PlayBreaking News

खामेनेई का अंतिम संस्कार क्यों टला?जानिए शव कितने समय तक रखा जा सकता है

खामेनेई के निधन के बाद अंतिम संस्कार क्यों टला? जानिए देरी के कारण और शव को कितने समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
Follow on Google News
जानिए शव कितने समय तक रखा जा सकता है
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई के निधन के बाद भी उनका अंतिम संस्कार नहीं हो पाया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक उनकी मृत्यु 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के कथित संयुक्त हवाई हमले में हुई थी। इसके बाद भी अंतिम संस्कार की रस्में पूरी नहीं की गई हैं। ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर अंतिम संस्कार में देरी क्यों हो रही है और किसी शव को कितने समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

    शिया इस्लाम में अंतिम संस्कार की परंपरा

    शिया इस्लाम में किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसे जल्द से जल्द दफनाने की परंपरा है। सामान्य प्रक्रिया में:

    1. शव को पहले गुस्ल (धार्मिक स्नान) कराया जाता है।
    2. इसके बाद उसे सफेद कफन में लपेटा जाता है।
    3. फिर जनाजा नमाज अदा की जाती है।
    4. अंत में शव को जल्द दफना दिया जाता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दफनाने में देरी नहीं की जाती, जब तक कि कोई विशेष परिस्थिति न हो।

    ये भी पढ़ें: दारोगा भर्ती परीक्षा में पंडित शब्द पर विवाद : डिप्टी सीएम नाराज, सीएम योगी ने भर्ती बोर्डों को दिए सख्त निर्देश

    अंतिम संस्कार में देरी क्यों?

    खामेनेई के मामले में अंतिम संस्कार टलने की मुख्य वजह सुरक्षा चिंताएं बताई जा रही हैं। खामेनेई ईरान की सबसे प्रभावशाली धार्मिक और राजनीतिक हस्तियों में से एक रहे हैं। ऐसे में उनके अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना है। अधिकारियों को आशंका है कि क्षेत्रीय तनाव के माहौल में इतना बड़ा जनसमूह सुरक्षा के लिए जोखिम बन सकता है। इसलिए संभव है कि अंतिम संस्कार को तब तक रोका गया हो जब तक सुरक्षा व्यवस्था मजबूत न हो जाए।

    शव को कितने समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है?

    वैज्ञानिक दृष्टि से किसी शव को सुरक्षित रखने की अवधि इस बात पर निर्भर करती है कि उसे किस तरीके से संरक्षित किया गया है।

     1. रेफ्रिजरेशन (कोल्ड स्टोरेज)

    अगर शव को ठंडे वातावरण में रखा जाए, तो सड़ने की प्रक्रिया काफी धीमी हो जाती है। सामान्य रूप से रेफ्रिजरेटेड वातावरण में शव को कई हफ्तों तक सुरक्षित रखा जा सकता है। ठंड तापमान बैक्टीरिया की वृद्धि को कम करता है।
    इससे शरीर के प्राकृतिक विघटन की प्रक्रिया धीमी हो जाती है।

     2. एम्बामिंग (रासायनिक संरक्षण)

    कुछ देशों में शव को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए एम्बामिंग की प्रक्रिया अपनाई जाती है।

    इस प्रक्रिया में:

    1. शरीर से खून निकाल दिया जाता है।
    2. उसकी जगह फॉर्मेल्डिहाइड जैसे रसायन डाले जाते हैं।
    3. इससे शरीर कई महीनों या वर्षों तक संरक्षित रह सकता है।

    हालांकि, इस्लामी परंपराओं में आमतौर पर इस प्रक्रिया से परहेज किया जाता है, क्योंकि इसमें शरीर में रसायन डाले जाते हैं।

    3. ममीकरण

    कुछ प्राचीन संस्कृतियों में ममीकरण की प्रक्रिया अपनाई जाती थी।

    इसमें:

    1. शरीर की नमी हटाई जाती है।
    2. उसे सूखा रखा जाता है ताकि सड़न न हो।

    ऐसी तकनीकों से शव को दशकों या सदियों तक सुरक्षित रखा गया है। लेकिन यह प्रक्रिया आधुनिक धार्मिक परंपराओं में सामान्य रूप से उपयोग नहीं की जाती।

    इस्लामी रीति-रिवाज और संरक्षण

    इस्लाम में सामान्य तौर पर प्राकृतिक तरीके से ही शव को सुरक्षित रखा जाता है 

    1. शव को ठंडे और सुरक्षित स्थान पर रखा जाता है।
    2. दफनाने तक उसे ताबूत या सुरक्षित कमरे में रखा जा सकता है।
    3. यदि आवश्यक हो तो बर्फ का उपयोग भी किया जाता है।

    लेकिन रासायनिक बदलाव से बचा जाता है।

    Sona Rajput
    By Sona Rajput

    माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...Read More

    नई दिल्ली
    --°
    बारिश: -- mmह्यूमिडिटी: --%हवा: --
    Source:AccuWeather
    icon

    Latest Posts