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दमोह नगर पालिका अध्यक्ष मंजू राय को कारण बताओ नोटिस, बैठकों और निर्माण कार्यों पर उठे सवाल

दमोह नगर पालिका अध्यक्ष मंजू राय को नगरीय विकास विभाग ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। परिषद की बैठकों, कार्यवाही पुस्तिका और 5.94 लाख रुपये के छह निर्माण कार्यों की तकनीकी स्वीकृति व भुगतान में कथित अनियमितताओं पर 15 दिन में जवाब मांगा गया है।
दमोह नगर पालिका अध्यक्ष मंजू राय को कारण बताओ नोटिस, बैठकों और निर्माण कार्यों पर उठे सवाल
दमोह नगर पालिका अध्यक्ष मंजू राय को कारण बताओ नोटिस

दमोह। नगर पालिका परिषद दमोह की अध्यक्ष मंजू राय को मध्यप्रदेश शासन के नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया है। शासन ने परिषद की बैठकों के आयोजन, कार्यवाही पुस्तिका उपलब्ध कराने और निर्माण कार्यों की तकनीकी स्वीकृति व भुगतान से जुड़ी कथित अनियमितताओं पर स्पष्टीकरण मांगा है। 22 अक्टूबर 2026 को जारी सूचना पत्र में अध्यक्ष को इसे प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर अपना जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलने या स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाए जाने पर एकपक्षीय कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

चार साल में परिषद की केवल तीन बैठकें होने का उल्लेख

विभाग के सूचना पत्र के अनुसार, मंजू राय 5 अगस्त 2022 से नगर पालिका परिषद दमोह की अध्यक्ष हैं। उनके कार्यकाल से जुड़ी शिकायतों की जांच आयुक्त, नगरीय प्रशासन एवं विकास द्वारा गठित समिति से कराई गई थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन ने तीन प्रमुख बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है। पहले बिंदु में वर्ष 2022 से 2026 के दौरान परिषद की केवल तीन सम्मिलन बैठकें होने का उल्लेख है। इनमें 29 मार्च 2023, 14 अगस्त 2024 और 29 अप्रैल 2026 की बैठकें शामिल हैं। इसी अवधि में प्रेसिडेंट-इन-काउंसिल (पीआईसी) की केवल 12 बैठकों का उल्लेख किया गया है। शासन ने मध्यप्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1961 की धारा 54 का हवाला देते हुए कहा है कि संबंधित प्रावधानों के अनुसार परिषद और समितियों की बैठकें प्रत्येक दो माह में कम से कम एक बार आयोजित की जानी चाहिए। सूचना पत्र में दर्ज बैठकें इस आवश्यकता के अनुरूप नहीं बताई गई हैं।

कार्यवाही पुस्तिका नहीं मिलने पर भी मांगा जवाब

जांच समिति के प्रतिवेदन में परिषद और पीआईसी की बैठकों की कार्यवाही पुस्तिका उपलब्ध नहीं कराए जाने का मुद्दा भी उठाया गया है। सूचना पत्र के अनुसार, मुख्य नगर पालिका अधिकारी को 11 सितंबर 2026 को पत्र जारी कर दोपहर तीन बजे तक संबंधित अभिलेख उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, जांच समिति को अपेक्षित कार्यवाही पुस्तिका नहीं मिली। शासन ने मध्यप्रदेश नगर पालिका (मेयर-इन-काउंसिल/प्रेसिडेंट-इन-काउंसिल) के कामकाज के संचालन तथा अधिकारियों की शक्तियों एवं कर्तव्यों से संबंधित नियम, 1998 के नियम 16 का उल्लेख किया है। विभाग ने कार्यवाही पुस्तिका के संधारण और उपलब्धता को आवश्यक बताते हुए इस संबंध में अध्यक्ष से स्पष्टीकरण मांगा है।

छह निर्माण कार्यों में 5.94 लाख रुपये के भुगतान पर सवाल

कारण बताओ सूचना पत्र का तीसरा प्रमुख बिंदु नगर पालिका क्षेत्र के विभिन्न वार्डों में कच्चे मार्गों और नालियों पर मुरम-डस्ट डालने से संबंधित छह निर्माण कार्यों की तकनीकी स्वीकृति और भुगतान है। जांच समिति के प्रतिवेदन में इन छह कार्यों के लिए एक ही प्रोजेक्ट क्रमांक RD1-340-23-013 दर्ज होने का उल्लेख किया गया है। दस्तावेज के अनुसार इन कार्यों की कुल राशि 5 लाख 94 हजार 357 रुपये थी। संबंधित ठेकेदार फर्म मेसर्स ईशांत बिल्डकॉन कंस्ट्रक्शन, दमोह को जीएसटी सहित अन्य करों के साथ भुगतान किए जाने की बात भी दर्ज है। शासन के नोटिस में आरोप लगाया गया है कि एक ही प्रोजेक्ट क्रमांक के अंतर्गत अलग-अलग स्थानों पर छह कार्यों की तकनीकी स्वीकृतियां तैयार की गईं और उनके आधार पर देयक बनाकर भुगतान किया गया। जांच समिति ने मूल अभिलेखों की अनुपलब्धता, प्रोजेक्ट विवरण और कार्यों के बीच कथित विसंगतियों तथा भुगतान संबंधी दस्तावेजों में अंतर को संभावित अनियमितताओं के संकेत के रूप में दर्ज किया है। इन बिंदुओं पर अध्यक्ष का पक्ष और संबंधित मूल दस्तावेज सामने आने के बाद ही स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

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नगर पालिका अधिनियम की धारा 51 के तहत जवाबदेही का उल्लेख

विभाग ने मध्यप्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1961 की धारा 51 का उल्लेख करते हुए अध्यक्ष की जिम्मेदारियों की ओर ध्यान दिलाया है। सूचना पत्र के अनुसार, अध्यक्ष की जिम्मेदारियों में परिषद के कामकाज का संचालन, नियमों का पालन सुनिश्चित करना और प्रशासनिक कार्यों व अभिलेखों से संबंधित मामलों की निगरानी शामिल है। शासन ने नोटिस में उठाए गए बिंदुओं के संबंध में अध्यक्ष को प्रथम दृष्टया उत्तरदायी माना है और उनसे निर्धारित समय-सीमा में जवाब मांगा है। यदि जवाब प्राप्त नहीं होता या उसे संतोषजनक नहीं पाया जाता, तो विभाग ने एकपक्षीय कार्रवाई किए जाने की चेतावनी दी है।

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15 दिन में जवाब देना होगा, आगे की कार्रवाई पर नजर

नगरीय विकास एवं आवास विभाग का यह पत्र फिलहाल कारण बताओ सूचना पत्र है, अंतिम दंडात्मक आदेश नहीं। अब मामले में अध्यक्ष मंजू राय की ओर से दिया जाने वाला जवाब, प्रस्तुत दस्तावेज और शासन का अगला निर्णय महत्वपूर्ण होगा।

Dheeraj Jonsan
By Dheeraj Jonsan

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