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CG NEWS: महादेव घाट ओवरब्रिज परियोजना सालों से अटकी: ठेकेदार ने नहीं किया अनुबंध, अब री-टेंडर से होगी नई शुरुआत

18.66 करोड़ की परियोजना 6 माह पीछे खिसकी,मानसून के बीच निर्माण शुरू करने की चुनौती; रायपुर-अमलेश्वर के हजारों यात्रियों को मिलेगा जाम से राहत महादेव घाट ओवरब्रिज परियोजना को वर्ष 2024 में मंजूरी मिली थी। इसके बाद नवंबर 2025 में लोक निर्माण विभाग ने 18.66 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया। तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन के बाद विश्रामपुर की एग्रो स्टील वर्क कंपनी को दिसंबर 2025 में कार्य आवंटित किया गया
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महादेव घाट ओवरब्रिज परियोजना सालों से अटकी: ठेकेदार ने नहीं किया अनुबंध, अब री-टेंडर से होगी नई शुरुआत

RAIPUR NEWS। रायपुर और अमलेश्वर के बीच बढ़ते यातायात दबाव को कम करने के लिए प्रस्तावित महादेव घाट ओवरब्रिज परियोजना एक बार फिर चर्चा में है। 18.66 करोड़ रुपए की इस महत्वाकांक्षी परियोजना का काम ठेकेदार कंपनी द्वारा अनुबंध नहीं किए जाने के कारण रुक गया। अब लोक निर्माण विभाग (PWD) ने सुरक्षा जमा राशि जब्त कर री-टेंडर जारी किया है। नई एजेंसी के चयन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और अगले कुछ दिनों में निर्माण कार्य को लेकर बड़ा फैसला लिया जा सकता है।



मंजूरी के बाद भी नहीं शुरू हो पाया निर्माण



महादेव घाट ओवरब्रिज परियोजना को वर्ष 2024 में मंजूरी मिली थी। इसके बाद नवंबर 2025 में लोक निर्माण विभाग ने 18.66 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया। तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन के बाद विश्रामपुर की एग्रो स्टील वर्क कंपनी को दिसंबर 2025 में कार्य आवंटित किया गया और वर्क ऑर्डर भी जारी कर दिया गया।

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अनुबंध नहीं होने से परियोजना पर लगा ब्रेक



वर्क ऑर्डर मिलने के बावजूद संबंधित कंपनी ने विभाग के साथ औपचारिक अनुबंध नहीं किया। विभाग ने करीब चार माह तक इंतजार किया, लेकिन एजेंसी के प्रतिनिधि अनुबंध प्रक्रिया पूरी करने नहीं पहुंचे। इसके बाद अप्रैल 2026 में विभाग ने कंपनी की सुरक्षा जमा राशि जब्त कर दोबारा टेंडर जारी कर दिया।

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अब नई एजेंसी के चयन की प्रक्रिया अंतिम चरण में



पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के अनुसार नए टेंडर में चार कंपनियों ने भाग लिया है। तकनीकी जांच पूरी हो चुकी है और फिलहाल वित्तीय बोली की प्रक्रिया चल रही है। विभाग को उम्मीद है कि अगले 10 दिनों में नई एजेंसी का चयन कर कार्य आवंटन और अनुबंध की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।



परियोजना की प्रमुख विशेषताएं

कुल लागत: 18.66 करोड़ रुपए, लंबाई: 180 मीटर, चौड़ाई: 17 मीटर, फोरलेन स्टील ओवरब्रिज, निर्माण अवधि: 18 माह खारुन नदी पर निर्माण

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मानसून बना नई चुनौती



विभाग की योजना गर्मी के मौसम में खारुन नदी का जलस्तर कम होने का लाभ उठाकर नींव और संरचनात्मक कार्य शुरू करने की थी। लेकिन ठेकेदार के पीछे हटने से परियोजना मानसून तक खिंच गई। अब नदी के भीतर होने वाले निर्माण कार्यों की गति प्रभावित होने की संभावना है।



छह माह टेंडर प्रक्रिया में ही निकल गए



सूत्रों के अनुसार बड़ी परियोजनाओं में तकनीकी योग्यता, वित्तीय क्षमता और अनुभव की जांच में काफी समय लगता है। पहली बार एजेंसी चयन से लेकर वर्क ऑर्डर जारी होने तक कई माह लग गए। इसके बाद अनुबंध नहीं होने से पूरी प्रक्रिया फिर से दोहरानी पड़ी, जिससे परियोजना करीब नौ माह पीछे चली गई।

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जाम से राहत के लिए बनेगा फोरलेन ओवरब्रिज



महादेव घाट के पुराने पुल के समानांतर बनने वाला नया ओवरब्रिज रायपुर, अमलेश्वर, पाटन, दुर्ग और भिलाई के बीच यातायात को सुगम बनाएगा। पीडब्ल्यूडी के ट्रैफिक सर्वे के अनुसार शाम 4 बजे से रात 10 बजे तक इस मार्ग पर सबसे अधिक दबाव रहता है और रोजाना हजारों वाहन जाम में फंसते हैं।



अगले 30 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन



अधिकारियों के मुताबिक अमलेश्वर, पाटन रोड और आसपास के क्षेत्रों में तेजी से शहरी विस्तार हो रहा है। इसी को देखते हुए ओवरब्रिज का डिजाइन अगले 30 वर्षों की संभावित यातायात जरूरतों के अनुरूप तैयार किया गया है।

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किन क्षेत्रों को मिलेगा फायदा

महादेव घाट, चंगोराभाठा, डीडी नगर, संतोषी नगर, प्रोफेसर कॉलोनी, अमलेश्वर, अंजोरा, पाटन रोड क्षेत्र, दुर्ग-भिलाई से, रायपुर आने-जाने वाले यात्री, नवा रायपुर से जुड़े हजारों लोग



डिजाइन को लेकर आमने-सामने विभाग और एजेंसी



ठेका एजेंसी के प्रतिनिधि अजय अग्रवाल का दावा है कि प्रारंभिक ड्राइंग और डिजाइन में तकनीकी विसंगतियां थीं, जिसके कारण कंपनी ने अनुबंध नहीं किया। वहीं पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता एसके कोरी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि डिजाइन में कोई तकनीकी खामी नहीं थी, बल्कि बाद में इसे और अधिक व्यवस्थित तथा व्यावहारिक बनाया गया है। विभाग ने यह भी स्वीकार किया कि मूल डिजाइन में आर्च स्लैब की जगह अब टी-बीम आधारित संरचना को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे निर्माण प्रक्रिया अधिक सरल होगी।

Prem Nirmalkar
By Prem Nirmalkar
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