
इंदौर। मध्य प्रदेश में खाद, बीज और कीटनाशक बेचने वाले व्यापारियों ने सोमवार को एक दिन की सांकेतिक हड़ताल कर अपनी नाराजगी जाहिर की। राज्यभर में कई जगह दुकानों के शटर बंद रहे, जिससे किसानों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इंदौर सहित कई जिलों में विक्रेताओं ने अपना कामकाज बंद रखकर सरकार तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की। उन्होंने प्रधानमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री के नाम कलेक्टर शिवम वर्मा को ज्ञापन सौंपा। व्यापारियों का कहना है कि फर्टिलाइजर कंपनियां लगातार मनमानी कर रही हैं और उनकी मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
27 अप्रैल को मध्य प्रदेश में फर्टिलाइजर, सीड और पेस्टिसाइड की ज्यादातर दुकानें बंद रहीं। यह हड़ताल एग्रो इनपुट डीलर्स एसोसिएशन के आह्वान पर की गई थी। इंदौर जिले में इसका असर सबसे ज्यादा देखने को मिला, जहां लगभग अधिकांश विक्रेताओं ने अपना कारोबाद बंद रखा।
इंदौर में बड़ी संख्या में व्यापारी कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन प्रधानमंत्री, केंद्रीय कृषि मंत्री और उर्वरक मंत्री के नाम दिया गया। कलेक्टर शिवम वर्मा को सौंपे गए इस ज्ञापन में व्यापारियों ने अपनी समस्याओं और मांगों को विस्तार से रखा।
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एग्रो इनपुट डीलर्स एसोसिएशन के इंदौर जिलाध्यक्ष और प्रदेश उपाध्यक्ष श्रीकृष्ण दुबे ने अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि हमारी दुकानों से अधिकारी जांच के नाम पर दवाओं के सैंपल लेते हैं, लेकिन कार्रवाई कंपनियों पर नहीं होती बल्कि हमें ही परेशान किया जाता है। उनके मुताबिक यह स्थिति लंबे समय से बनी हुई है और अब व्यापारियों का सब्र जवाब दे रहा है।
व्यापारियों ने फर्टिलाइजर कंपनियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कंपनियां सब्सिडी वाली खाद के साथ अन्य उत्पाद भी जबरन खरीदने के लिए दबाव बनाती हैं। उन्होंने मांग की है कि इस तरह की 'जबरन लिंकिंग' को तुरंत बंद किया जाए और इसे अपराध घोषित किया जाए, ताकि पूरे देश में इस पर रोक लग सके।
एक और बड़ी समस्या सप्लाई सिस्टम को लेकर सामने आई है। व्यापारियों का कहना है कि अभी खाद की डिलीवरी रेलहेड तक ही सीमित है, जिससे उन्हें अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है। उनके अनुसार, हर बैग पर करीब 50 रुपए तक का अतिरिक्त खर्च आ रहा है, जिसका असर सीधे किसानों पर भी पड़ता है।
इस हड़ताल का असर सिर्फ व्यापारियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि किसानों को भी परेशानी उठानी पड़ी। कई जगह किसान खाद और बीज लेने पहुंचे, लेकिन दुकानें बंद होने के कारण उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा।