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दारोगा भर्ती परीक्षा में पंडित शब्द पर विवाद :डिप्टी सीएम नाराज, सीएम योगी ने भर्ती बोर्डों को दिए सख्त निर्देश

UP पुलिस SI भर्ती परीक्षा के एक सवाल में पंडित शब्द को विकल्प देने पर विवाद हो गया। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने जांच के आदेश दिए, जबकि सीएम योगी ने भर्ती बोर्डों को सख्त निर्देश जारी किए।
डिप्टी सीएम नाराज, सीएम योगी ने भर्ती बोर्डों को दिए सख्त निर्देश
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस की उपनिरीक्षक (SI) भर्ती परीक्षा के एक सवाल को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। हिंदी सेक्शन में पूछे गए एक प्रश्न के विकल्प में पंडित शब्द शामिल होने पर कई लोगों ने आपत्ति जताई है। इस मामले के सामने आने के बाद प्रदेश सरकार ने इसे गंभीरता से लिया है और जांच के आदेश दिए गए हैं। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी भी परीक्षा में ऐसा कोई शब्द नहीं होना चाहिए जिससे किसी समाज या समुदाय की भावनाएं आहत हों। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी पूरे मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए भर्ती बोर्डों को नए निर्देश जारी किए हैं।

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    विवादित सवाल क्या था ?

    14 मार्च को आयोजित उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा की पहली शिफ्ट में हिंदी का एक सवाल पूछा गया था। सवाल था-‘अवसर के अनुसार बदल जाने वाला’ वाक्यांश के लिए सही एक शब्द चुनिए।

    इसके चार विकल्प दिए गए थे:

    A – पंडित
    B – अवसरवादी
    C – निष्कपट
    D – सदाचारी

    इस सवाल का सही उत्तर ‘अवसरवादी’ माना जाता है। लेकिन प्रश्नपत्र में ‘पंडित’ शब्द को विकल्प के रूप में दिए जाने पर कई लोगों ने आपत्ति जताई। उनका कहना है कि इस तरह के शब्दों का प्रयोग प्रतियोगी परीक्षाओं में सावधानी से होना चाहिए।

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    सोशल मीडिया पर तेज हुई बहस

    सोशल मीडिया पर इस प्रश्न के वायरल होते ही बहस शुरू हो गई। कई अभ्यर्थियों और लोगों ने कहा कि परीक्षा के प्रश्नपत्र में ऐसे शब्दों का प्रयोग नहीं होना चाहिए जिससे किसी समुदाय को लेकर गलत संदेश जाए। कुछ लोगों ने इसे पेपर सेटिंग में लापरवाही बताया, जबकि कुछ ने इसे अनावश्यक विवाद पैदा करने वाला कदम कहा। देखते ही देखते यह मामला राजनीतिक स्तर तक पहुंच गया और कई नेताओं ने इस पर प्रतिक्रिया दी।

    डिप्टी सीएम ने दिए जांच के आदेश

    उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा के एक प्रश्न को लेकर गंभीर आपत्ति सामने आई है। सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और तुरंत जांच के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रश्न के कारण किसी समाज या वर्ग की गरिमा को ठेस पहुंचती है तो यह बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है। डिप्टी सीएम ने यह भी कहा कि दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार सभी समाजों के सम्मान और समानता के सिद्धांत पर काम करती है।

    भाजपा विधायकों ने भी उठाई आपत्ति

    इस विवाद के बाद भाजपा के कई विधायकों ने भी इस मामले को उठाया। जौनपुर जिले की बदलापुर विधानसभा सीट से विधायक रमेश चंद्र ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस प्रश्न पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि विकल्प में ‘पंडित’ शब्द शामिल करना बौद्धिक समाज का अपमान है और इससे एक समुदाय की भावनाएं आहत हो सकती हैं। विधायक ने इस प्रश्न को निरस्त करने और पेपर तैयार करने वाली समिति के खिलाफ जांच की मांग की है। इसके अलावा देवरिया से विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मामले की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि प्रश्नपत्र में इस तरह का विकल्प देना जानबूझकर किया गया प्रतीत होता है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

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    भर्ती बोर्ड ने दी सफाई

    विवाद बढ़ने के बाद Uttar Pradesh Police Recruitment and Promotion Board ने इस मामले पर स्पष्टीकरण जारी किया है। बोर्ड ने कहा कि प्रश्नपत्र स्थानीय स्तर पर तैयार नहीं किए जाते। इन्हें गोपनीय प्रक्रिया के तहत बाहरी विशेषज्ञ संस्थाओं द्वारा तैयार किया जाता है। परीक्षा से पहले बोर्ड के अधिकारियों को भी प्रश्नपत्र देखने की अनुमति नहीं होती। प्रश्नपत्र सील बंद पैकेट में परीक्षा केंद्रों पर भेजे जाते हैं और अभ्यर्थियों के सामने ही खोले जाते हैं। बोर्ड ने कहा कि विवादित प्रश्न के मामले में जांच के आदेश दे दिए गए हैं और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

    सीएम योगी ने जारी किए सख्त निर्देश

    मामला बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के सभी भर्ती बोर्ड और आयोगों के अध्यक्षों को सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में किसी भी परीक्षा के प्रश्नपत्र में ऐसे शब्दों का प्रयोग नहीं होना चाहिए जिससे किसी जाति, धर्म या समुदाय की भावनाएं आहत हों।मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि प्रश्नपत्र तैयार करते समय शब्दों का चयन बहुत सावधानी और संवेदनशीलता के साथ किया जाए।


    पेपर सेटर्स के लिए नए नियम

    सरकार ने संकेत दिए हैं कि अब प्रश्नपत्र तैयार करने वाली एजेंसियों के लिए नियम और सख्त किए जाएंगे। अब से एजेंसियों के साथ होने वाले अनुबंध (MoU) में यह शर्त जोड़ी जाएगी कि वे किसी भी समुदाय की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले शब्दों का प्रयोग नहीं करेंगे। अगर कोई एजेंसी या पेपर सेटर इस नियम का उल्लंघन करता है तो उस पर जुर्माना लगाया जा सकता है। साथ ही उसे ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है ताकि भविष्य में उसे किसी भी सरकारी परीक्षा का काम न दिया जाए।

    छात्रों के विश्वास को बनाए रखना जरूरी

    सरकार का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और विश्वास बनाए रखना बेहद जरूरी है। इसीलिए इस मामले को सामने आते ही गंभीरता से लिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र तैयार करते समय भाषा और शब्दों का चयन बहुत सोच-समझकर किया जाना चाहिए। इससे अनावश्यक विवादों से बचा जा सकता है।

    आगे क्या होगा

    फिलहाल पूरे मामले की जांच चल रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद यह तय किया जाएगा कि विवादित प्रश्न को रद्द किया जाए या अन्य कोई कदम उठाया जाए। सरकार ने साफ कर दिया है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए परीक्षा प्रणाली में और सख्ती लाई जाएगी। इस घटना के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया और शब्दों के चयन को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है।

    Sona Rajput
    By Sona Rajput

    माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...Read More

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