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Kolkata Earthquake :कोलकाता समेत बंगाल के कई जिलों में भूकंप के झटके, रिक्टर स्केल पर 5.6 मापी गई तीव्रता

श्चिम बंगाल में शुक्रवार सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। कोलकाता, मालदा, नादिया और उत्तर बंगाल के कई जिलों में जमीन हिली। झटके बांग्लादेश के टुंगी से आए और त्रिपुरा तक महसूस किए गए। पाकिस्तान और अफगानिस्तान में भी हल्के झटके दर्ज हुए।
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कोलकाता समेत बंगाल के कई जिलों में भूकंप के झटके, रिक्टर स्केल पर 5.6 मापी गई तीव्रता
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    कोलकाता। पश्चिम बंगाल में शुक्रवार सुबह भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। कोलकाता समेत राज्य के कई जिलों में जमीन हिलती महसूस की गई और लोग दहशत में घरों से बाहर निकल आए। स्थानीय समयानुसार, झटके सुबह 10 बजकर 38 मिनट पर महसूस किए गए।

    यूरोपियन-मेडिटेरेनियन सीस्मोलॉजिकल सेंटर (EMSC) के अनुसार, भूकंप का केंद्र बांग्लादेश के टुंगी से करीब 27 किलोमीटर पूर्व में था। रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 5.6 मापी गई। भूकंप के बाद कई क्षेत्रों से हल्के झटकों की भी सूचना मिली।

    प्रभावित जिले और क्षेत्र

    भूकंप के झटके पश्चिम बंगाल के मालदा, नादिया, कूचबिहार, दक्षिण दिनाजपुर और हुगली समेत कई जिलों में महसूस किए गए। झटके केवल बंगाल तक सीमित नहीं रहे, बल्कि त्रिपुरा के कुछ हिस्सों में भी भूकंप महसूस किया गया। बांग्लादेश की राजधानी ढाका में भूकंप के बाद कंपन पूर्वोत्तर और कोलकाता तक पहुंचे।

    पाकिस्तान और अफगानिस्तान में भी झटके

    पाकिस्तान में तड़के भूकंप के झटके महसूस किए गए। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.2 मापी गई और इसका केंद्र जमीन से लगभग 135 किलोमीटर की गहराई पर था। राहत की बात है कि, अब तक किसी तरह के नुकसान की सूचना नहीं मिली।

    अफगानिस्तान में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार पहला झटका रात 1:59 बजे आया, जिसका केंद्र 190 किलोमीटर की गहराई में था। इसके बाद सुबह 3:09 बजे पाकिस्तान में दूसरा झटका महसूस किया गया।

    क्यों आते हैं भूकंप?

    भूकंप का मुख्य कारण पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेट्स की गति और टकराहट है। पृथ्वी की बाहरी परत, जिसमें क्रस्ट और ऊपरी मेंटल शामिल हैं, 15 बड़ी और छोटी टेक्टोनिक प्लेटों से बनी है। ये प्लेटें स्थिर नहीं रहतीं, बल्कि धीरे-धीरे हिलती-डुलती रहती हैं। जब ये प्लेटें आपस में टकराती या रगड़ खाती हैं, तो ऊर्जा का अत्यधिक दबाव बनता है। यह ऊर्जा अचानक बाहर निकलती है और भूकंप के झटके धरती पर महसूस होते हैं।

    अफगानिस्तान, पाकिस्तान और उत्तर भारत के कई हिस्से दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंप-प्रवण क्षेत्रों में आते हैं। इसलिए यहां समय-समय पर हल्के से लेकर तेज झटके महसूस होते रहते हैं।

    रिक्टर स्केल और भूकंप की तीव्रता

    0-1.9: केवल सिस्मोग्राफ पर पता चलता है।

    2-2.9: हल्का कंपन।

    3-3.9: ट्रक के गुजरने जैसा असर।

    4-4.9: खिड़कियां टूट सकती हैं, फ्रेम गिर सकते हैं।

    5-5.9: भारी फर्नीचर हिल सकता है।

    6-6.9: इमारतों की नींव दरक सकती है।

    7-7.9: इमारतें गिर सकती हैं, पाइप फट सकते हैं।

    8-8.9: बड़े पुल और इमारतें गिर सकती हैं।

    9 से ज्यादा: पूरी तबाही, सुनामी का खतरा।

    हरियाणा के सोनीपत में 3.4 तीव्रता का भूकंप हल्का था, लेकिन यह बार-बार आने वाली हलचल की याद दिलाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, भविष्य में भी इस क्षेत्र में हलके या मध्यम भूकंप की संभावना बनी रहेगी।


    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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