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डिंडौरी में पेड़ों पर बोरर कीट ने मचाई तबाही, डेढ़ लाख पेड़ों की कटाई शुरू

डिंडौरी जिले में प्राकृतिक धरोहर कहे जाने वाले बेशकीमती साल के जंगलों पर साल बोरर कीट का घातक प्रकोप मंडरा रहा है। स्वस्थ पेड़ों को बचाने के लिए वन विभाग ने प्रभावित इलाकों में बड़े स्तर पर अभियान शुरू किया है।
डिंडौरी में पेड़ों पर बोरर कीट ने मचाई तबाही, डेढ़ लाख पेड़ों की कटाई शुरू
डिंडौरी में पेड़ों पर बोरर कीट ने मचाई तबाही

डिंडौरी। वन विभाग ने आठ संग्रहण केंद्रों पर ग्रामीणों द्वारा पकड़े गए करीब 19 लाख 50 हजार साल बोरर कीड़ों को लकड़ियों के बीच रखकर जला दिया है। अकेले करंजिया केंद्र पर 3.5 लाख कीड़े नष्ट किए गए। संक्रमण को रोकने के लिए प्रभावित करीब डेढ़ लाख पेड़ों की कटाई भी शुरू कर दी गई है। अमरकंटक और छत्तीसगढ़ सीमा से लगे कबीर वन परिक्षेत्र में पहले चरण में 4 हजार से अधिक पेड़ों को काटने का काम युद्धस्तर पर जारी है।

30 साल के प्राकृतिक चक्र के बाद फिर प्रकोप

30 साल के प्राकृतिक चक्र के तहत 1997-98 के बाद एक बार फिर साल बोरर का यह भीषण प्रकोप सामने आया है। इससे स्थानीय ग्रामीणों की आजीविका और वन पारिस्थितिकी पर गहरा संकट खड़ा हो गया है। साल के जंगलों में संक्रमण लगातार बढ़ने से स्वस्थ पेड़ों को बचाने की चुनौती भी वन विभाग के सामने है।

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आठ केंद्रों पर 19.50 लाख कीड़े नष्ट

साल बोरर के बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए वन विभाग ने आठ संग्रहण केंद्र बनाए हैं। इन केंद्रों पर ग्रामीणों द्वारा पकड़े गए करीब 19 लाख 50 हजार साल बोरर कीड़ों को लकड़ियों के बीच रखकर जला दिया गया। अकेले करंजिया केंद्र पर 3.5 लाख कीड़े नष्ट किए गए हैं।

डेढ़ लाख प्रभावित पेड़ों की कटाई शुरू

कीटों के बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए प्रभावित करीब डेढ़ लाख पेड़ों की कटाई भी शुरू कर दी गई है। अमरकंटक और छत्तीसगढ़ सीमा से लगे कबीर वन परिक्षेत्र में पहले चरण में 4 हजार से अधिक पेड़ों को काटने का काम युद्धस्तर पर जारी है। कुल्हाड़ी चलते ही खोखले हो चुके पेड़ों से लकड़ियों का बुरादा और बड़े कीट निकल रहे हैं।

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मानसून की पहली बारिश के साथ बढ़ता है संक्रमण

वन विभाग के मुताबिक, मानसून की पहली बारिश के साथ साल बोरर कीड़े स्वस्थ पेड़ों में अंडे देकर उन्हें अंदर से खोखला कर देते हैं। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए 10 जून से ऑपरेशन ट्रैप ट्री चलाकर कीड़ों को नष्ट किया गया है। पिछले दो सालों में प्रभावित पेड़ों की संख्या डेढ़ लाख तक पहुंच गई है।

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स्वस्थ जंगल को बचाने कटाई जरूरी

डीएफओ डिंडौरी अशोक कुमार सोलंकी ने बताया कि बाकी स्वस्थ जंगल को बचाने के लिए प्रभावित पेड़ों की वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत कटाई अनिवार्य हो गई है। उन्होंने कहा कि साल बोरर के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए कीड़ों को नष्ट करने के साथ प्रभावित पेड़ों की कटाई की जा रही है, ताकि स्वस्थ पेड़ों को बचाया जा सके। मानसून की पहली बारिश के साथ साल बोरर कीड़े स्वस्थ पेड़ों में अंडे देकर उन्हें अंदर से खोखला कर देते हैं। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए 10 जून से ऑपरेशन ट्रैप ट्री चलाकर कीड़ों को नष्ट किया गया है। पिछले दो सालों में प्रभावित पेड़ों की संख्या डेढ़ लाख तक पहुंच गई है। बाकी स्वस्थ जंगल को बचाने के लिए प्रभावित पेड़ों की वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत कटाई अनिवार्य हो गई है।

Sanjay Tiwari
By Sanjay Tiwari

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