फर्जी नंबर प्लेट, 12 गोलियां…!आखिर कैसे हुई सुवेंदु अधिकारी के PA चंद्रनाथ रथ की हत्या?

उत्तर 24 परगना। पश्चिम बंगाल में चुनाव नतीजों के बाद भड़की हिंसा के बीच बीजेपी नेता और नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी के PA चंद्रनाथ रथ की हत्या ने पूरे राज्य की राजनीति को झकझोर दिया है। उत्तर 24 परगना जिले के मध्यमग्राम इलाके में दिनदहाड़े हुए इस शूटआउट में हमलावरों ने सोचे-समझे तरीके से हमला किया। शुरुआती जांच में फर्जी नंबर प्लेट, पहले से रेकी और भागने की प्लानिंग जैसे कई बड़े खुलासे सामने आए हैं।
क्या हुआ था बीती रात?
पुलिस और चश्मदीदों के मुताबिक, चंद्रनाथ रथ अपनी कार से जा रहे थे। उसी दौरान कुछ संदिग्ध लोग काफी देर से उनकी गाड़ी का पीछा कर रहे थे। मध्यमग्राम के दोहरिया-जेसोर रोड के पास अचानक उनकी कार को घेर लिया गया।
बताया जा रहा है कि जैसे ही कार की रफ्तार धीमी हुई, हमलावर एक्टिव हो गए। पहले कार की विंडशील्ड पर गोलियां चलाई गईं और फिर सामने की सीट पर बैठे चंद्रनाथ रथ को निशाना बनाया गया। हमलावरों ने बेहद करीब से ताबड़तोड़ फायरिंग की। मौके पर अफरा-तफरी मच गई। घायल हालत में चंद्रनाथ रथ को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस हमले में उनके साथ मौजूद पीएस बुद्धदेव और ड्राइवर भी घायल हुए हैं।
फर्जी नंबर प्लेट वाली कार से पहुंचे हमलावर
जांच में सबसे बड़ा खुलासा उस कार और बाइक दोनों से आए थे। पश्चिम बंगाल पुलिस ने संदिग्ध कार को जब्त कर लिया है। कार पर सिलीगुड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर लगा था, लेकिन जांच में पता चला कि नंबर प्लेट नकली थी और उसके साथ छेड़छाड़ की गई थी।
पश्चिम बंगाल के डीजीपी सिद्धनाथ गुप्ता ने बताया कि घटनास्थल से जिंदा कारतूस और फायरिंग के कई खोखे बरामद किए गए हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि वाहन कहां से आया और उसके पीछे कौन सा नेटवर्क काम कर रहा था।
कार और बाइक दोनों से पहुंचे थे हमलावर
जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस हमले में सिर्फ एक वाहन नहीं बल्कि कार और बाइक दोनों का इस्तेमाल हुआ। पहले चार पहिया वाहन ने टारगेट कार को रोका, फिर बाइक सवार बदमाशों ने गोलीबारी शुरू कर दी। हमले के बाद आरोपी बेहद तेजी से मौके से फरार हो गए। पुलिस को शक है कि इस्तेमाल किए गए सभी वाहनों पर फर्जी नंबर प्लेट लगी थीं ताकि पहचान छिपाई जा सके।
क्या यह पूरी तरह प्री-प्लान्ड मर्डर था?
जांच में अब तक जो तथ्य सामने आए हैं, वे इस हत्याकांड को एक सुनियोजित हत्या की तरफ इशारा करते हैं। पुलिस को शक है कि चंद्रनाथ रथ की कई दिनों तक रेकी की गई थी। हमलावरों ने रास्ता, टाइमिंग और भागने का रूट पहले से तय कर रखा था। बीजेपी का भी दावा है कि हत्या अचानक नहीं बल्कि पूरी तैयारी के साथ की गई। सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि 2 से 3 दिनों तक रेकी की गई थी और उसके बाद हमला किया गया। उन्होंने इसे टारगेटेड किलिंग बताया। उन्होंने पश्चिम बंगाल की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह 15 साल के महा-जंगल राज का नतीजा है।
कौन थे चंद्रनाथ रथ?
चंद्रनाथ रथ सिर्फ एक राजनीतिक सहायक नहीं थे, बल्कि सुवेंदु अधिकारी के बेहद करीबी माने जाते थे। वे पहले भारतीय वायुसेना में कार्यरत रह चुके थे। नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। भवानीपुर सीट के चुनाव में भी उनकी अहम भूमिका बताई जा रही है। बीजेपी नेताओं के मुताबिक, वे संगठन के कई महत्वपूर्ण काम संभालते थे और पार्टी विधायकों के बीच उनकी खास पहचान थी।
अस्पताल के बाहर भारी हंगामा
हत्या की खबर फैलते ही अस्पताल के बाहर बीजेपी समर्थकों की भारी भीड़ जुट गई। हमें इंसाफ चाहिए जैसे नारों से माहौल गर्म हो गया। हालात को देखते हुए इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया। सुवेंदु अधिकारी खुद अस्पताल पहुंचे और परिजनों से मुलाकात की। बीजेपी नेताओं ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया।
बीजेपी ने TMC पर लगाए गंभीर आरोप
इस हत्याकांड के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति पूरी तरह गरमा गई है। बीजेपी नेताओं ने सीधे तौर पर ममता बनर्जी की पार्टी पर निशाना साधा। बीजेपी नेता अमित मालवीय ने इसे प्री-प्लान्ड और टारगेटेड किलिंग बताया। वहीं विधायक कौस्तव बागची ने ममता बनर्जी की गिरफ्तारी की मांग कर दी। बीजेपी नेता अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि चंद्रनाथ रथ पार्टी के लिए परिवार जैसे थे और उनकी हत्या ने कार्यकर्ताओं में भारी गुस्सा पैदा कर दिया है।
TMC ने की घटना की निंदा
दूसरी तरफ, सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की है। पार्टी ने कहा कि राजनीतिक हिंसा किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है। साथ ही कोर्ट मॉनिटरिंग में CBI जांच की मांग भी उठाई गई है। टीएमसी का कहना है कि चुनाव बाद उनके कार्यकर्ता भी हिंसा का शिकार हुए हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
पुलिस अब किन बिंदुओं पर कर रही जांच?
पुलिस फिलहाल कई अहम एंगल पर जांच कर रही है।
घटनास्थल के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं।
कॉल डिटेल रिकॉर्ड और मोबाइल लोकेशन की जांच हो रही है।
जब्त कार के नेटवर्क और मालिक तक पहुंचने की कोशिश जारी है।
फर्जी नंबर प्लेट तैयार करने वाले गिरोह की तलाश हो रही है।
यह पता लगाया जा रहा है कि हत्या राजनीतिक साजिश थी या किसी व्यक्तिगत दुश्मनी का हिस्सा।











