रता को देखते हुए महाकाल मंदिर के पट हर सोमवार को तड़के 2:30 बजे ही खोल दिए जाएंगे। इसके बाद भगवान का विशेष पंचामृत पूजन, अभिषेक और भस्म आरती संपन्न की जाएगी। सप्ताह के बाकी दिनों में मंदिर के पट रात 3 बजे खोले जाएंगे। यह व्यवस्था भक्तों को अधिक समय तक दर्शन और पूजन की सुविधा देने के लिए की गई है।