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MP हाईकोर्ट सख्त: 10वीं की छात्रा को अंग्रेजी में सही जवाबों पर मिले जीरो अंक, परीक्षक से मांगा स्पष्टीकरण

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 10वीं की छात्रा गौरवी गर्ग की अंग्रेजी उत्तरपुस्तिका में मूल्यांकन की गड़बड़ी पर माशिमं से स्पष्टीकरण मांगा है। दो स्वतंत्र परीक्षकों ने 49 और 69 अंक देने की सिफारिश की। अगली सुनवाई 5 नवंबर को होगी।
MP हाईकोर्ट सख्त: 10वीं की छात्रा को अंग्रेजी में सही जवाबों पर मिले जीरो अंक, परीक्षक से मांगा स्पष्टीकरण
File Photo

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कक्षा 10वीं की एक छात्रा की अंग्रेजी विषय की उत्तरपुस्तिका के मूल्यांकन में कथित गड़बड़ी पर सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस मनिन्दर एस. भट्टी की एकलपीठ ने माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) को निर्देश दिया है कि छात्रा के सही उत्तरों पर शून्य अंक दिए जाने के मामले में संबंधित मूल्यांकनकर्ता से स्पष्टीकरण लेकर रिपोर्ट पेश की जाए। छात्रा की कॉपी की दो स्वतंत्र परीक्षकों से जांच कराने पर उसे क्रमशः 49 और 69 अंक देने की सिफारिश की गई थी। मामले की अगली सुनवाई 5 नवंबर को होगी।

सभी विषयों में डिस्टिंक्शन, अंग्रेजी में मिले थे सिर्फ 39 अंक

यह मामला जबलपुर जिले के सिहोरा में रहने वाली गौरवी गर्ग की याचिका से जुड़ा है। याचिका के अनुसार, गौरवी ने वर्ष 2023 में कक्षा 10वीं की परीक्षा दी थी। उसे सभी विषयों में डिस्टिंक्शन मिला, लेकिन अंग्रेजी विषय में केवल 39 अंक दिए गए। अंकों से असंतुष्ट होकर छात्रा ने पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया। हालांकि, इसके बाद भी अंकों में कोई बदलाव नहीं हुआ। बाद में उसने अपनी उत्तरपुस्तिका प्राप्त की, जिसमें कथित तौर पर सही उत्तर लिखे होने के बावजूद शून्य अंक दिए गए थे। इसके बाद छात्रा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

हाईकोर्ट के आदेश पर दो स्वतंत्र परीक्षकों ने जांची कॉपी

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने 8 अक्टूबर 2026 को छात्रा की अंग्रेजी विषय की उत्तरपुस्तिका का मूल्यांकन दो स्वतंत्र परीक्षकों से कराने का आदेश दिया था। दोनों परीक्षकों की रिपोर्ट में अंकों को लेकर बड़ा अंतर सामने आया। एक परीक्षक ने छात्रा को 49 अंक देने की सिफारिश की, जबकि दूसरे ने 69 अंक दिए जाने की अनुशंसा की। दोनों रिपोर्टों के आधार पर अदालत ने माना कि छात्रा को मूल रूप से दिए गए 39 अंकों से अधिक अंक मिलने चाहिए थे।

सही जवाब पर जीरो अंक देने पर कोर्ट ने जताई नाराजगी

दोनों स्वतंत्र परीक्षकों की रिपोर्ट देखने के बाद हाईकोर्ट ने मूल्यांकन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने टिप्पणी की कि सही उत्तरों के बावजूद शून्य अंक देना या तो घोर लापरवाही का मामला है या किसी बाहरी पूर्वाग्रह का परिणाम हो सकता है। इसी आधार पर अदालत ने माध्यमिक शिक्षा मंडल को संबंधित मूल्यांकनकर्ता से स्पष्टीकरण लेने और रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अब मूल्यांकनकर्ता के जवाब और मंडल की रिपोर्ट के आधार पर मामले में आगे सुनवाई होगी।

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5 नवंबर को होगी अगली सुनवाई

गौरवी गर्ग की ओर से अधिवक्ता पलाश कुमार तिवारी पैरवी कर रहे हैं। मामले की अगली सुनवाई 5 नवंबर को निर्धारित की गई है।

Sanjay Tiwari
By Sanjay Tiwari

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