धान घोटाले की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने हाईकोर्ट ने दी मोहलत, जनहित याचिका पर अब 16 नवम्बर को सुनवाई

जबलपुर। प्रदेश के 28 जिलों में कथित तौर पर हुए धान घोटाले की विस्तृत जांच रिपोर्ट पेश करने मप्र हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 6 सप्ताह की मोहलत दी है। चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच ने कहा है कि जांच रिपोर्ट की एक कॉपी याचिकाकर्ता के वकील को भी दी जाए, ताकि वे अपना पक्ष रख सकें। मामले पर अगली सुनवाई 16 नवम्बर को होगी।यह जनहित याचिका नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष डॉ. पीजी नाजपाण्डे व धनीराम लखेरा की ओर से दायर की गई है। आवेदक का कहना है कि धान परिवहन और आपूर्ति के लिए ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) लगाने के स्पष्ट दिशा-निर्देश पहले से मौजूद थे, लेकिन बड़े पैमाने पर इन नियमों को दरकिनार कर घोटाला किया गया।
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43.03 करोड़ रुपए का धान परिवहन घोटाला सामने आया
जबलपुर कलेक्टर की कार्रवाई में 43.03 करोड़ रुपए का धान परिवहन घोटाला उजागर हुआ, जिसके बाद कई एफआईआर दर्ज हुईं और कई आरोपी जेल भी पहुंच चुके हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह घोटाला सिर्फ जबलपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य के अन्य जिलों में भी इसी तरह की अनियमितताएं होने की आशंका है। पूरे प्रदेश में हुए घोटाले की जांच सीबीआई या सीआईडी से कराए जाने की प्रार्थना करते हुए यह याचिका दाखिल की गई। हाईकोर्ट ने 14 अक्टूबर को इस याचिका पर नोटिस जारी किए थे।
सभी कलेक्टरों से मांगी थी रिपोर्ट
14 अगस्त को हाईकोर्ट ने सभी जिलों के कलेक्टरों को जांच रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे। मामले में बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय, राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता नीलेश यादव और ईओडब्ल्यू की ओर से अधिवक्ता पंकज दुबे हाजिर हुए।
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