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दादा गुरु के 2100 निराहार दिवस पर दमोह में लगाए गए 2100 पौधे,पर्यावरण बचाने का दिया संदेश

दमोह के जरारूधाम गौ-अभ्यारण्य में दादा गुरु के 2100 निराहार दिवस पूरे होने पर 2100 पौधे लगाए गए। कार्यक्रम में मंत्री प्रहलाद पटेल ने पर्यावरण संरक्षण, जैविक खेती और जनभागीदारी पर जोर दिया। इस दौरान रक्तदान शिविर, सत्संग और मंथन अतिथि गृह का लोकार्पण भी किया गया।
दमोह में दादा गुरु के 2100वें निराहार दिवस को पर्यावरण बचाने के एक अद्भुत संदेश के साथ खास तरह से मनाया गया।

दमोह। मध्य प्रदेश के दमोह जिले स्थित जरारूधाम गौ-अभ्यारण्य में शुक्रवार को दादा गुरु की अखंड निराहार साधना के 2100 दिन पूरे होने पर 2100 पौधों का रोपण किया गया। इस अवसर पर प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की नहीं, बल्कि समाज की भी जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने की अपील की।

2100 पौधों के साथ शुरू हुआ विशेष अभियान

जरारूधाम में आयोजित 'वृहद पौधारोपण महाअभियान' के तहत दादा गुरु ने बरगद (वट) सहित कई प्रजातियों के पौधे लगाकर अभियान की शुरुआत की। इस दौरान जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, कर्मचारियों, स्वयंसेवकों और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भी पौधारोपण किया। प्रहलाद पटेल ने बताया कि पिछले वर्ष दादा गुरु के 1705 निराहार दिवस पूरे होने पर 1705 पौधे लगाए गए थे। आज वे सभी पौधे सुरक्षित हैं और अच्छी तरह विकसित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह लोगों की भागीदारी और सेवा भावना का परिणाम है।

श्रद्धालुओं के लिए बढ़ाई जाएंगी सुविधाएं

मंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने यहां रुककर संस्थान का सम्मान बढ़ाया। उन्होंने बताया कि अगले वर्ष श्रद्धालुओं के लिए बेहतर आवास और अन्य सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा, ताकि परिवार के साथ आने वाले लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो। कार्यक्रम के दौरान 'मंथन अतिथि गृह' का भी लोकार्पण किया गया। यहां दादा गुरु और उनके सहयोगियों के ठहरने की व्यवस्था की गई है।

गौ-अभ्यारण्य में शुरू होगा जैविक खाद का उत्पादन

प्रहलाद पटेल ने बताया कि जरारूधाम गौ-अभ्यारण्य में इसी सप्ताह से जैविक खाद का उत्पादन शुरू किया जाएगा। उनका कहना था कि यह खाद रासायनिक उर्वरक डीएपी का विकल्प बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगी। उन्होंने कहा कि संस्थान भविष्य में भी पर्यावरण संरक्षण, गौसंवर्धन और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम करता रहेगा।

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नर्मदा परिक्रमा को बताया आध्यात्मिक साधना

अपने संबोधन में मंत्री ने नर्मदा परिक्रमा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह केवल यात्रा नहीं, बल्कि ध्यान, योग और भक्ति का संगम है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि मां नर्मदा के तट पर कोई भी भूखा नहीं सोता। वे हर वर्ष अपने विधानसभा क्षेत्र गोटेगांव में नर्मदा परिक्रमा करते हैं और इसे अपने जीवन की महत्वपूर्ण आध्यात्मिक साधना मानते हैं।

दादा गुरु बोले- धरती हमारी सबसे बड़ी पहचान है

दादा गुरु ने सत्संग को जीवन में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि जब भी सत्संग का अवसर मिले, उसे नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि इससे मनुष्य को नई सोच और आध्यात्मिक ऊर्जा मिलती है। उन्होंने कहा कि जाति, पंथ और संप्रदाय अलग हो सकते हैं, लेकिन हमारी धरती और माटी एक है। दादा गुरु ने सभी लोगों से धरती को मां का सम्मान देने, प्रकृति की रक्षा करने और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया।

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रक्तदान शिविर और सत्संग में जुटे श्रद्धालु

कार्यक्रम में पौधारोपण के साथ रक्तदान शिविर, सत्संग संवाद और प्रसादी वितरण का भी आयोजन किया गया। मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों से आए श्रद्धालुओं, स्वयंसेवकों और स्थानीय लोगों ने इसमें बढ़-चढ़कर भाग लिया। आयोजकों ने कहा कि आने वाले समय में भी पर्यावरण संरक्षण और समाज सेवा से जुड़े ऐसे कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाएंगे।

Dheeraj Jonsan
By Dheeraj Jonsan

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