नेशनल डेस्क। ‘लैंड-फॉर-जॉब्स’ केस में कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि ट्रायल अपने तय नियमों के तहत ही आगे बढ़ेगा और आरोपियों को हर दस्तावेज की मांग करने का असीमित अधिकार नहीं है। इस फैसले ने राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज कर दी है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें ‘अनरिलायड’ दस्तावेजों की मांग की गई थी। अदालत ने कहा कि जिन दस्तावेजों पर अभियोजन भरोसा नहीं कर रहा, उन्हें आरोपियों को देना जरूरी नहीं है। कोर्ट के अनुसार, पहले अभियोजन अपने साक्ष्य पेश करेगा और उसी आधार पर सुनवाई आगे बढ़ेगी। बिना ठोस बचाव के अतिरिक्त दस्तावेज मांगना न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
अदालत का रुख अन्य आरोपियों के मामले में भी सख्त ही रहा। लालू यादव के निजी सचिव आरके महाजन और रेलवे के पूर्व महाप्रबंधक महीप कपूर की याचिकाएं भी खारिज कर दी गईं। महाजन ने एक और कपूर ने 23 दस्तावेजों की मांग की थी। कोर्ट ने ‘अनरिलायड’ दस्तावेजों को ऐसी सामग्री बताया, जिन्हें जांच एजेंसियां जब्त तो करती हैं, लेकिन अपने केस में शामिल नहीं करतीं। न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि इन याचिकाओं से मामला अनावश्यक रूप से उलझ सकता है।
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने अपने विस्तृत आदेश में कहा कि अदालत का नियंत्रण किसी भी हालत में कमजोर नहीं किया जा सकता। उन्होंने संकेत दिया कि याचिकाओं के पीछे कार्यवाही को लंबा खींचने की मंशा नजर आती है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि निष्पक्ष सुनवाई के साथ-साथ समय पर न्याय सुनिश्चित करना भी जरूरी है, इसलिए आरोपियों को कार्यवाही पर शर्तें थोपने की अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने कहा कि आरोपियों को पहले ही उन दस्तावेजों का निरीक्षण करने का पर्याप्त अवसर दिया गया था, जो साक्ष्यों के उस समूह का हिस्सा हैं, अभियोजन की शिकायत में जिनका इस्तेमाल नहीं किया गया।