मैनपावर सप्लाई घोटाला:हाईकोर्ट से अनवर ढेबर को झटका, जमानत याचिका खारिज

बिलासपुर। कोर्ट ने कहा कि आर्थिक अपराध सुनियोजित साजिश होते हैं। ओवरटाइम भुगतान में गड़बड़ी और रिश्वतखोरी के आरोप सामने आए हैं। जांच में नकद रकम और कमीशन सिस्टम का खुलासा हुआ है। वहीं ढेबर को मामले का मुख्य साजिशकर्ता माना गया है।
कोर्ट का सख्त रुख
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि आर्थिक अपराध सामान्य अपराधों से अलग और अधिक गंभीर होते हैं। अदालत के अनुसार, ऐसे अपराध अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाते है। जब मामला सार्वजनिक पैसे और सरकारी खजाने से जुड़ा हो, तब कोर्ट को अधिक सतर्क रहना चाहिए। फैसले में यह भी उल्लेख किया गया कि केवल प्रभावशाली व्यक्ति होने के आधार पर राहत नहीं दी जा सकती।
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ओवरटाइम भुगतान में गड़बड़ी का आरोप
यह पूरा मामला CSMCL में कर्मचारियों के ओवरटाइम भुगतान में कथित अनियमितताओं से जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसियों के अनुसार, कर्मचारियों को मिलने वाले भुगतान में हेराफेरी की गई। इस प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के संकेत मिले हैं। ACB ने इस आधार पर धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार का केस दर्ज किया है। आरोप है कि भुगतान प्रणाली को जानबूझकर प्रभावित किया गया। इससे सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग हुआ है।
जांच में सामने आया कमीशन का खेल
जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि मैनपावर सप्लाई करने वाली एजेंसियों से कमीशन लिया जाता था। आरोप है कि जब तक एजेंसियां तय रकम नहीं देती थीं, उनके बिल पास नहीं किए जाते थे। शुरुआत में यह कमीशन एक निश्चित दर पर था, लेकिन बाद में इसे बढ़ा दिया गया। जांच में सामने आया कि बिल राशि का एक-तिहाई या उससे अधिक तक वसूली की जाती थी। यह पूरा सिस्टम सुनियोजित तरीके से संचालित हो रहा था। इससे भ्रष्टाचार के बड़े नेटवर्क का संकेत मिलता है।
एक कर्मचारी लाखों की रिश्वत लेते पकड़ा गया
ईडी ने 29 नवंबर 2023 को एक ट्रैप कार्रवाई के दौरान बड़ी रकम बरामद की थी। ईगल हंटर सॉल्यूशंस के कर्मचारियों को 28.80 लाख रुपए की रिश्वत देते हुए पकड़ा गया था। इसी कार्रवाई के आधार पर आगे की जांच शुरू हुई। बाद में 23 फरवरी 2026 को अनवर ढेबर को गिरफ्तार किया गया। जांच एजेंसियों ने इसे मामले का अहम मोड़ बताया है।
अनवर ढेबर ने खुद को बताया निर्दोष
अनवर ढेबर ने अपनी जमानत याचिका में खुद को निर्दोष बताते हुए राजनीतिक साजिश का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि उन्हें जानबूझकर फंसाया जा रहा है और बार-बार अलग-अलग एफआईआर दर्ज की जा रही हैं। हालांकि, राज्य सरकार ने इस दलील का विरोध किया। कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने ढेबर को मामले का मुख्य साजिशकर्ता माना है। साथ ही शुरुआती जांच में पर्याप्त सबूत होने की बात भी कही है।












