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सरकार के ‘अच्छे दिन’ :मप्र में पेट्रोल-डीजल की बढ़ी कीमतों से खजाने में आएंगे 600 करोड़ रुपए

पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों से आम जनता, ट्रांसपोर्टर्स और किसान भले ही चिंतित हो, मगर इस वृद्धि के चलते प्रदेश सरकार के खजाने के ‘अच्छे दिन’ आ गए हैं। पिछली तीन वृद्धि को ध्यान में रखा जाए तो प्रदेश के खजाने में इस वित्तीय वर्ष में करीब 600 करोड़ का इजाफा हो जाएगा।
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मप्र में पेट्रोल-डीजल की बढ़ी कीमतों से खजाने में आएंगे 600 करोड़ रुपए

मनीष दीक्षित, भोपाल। पेट्रोल-डीजल की मूल्यविद्ध से मप्र सरकार को साल में करीब 600 करोड़ खजाने में बढ़ सकते हैं।वर्तमान में जो अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियां हैं, उससे लगता है कि आने वाले दिनों में तेल कंपनियों के पास दाम बढ़ाने के अलावा शायद ही कोई विकल्प हो। इससे केंद्र और राज्य सरकारों की आय भी बढ़ेगी। आने वाले दिनों में यदि केंद्र और राज्य सरकारों ने पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले टैक्सेज कम नहीं किए तो इनकी कीमतें और बढ़ेंगी। 

वैट के कारण होगा सरकार को फायदा

दरअसल, मप्र सरकार पेट्रोल-डीजल पर एक निश्चित प्रतिशत में वैट और अतिरिक्त उपकर लगाती है। जब कच्चे तेल की कीमतों के कारण पेट्रोल-डीजल के आधार मूल्य में वृद्धि होती है या कीमतें बढ़ती हैं, तो वैट की गणना अधिक मूल्य पर होने से सरकार के राजस्व में सीधा इजाफा होता है। भविष्य में पेट्रोल-डीजल की कीमतें और बढ़ी तो मप्र के खजाने पर भी असर होगा। अभी पांच रुपए की वृद्धि होने पर खजाने में करीब 600 करोड़ आएंगे। कीमतें 10 रुपए या उससे अधिक बढ़ती हैं, तो राजस्व 1000 करोड़ तक बढ़ जाएगा। 

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वर्ष 2025-26 में वैट और सेस से 15 हजार करोड़ राजस्व 

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2025 -26  के दौरान पेट्रोल-डीजल पर वैट और सेस से मप्र सरकार को करीब 15,000 करोड़ का राजस्व मिला था। शायद इसी वजह से राज्य सरकार के लिए टैक्स कम करना आर्थिक रूप से आसान फैसला नहीं माना जा रहा। हालांकि हाल ही में केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी घटा चुकी है, इसलिए सरकार पर भी इसका दबाव पड़ सकता है। 

पेट्रोल-डीजल की कीमत का मप्र में यह है गणित

मप्र में पेट्रोल पर 29 प्रतिशत वैट लगाया जाता है। इसके अलावा प्रति लीटर 2.50 रुपए का फिक्स टैक्स और 1 प्रतिशत सेस भी लिया जाता है। वहीं डीजल पर 19 प्रतिशत वैट, 1.50 रुपए प्रति लीटर फिक्स टैक्स और 1 प्रतिशत सेस है।

सरकार को वैट की दरों में कमी करना चाहिए 

ऐसा लग रहा है कि अभी अंतर्राष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतें और बढ़ेंगी। इसलिए केंद्र को एक्साइज और प्रदेश सरकार को वैट की दरों में कमी करनी चाहिए। टैक्स घटाने के अलावा सरकार को स्थापना व्यय भी कम करने चाहिए। प्रधानमंत्री ने भी इसके संकेत दिए हैं, जिसका असर देखने को मिल सकता है।

जयंत मलैया, पूर्व वित्त मंत्री

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आम आदमी को राहत दे केंद्र और राज्य सरकार 

केंद्र और प्रदेश सरकार को पेट्रोल- डीजल पर वैट कम कर आम आदमी को राहत देनी चाहिए। इनकी कीमतें बढ़ने का असर अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। डीजल मंहगा होने से परिवहन और माल ढुलाई की दर बढ़ती है, जिससे आम उपयोग की वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ जाती हैं।

राघवजी भाई, पूर्व वित्त मंत्री

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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