
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के लखनऊ में पुलिस ने रेप और हत्या के आरोपी को एनकाउंटर में ढेर कर दिया। मलिहाबाद इलाके में पुलिस और आरोपी के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें आरोपी ऑटो ड्राइवर अजय कुमार द्विवेदी घायल हो गया। उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने उस पर एक लाख रुपए का इनाम भी घोषित किया था।
कैसे हुआ एनकाउंटर?
21 मार्च रात करीब 9:30 बजे पुलिस को सूचना मिली कि अजय मलिहाबाद के देवा रेस्टोरेंट के पास छिपा हुआ है और वहां से हरदोई भागने की फिराक में है। इसके बाद क्राइम ब्रांच और मलिहाबाद थाना पुलिस ने इलाके में घेराबंदी कर दी। कुछ देर बाद अजय बाइक से वहां आता दिखा। पुलिस ने उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन उसने भागने का प्रयास किया। उसने अपनी बाइक खेतों की तरफ मोड़ दी, लेकिन संतुलन बिगड़ने से गिर गया। फिर उसने पुलिस पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस की गोली से वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे फौरन अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
क्या है पूरा मामला
यह घटना 18 जनवरी की है, जब एक महिला वाराणसी से पेपर देकर लौट रही थी। रात करीब 1:30 बजे वह लखनऊ के आलमबाग बस स्टैंड पर उतरी और चिनहट जाने के लिए ऑटो लिया। लेकिन ड्राइवर अजय ने रास्ता बदलकर उसे मलिहाबाद के एक आम के बाग में ले गया। वहां उसने रेप की कोशिश की और विरोध करने पर महिला का गला दबाकर हत्या कर दी।
कैसे खुला राज?
पीड़िता को ऑटो ड्राइवर की हरकत संदिग्ध लगी, इसलिए उसने अपने भाई की पत्नी को फोन कर इसकी जानकारी दी और लाइव लोकेशन भेज दी। जब भाई ने लोकेशन देखी, तो उसे रास्ता बदला हुआ लगा। इस दौरान जब भाई ने दोबारा फोन किया तो महिला के चीखने की आवाज आई और कॉल कट गया। इसके बाद परिवार ने तुरंत 112 नंबर पर पुलिस को सूचना दी। पुलिस जब तक मौके पर पहुंची, तब तक महिला की हत्या हो चुकी थी।
अजय का भाई भी गिरफ्तार
इस केस में पुलिस ने पहले अजय के भाई दिनेश को गिरफ्तार किया था। दिनेश ने ही पुलिस को बताया कि, अजय मलिहाबाद में छिपा हुआ है। दिनेश भी हिस्ट्रीशीटर है और उस पर 9 आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस के मुताबिक, अजय पर 23 मुकदमे दर्ज थे और वह दुबग्गा इलाके का कुख्यात अपराधी था।
वारदात के लिए हटाई थी नंबर प्लेट
जांच में सामने आया कि, अपराध के समय अजय ने अपने ऑटो की नंबर प्लेट हटा दी थी, ताकि पहचान छिपाई जा सके। लेकिन वारदात के बाद उसने दोबारा नंबर प्लेट लगाकर ऑटो चलाना शुरू कर दिया। पुलिस की पैनी नजर से बच नहीं पाया और आखिरकार उसे एनकाउंटर में मार गिराया गया।
क्या बरामद हुआ?
एनकाउंटर के बाद पुलिस ने अजय के पास से कई अहम सबूत बरामद किए, जिनमें-
- मृतक महिला का मोबाइल फोन
- एक अमेरिकन पिस्टल
- सिगरेट और लाइटर
- कुछ नकदी
- पुलिस की कार्रवाई और आगे की जांच
इस एनकाउंटर के बाद पुलिस ने दावा किया कि, अजय के मारे जाने से इलाके में अपराधियों के बीच खौफ बढ़ेगा। पुलिस अब उसके बाकी आपराधिक मामलों की भी जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उसके गैंग में और कौन-कौन लोग शामिल थे।
लखनऊ पुलिस का बयान
डीसीपी पश्चिम विश्वजीत श्रीवास्तव ने बताया कि, यह एक सुनियोजित ऑपरेशन था। पुलिस की कई टीमों ने अजय को ट्रैक किया और उसकी हर मूवमेंट पर नजर रखी। जैसे ही वह मलिहाबाद में नजर आया, टीम ने घेराबंदी कर उसे रोकने का प्रयास किया, लेकिन उसने फायरिंग कर दी। जवाबी फायरिंग में वह मारा गया।
पुलिस का कहना है कि ऐसे अपराधियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। इस घटना के बाद लखनऊ पुलिस की कार्यप्रणाली की सराहना की जा रही है और लोग न्याय मिलने पर संतोष जता रहे हैं। हालांकि, पुलिस अब भी इस मामले की पूरी जांच कर रही है और अजय के संपर्क में रहे अन्य अपराधियों को भी जल्द पकड़ने का दावा कर रही है।
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