नेशनल डेस्क। देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार द्वारा लाया गया नारी शक्ति वंदन अधिनियम अभी तक पूरी तरह लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है। लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने वाला यह कानून संसद से पारित हो चुका है, लेकिन नई जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया पूरी न होने के कारण इसका लाभ अभी तक नहीं मिल पाया है। अब सरकार इस कानून को जल्द लागू करने के लिए आवश्यक संशोधन लाने की तैयारी कर रही है, ताकि महिलाओं को राजनीति में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिल सके।
सरकार संसद में संशोधन विधेयक लाने की योजना बना रही है, जिसमें लोकसभा सीटों के परिसीमन और संख्या बढ़ाने का प्रावधान किया जाएगा। प्रस्तावित बदलाव के अनुसार वर्ष 2011 की जनगणना को आधार बनाकर सीटों का पुनर्निर्धारण किया जा सकता है। यदि संशोधन पारित हो जाता है, तो लोकसभा की कुल सीटें 543 से बढ़कर 816 हो सकती हैं। इनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रहने की संभावना जताई जा रही है, जिससे संसद में महिला प्रतिनिधियों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।
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नारी शक्ति वंदन अधिनियम में पहले यह प्रावधान था कि आरक्षण नई जनगणना और परिसीमन के बाद ही लागू होगा। सूत्रों के अनुसार अब सरकार इस प्रक्रिया को तेज करते हुए संशोधन के माध्यम से वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव तक महिला आरक्षण लागू करने का लक्ष्य बना रही है। इसके लिए कानूनी प्रक्रिया को सरल बनाने और समयबद्ध तरीके से बदलाव लागू करने की रणनीति तैयार की जा रही है।
महिला आरक्षण को लागू करने के लिए सरकार संविधान संशोधन का रास्ता भी अपना सकती है। प्रस्तावित संशोधन के जरिए 2011 की जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने की व्यवस्था की जाएगी। यदि यह प्रक्रिया पूरी होती है, तो 2029 के आम चुनाव में बढ़ी हुई सीटों पर महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जा सकेगा। इससे संसद में महिलाओं की भागीदारी पहले की तुलना में काफी अधिक हो सकती है।
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महिला आरक्षण के मुद्दे पर राजनीतिक सहमति बनाने के लिए सरकार ने विपक्षी दलों से संवाद शुरू कर दिया है। गृह मंत्री अमित शाह ने शिवसेना (यूबीटी) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) सहित कुछ दलों के नेताओं से चर्चा की है। अभी कांग्रेस और अन्य प्रमुख दलों के साथ बातचीत होना बाकी है। माना जा रहा है कि व्यापक सहमति बनने के बाद संशोधन विधेयक को संसद में पेश किया जाएगा, जिससे महिला आरक्षण लागू करने का रास्ता साफ हो सके।