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मध्य प्रदेश के सबसे बड़े नवरात्रि महोत्सव की तैयारी लगभग पूर्ण - 23 दिव्य रूपों में मां दुर्गा के होंगे दर्शन

1 करोड़ कुमकुम अर्चन, 1 करोड़ मंत्र जाप और 10 लाख हवन की होंगी आहुतियां
मध्य प्रदेश के सबसे बड़े नवरात्रि महोत्सव की तैयारी लगभग पूर्ण - 23 दिव्य रूपों में मां दुर्गा के होंगे दर्शन
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    इंदौर- मध्य प्रदेश के सबसे बड़े नवरात्रि महोत्सव की तैयारी लगभग पूर्ण होने को है। इसका आयोजन वीआईपी परस्पर नगर में किया जा रहा है। नवरात्रि के पावन अवसर पर भव्य और अद्वितीय धार्मिक आयोजन 22 सितम्बर से 2 अक्टूबर तक होगा। इस दिव्य आयोजन का मार्गदर्शन कृष्णगिरी पीठाधीश्वर, पूज्यपाद जगतगुरु श्री श्री 1008 आचार्य वसंत विजयानंद गिरिजी महाराज द्वारा किया जा रहा है। 25 एकड़ भूमि पर इस विशाल प्रांगण को तैयार किया गया है।

     25 हजार स्क्वायर फीट के भव्य -

     विशाल नवरात्रि महामहोत्सव' में 25 हजार स्क्वायर फीट के भव्य, दिव्य और अलौकिक पंडाल में मां दुर्गा के 23 दिव्य रूपों के दर्शन हो रहे हैं। यहां मां अपने परिवार के साथ विराजी हैं। इस भव्य अलौकिक और अध्यात्म से परिपूर्ण पंडाल को निहारने के लिए हर दिन सुबह से देर रात तक भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। भव्य मुख्य प्रवेश द्वार से अंदर आते ही पंडाल के प्रवेश द्वार पर मां लक्ष्मी के वाहन उल्लू नजर आ रहे है। ये पंडाल के प्रवेश द्वार को और भव्य बना रहे हैं। इस पंडाल में मां दुर्गा के दिव्य रूपों का दर्शन करने आने वाले भक्तों को पहले ही मां लक्ष्मी की समृद्धि की कृपा का आनंद मिलेगा और भक्त अपने परिवार के साथ मां के इन दिव्य रूपों का दर्शन कर सकेंगे।  इस दिव्य और अलौकिक पंडाल को इस तरह तैयार किया हुआ है मानो मां अपने दिव्य रूपों के साथ बादलों के बीच विराजी हों। बादलों से पानी को बूंदें जिस तरह शरीर पर छूती हैं उस तरह का एहसास ये पंडाल देगा ।  

    1 करोड़ कुमकुम अर्चन, 1 करोड़ मंत्र जाप:

    आयोजन में देवी भागवत कथा का भावपूर्ण पाठ एवं व्याख्यान होगा। 1 करोड़ कुमकुम अर्चन, 1 करोड़ मंत्र जाप और 10 लाख हवन आहुतियां होंगी। 11,000 स्वर्ण-लेपित अष्टलक्ष्मी कलशों को 1 करोड़ मंत्र जाप, 1 करोड़ कुमकुम अर्चन एवं 10 लाख आहुतियों से सिद्ध किया जाएगा। इन कलशों में महालक्ष्मी को आकर्षित करने के लिए विभिन्न थैलियों में दिव्य वस्तुएं रखी जा रही हैं, जिनमें दक्षिणावर्ती शंख, नव रत्न, 32 प्रकार के उपरत्न, 32 प्रकार के रत्न, दो दुर्लभ रुद्राक्ष, 999 शुद्धता वाला महालक्ष्मी मुद्रित 5 ग्राम का चांदी का सिक्का, पंचधातु (सोना, चांदी, तांबा, पीतल, कांसा), 154 प्रकार की दुर्लभ औषधियां सहित कुल 451 दिव्य सामग्रियां शामिल है। आयोजन में 30000 किलो शुद्ध मेवे एवं औषधियां, 20000 किलो पीले, सफ़ेद लाल चंदनादि पवित्र वृक्षों की समिधाएं, 7000 किलो देसी गाय का घी, खजूर, किशमिश, आँवला जैसे दिव्य फल और दुर्लभ जड़ी-बूटियाँ और अन्य दिव्य सामग्री उपयोग में लाई जाएगी, जो इसे अध्यात्म और भव्यता का अनुपम संगम बनाएगी।

    Hemant Nagle
    By Hemant Nagle

    हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...

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